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    बधाई:आबादी के साथ बहुत कुछ बढ़ा।

    राकेश अचल का लेख। अब समझ में आया कि '। मोदी है तो मुमकिन है ' क्यों कहा जाता है ? मोदीजी के दूसरे कार्यकाल की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण उपलब्धि ये है कि भारत आबादी के मामले में चीन को पछाड़ कर दुनिया का ' विश्व गुरु बन गया है। यानि जो काम निकम्मी कांग्रेस 55 साल सत्ता में रहने के बाद भी नहीं कर सकी उसे मोदी जी ने आठ साल में कर दिखाया है।
    मुद्दा उत्पादन बढ़ाने का था।किस चीज का उत्पादन बढ़ाना है ऐसी कोई शर्त भी नहीं थी, इसलिए हम जिस चीज का उत्पादन बढ़ा सकते थे, हमने कर दिखाया। कांग्रेस आबादी का महत्व समझती नहीं थी इसलिए शुरू से 'हम दो, हमारे दो' का अभियान चलाती रही। अरबों रूपए खर्च कर दिए विज्ञापन पर। नसबंदी पर ।और न जाने किस-किस उपाय पर। नतीजा क्या हुआ कि कांग्रेस की अपनी आबादी लगातार कम हो गयी और भाजपा की बढ गई।
    भाजपा और उसके सहयोगी संगठन प्राण पण से आबादी बढाओ मुहिम में शामिल हैं। उन्हें इस अभियान पर रुपया भी खर्च नहीं करना पड़ता। पार्टी के बाबा -बैरागी खुद कथा -भागवत में ज्यादा बच्चे पैदा करने का आव्हान करते हैं।अब व्यास पीठ पर बैठे व्यक्ति की बात तो मानी जाती है।असर भी करती हैं। जनता को संदेश दे दिया गया है कि रोटी पानी की फ़िक्र मत करना।अभी 80 करोड़ आबादी को मुफ्त में राशन दे रहे हैं तो ऊपर वाले ने चाहा तो आने वाले वर्षों में 160 करोड़ के लिए भी इंतजाम कर देंगे।बस चीन को पछाड़ना है।

    देश की जनता मोदी जी की बात मानती है।थाली लोटा ताली सब बजा देती है, तो आबादी क्यों न बढाती। भविष्य में भारत में ज्यादा बच्चे पैदा करने वाले सम्मानित किए जाएंगे। उनके कल्याण की वृहद योजनाएं बनाई जाएंगी। विभाग बनाया जाएगा, मंत्री बनाए जाएंगे। अमेरिका की तर्ज पर बच्चों को निशुल्क पढ़ाया जाएगा। रोजगार न सही लेकिन युवकों को बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। यानि आबादी बढ़ाना किसी भी तौर घाटे का सौदा नहीं है। बल्कि ये एक राष्ट्रीय सेवा योजना है।
    संयुक्त राष्ट्र के नए आंकड़ों के मुताबिक भारत की जनसंख्या 142 करोड़ 86 लाख हो गई । जबकि चीन की जनसंख्या 142 करोड़ 57 लाख है ।बढ़ती जनसंख्या अभिशाप है या वरदान? यह अच्छी खबर है या बुरी खबर? इन सवालों से केवल भारत ही नहीं, पूरी दुनिया जूझ रही है. पहले माना जाता था कि अधिक जनसंख्या का अर्थ है संसाधनों पर बोझ. अब एक दलील यह भी दी जाती है कि बढ़ती जनसंख्या का मतलब देश के पहिए को तेजी से घुमाने वाले ज्यादा हाथ. बहरहाल, एक नजर डालते हैं आंकड़ों पर कि आखिर भारत के लिए इसका क्या मतलब है.
    आंकड़ों पर नजर डालें तो पाएंगे कि वर्ष 2050 तक  हर पांचवां भारतीय बुजुर्ग हो जाएगा । केरल और पंजाब में बुजुर्गों की संख्या अधिक होगी वहीं यूपी और बिहार में नौजवानों की संख्या अधिक होगी। संयुक्त राष्ट्र की तरफ से कहा गया है कि 15 से 24 वर्ष के 25 करोड़ नौजवान अभी भारत में हैं. दुनिया में किसी भी देश की तुलना में सबसे अधिक युवा भारत में हैं. साथ ही यह भी अनुमान लगाया गया है कि साल 2060 तक भारत की आबादी बढ़ती रहेगी. वहीं 2060 के बाद भारत की जनसंख्या स्थिर हो जाएगी.
     हम आबादी बढ़ाने में उलझे रहे किंतु आर्थिक विकास में चीन की तुलना में पिछड गये । जारी आंकड़ो के अनुसार चीन और भारत के आर्थिक विकास में बड़ा अतंर दिखाया गया है। हालांकि भारत में गरीबी में कमी हुई।अमीर बढे और भगोड़े भी।गरीबों की संख्या में कमी दर्ज की गई है. भारत ने अब नाइजीरिया को पीछे छोड़ दिया है. 
    महिला श्रमिकों की भागीदारी में भी भारत फिसड्डी है।अब है तो है। मै कुछ साल पहले चीन दौरे पर गया था। वहां मैंने हर क्षेत्र में महिलाओं को काम करते देखा था। मैं हैरान था कि चीन की महिलाएं बच्चे पैदा करने के साथ ही श्रम मे भागीदारी कैसे कर लेती हैं ? भारत की महिलाएं श्रम करने के बजाय धर्म-कर्म में ज्यादा वक्त खर्च करती हैं। राजनीतिक रैलियों, सभाओं , जुलूसों में उनकी ज्यादा उपयोगिता है।
    बहरहाल कोई खुश हो या न हो किंतु मैं भारत की इस उपलब्धि से बहुत खुश हूं। हमारे यहां तो हजार चौरासी की मां की अवधारणा है। हम दो, हमारे दो को मानने वाले देशद्रोही हैं। मुमकिन है कि वे कांग्रेसी या वामपंथी हों। आबादी बढ़ाने के लिए घर बसाना आवश्यक नहीं। ये काम तो कोई भी कर सकता है। इसके लिए शाखामृग होना भी कोई अयोग्यता नहीं है। बल्कि बिना घर बसाए आबादी बढ़ाने में योगदान देना महान काम है।
    जितने ज्यादा हाथ होंगे उतने ज्यादा स्वयं सेवक होंगे। जितने ज्यादा स्वयं सेवक होंगे उतने ज्यादा मतदान होंगे। जितने ज्यादा मतदाता होंगे उतना बड़ा जनादेश होगा। जितना बड़ा जनादेश होगा उतनी पावरफुल सरकार होगी। यानि आबादी लोकतंत्र की गारंटी है। चीन में दूसरा तंत्र मजबूत हुआ है। वहां दूसरे तरह का परिदृश्य है जो यहां से नजर नहीं आ सकता। चीन में युवा शक्ति मंदिर बनाने या मस्जिद तोड़ने का काम नहीं करती। चीन में ये काम सरकार का है। युवा शक्ति तो निर्माण कार्य में रत रहती है। खैर!
    आबादी के विश्व गुरु बनने पर सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं,कि देश इस रफ्तार को बनाए रखे।भूख, खुशहाली, स्वास्थ्य, शिक्षा के इंडेक्स में हम भले ही लगातार पिछड़ गए किंतु आबादी के इंडेक्स में हम सबसे ऊपर है, और आगे भी रहेंगे।

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