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    भोपाल। भारत के आठवें अंतरराष्ट्रीय विज्ञान फिल्म पुरस्कार घोषित ।

    भोपाल। (इंडिया साइंस वायर): इंटरनेशनल साइंस फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (आईएसएफएफआई)-2022 में देश एवं दुनिया की कुल 13 फिल्मों को पुरस्कार मिला है। भोपाल में चल रहे चार दिवसीय इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (आईआईएसएफ) के आठवें संस्करण के एक प्रमुख घटक के रूप में आईएसएफएफआई-2022 का आयोजन 21-23 जनवरी तक किया गया। इस साइंस फिल्म फेस्टिवल में चार विदेशी और नौ भारतीय फिल्मों को पुरस्कृत किया गया है। 

    मध्य प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा, पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एवं न्यू मीडिया स्टडीज के संस्थापक निदेशक तथा आईएसएफएफआई-2022 के जूरी सदस्य शंभुनाथ सिंह, दक्षिण भारत में आरएसएस के संपर्क प्रमुख ए. जयकुमार, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलपति के.जी. सुरेश, सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान, कोलकाता की पूर्व निदेशक एवं विज्ञान फिल्म फेस्टिवल की जूरी सदस्य डॉ देबमित्रा मित्रा, जाने-माने फिल्मकार एवं विज्ञान फिल्म फेस्टिवल के जूरी अध्यक्ष अरुण चड्ढा, AISECT विश्वविद्यालय, भोपाल के चांसलर संतोष चौबे, मशहूर फिल्म अभिनेता एवं जूरी सदस्य राजीव वर्मा, फिल्म महोत्सव के समन्वयक निमिष कपूर एवं विज्ञान प्रसार के वरिष्ठ वैज्ञानिक टी.वी. वेंकटेश्वरन की उपस्थिति में आठवें अंतरराष्ट्रीय विज्ञान फिल्म पुरस्कारों की घोषणा की गई है। 

    अंतरराष्ट्रीय विज्ञान फिल्म पुरस्कारों की ‘सतत् विकास के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार’ श्रेणी के अंतर्गत पहला पुरस्कार इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स द्वारा निर्मित अंग्रेजी फिल्म ‘हानले: इंडियाज फर्स्ट डार्क स्काई रिजर्व’ को प्रदान किया गया है। यह फिल्म लद्दाख के हानले में हाल ही में अधिसूचित भारत के पहले डार्क स्काई रिजर्व के पीछे के विचार को प्रस्तुत करती है। प्रकाश प्रदूषण एक गंभीर वैश्विक मुद्दा है। यह फिल्म दिखाती है कि कैसे वैज्ञानिक अनुसंधान, खगोलविदों, प्रशासन और स्थानीय समुदायों के सहयोग से अंधेरे आसमान को संरक्षित करने में प्रभावी हो सकता है। इस श्रेणी में दूसरा पुरस्कार सत्यजित रे फिल्म ऐंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट, कोलकाता द्वारा बांग्ला एवं अंग्रेजी भाषा में निर्मित ‘बोर्शी – द फिश’ को मिला है। यह फिल्म आधुनिक कोलकाता में वेटलैंड मत्स्यपालन की संभावनाओं तथा अपशिष्ट जल प्रबंधन, कैप्टिव मछली उत्पादन, और मछुआरों की स्थिति को रेखांकित करती है। इसी श्रेणी में तीसरा पुरस्कार अर्जुन रॉय, हर्षवर्धन ओझा एवं अनिमेष पांडेय द्वारा निर्देशित एवं अपरेश मिश्रा द्वारा निर्मित ‘मलबा-मलबा’ फिल्म को मिला है। यह फिल्म मलबे के ढेर से पैदा होने वाले आसन्न खतरों को उजागर करती है। 

