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    कानपुर। हटिया का ऐतिहासिक क्रान्तिकारियों का होली मेला 13 मार्च को।

    रिपोर्ट- इब्ने हसन ज़ैदी

    कानपुर। कानपुर नगर अपनी अनूठी एवं महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं के लिए पूरे देश में अपना एक विशेष महत्व रखता है। 6 मार्च  दिन सोमवार को होली है। कानपुर की होली पूरे भारत में अपना अलग स्थान रखती है क्योकि कानपुर में होली से लेकर कानपुर हटिया होली मेला (गंगा मेला) तक होली का उल्लास रहता है। इस बार 82वां होली का मेला  13 मार्च, दिन सोमवार अनुराधा नक्षत्र में प्राचीन परम्परा के अनुसार होगा।

    कानपुर का होली का मेला आजादी के दीवानों की याद में मनाया जाता है, स्वतन्त्रता आन्दोलन चरम सीमा मे था, सन् 1942 में ब्रिटोश सरकार के तत्कालीन जिलाधिकारी कानपुर में होली खेलने पर प्रतिबन्ध लगा दिया था, हटिया के नव युवकों ने यह तय किया कि यह हमारा धार्मिक त्यौहार है इसे हम पूरे हर्ष उल्लास के साथ मनायेंगे। देश आजाद हुआ सन् 1947 में लेकिन कानपुर के हटिया में आजादी का झण्डा सन् 1942 की होली में ही हटिया रज्जन बाबू पार्क में क्षेत्रीय नवयुवक बाबू गुलाब चन्द सेठ के नेतृत्व में इकट्ठा हुए और तिरंगा फहराकर भारत माता की जय, हम आजाद हैं, के जयघोष के साथ रंग खेलना प्रारम्भ किया तत्तकालीन शहर कोतवाल के नेतृत्व में हटिया पार्क को चारो तरफ से पुलिस ने घेर लिया और रंग खेल रहे नव युवकों को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया इसकी प्रतिक्रिया के प्रति स्वरूप देश की आजादी के लिए पूरे शहर में भयंकर होली खेली गयी और ऐलान किया गया कि जब तक नवयुवक नही छोड़े जायेगे निरन्तर होली खेली जायेगी , शहर में कई दिनों तक रंग चला। अतः ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा और गिरफ्तार नवयुवकों को छोड़ना पड़ा। संयोगवश जिस दिन बन्दी छोड़े गये उस दिन अनुराधा नक्षत्र था, तभी से कानपुर में होली का समापन अनुराधा नक्षत्र के दिन गंगा मेले के रुप में मनाया जाने लगा।

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