    ‘जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार’ नामक दूसरी श्रेणी के अंतर्गत पहला पुरस्कार विपुल कीर्ति शर्मा द्वारा निर्देशित एवं अशोक शर्मा द्वारा निर्मित फिल्म ‘स्ट्रगल फॉर सर्वाइवल’ को मिला है। यह फिल्म जमीन पर घोसला बनाने वाली गौरेया के आकार की बगेरी (Ashy-crowned sparrow-lark) नामक चिड़िया और टिटहरी (Lapwing) जैसे पक्षियों पर केंद्रित है। इस श्रेणी में दूसरा पुरस्कार यूके के निर्देशक लिओन मिशेल एवं निर्माता सिनालाइट की फिल्म ‘सीक्रेट्स ऑफ द फॉरेस्ट’ को मिला है। जबकि, इस श्रेणी में तीसरा पुरस्कार फिलीपीन्स की फिल्म ‘आई वाज जस्ट ए चाइल्ड’ को प्रदान किया गया है। इस फिल्म के निर्माता एवं निर्देशक ब्रीच एशेर मर्फिल हारानी हैं। छाया कठपुतली का उपयोग करते हुए यह फिल्म फिलीपींस में आए घातक सुपर टाइफून के कारण मानसिक और शारीरिक पीड़ा के अनुभव को बताती है।

    'बेहतर जीवन के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार' नामक तीसरी श्रेणी के अंतर्गत पहला पुरस्कार अमेरिकी फिल्मकार टिफेनी डीटर की फिल्म ‘बायोफिजिकल फील्ड मेथड्स: गोबाबेब’ को प्रदान किया गया है। इस श्रेणी में दूसरा पुरस्कार भारत के फिल्मकार दीपक कुमार की फिल्म ‘एक्स्प्लोरिंग द ग्रेट इंडियन लिगेसीस’ और तीसरा पुरस्कार विज्ञान प्रसार (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग) द्वारा निर्मित एवं राकेश अंदानिया द्वारा निर्देशित फिल्म ‘सेविंग द हिमालयन याक’ को मिला है।

    बीजू पंकज द्वारा निर्देशित एवं मातृभूमि टेलीविजन द्वारा निर्मित ‘वंडर्स ऑफ हेमलकासा’ फिल्म के लिए एक स्पेशल जूरी पुरस्कार प्रदान किया गया है। इसके अलावा, तीन स्पेशल जूरी मेंशन पुरस्कार ‘रिक्लेमिंग वेस्टलैंड इन भोपाल’, ‘क्राइसिस’ और ‘आचार्य पीसी रे:  द नेशनलिस्ट साइंटिस्ट’ को प्रदान किया गया है। ‘आचार्य पीसी रे:  द नेशनलिस्ट साइंटिस्ट’ के निर्देशक नंदन कुधयादि और निर्माता विज्ञान भारती है। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की फिल्म ‘क्राइसिस’ के निर्माता शिवा मोमताहन और निर्माता सीमा मोमताहन हैं। जबकि, ‘रिक्लेमिंग वेस्टलैंड इन भोपाल’ फिल्म के निर्देशक मिधुन विजयन और निर्माता जोएल मिशेल हैं।

    आईएसएफएफआई के समन्वयक और विज्ञान प्रसार के वरिष्ठ वैज्ञानिक निमिष कपूर ने बताया है कि “विज्ञान फिल्मोत्सव के अंतर्गत विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शोध तथा विकास से जुड़े विविध विषयों पर चार श्रेणियों में फिल्म प्रविष्टियां आमंत्रित की गई थीं। फिल्म महोत्सव में प्राप्त कुल 437 प्रविष्टियों में से 61भारतीय और 33 विदेशी फिल्मों को समारोह के लिए नामांकित किया गया। 21 से 23 जनवरी तक चले तीन दिवसीय फिल्म फेस्टिवल के दौरान भोपाल के पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद संस्थान के रजत जयंती सभागार में भारत, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, रूस, कनाडा, इज़राइल, फिलीपींस, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया सहित अन्य देशों की 90 से अधिक विज्ञान फिल्मों की स्क्रीनिंग की गई है।”

    विज्ञान फिल्म महोत्सव के दौरान ‘जी20 के संदर्भ में भारत की प्राथमिकता एवं विज्ञान फिल्मों की भूमिका’ और ‘सतत् विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में विज्ञान फिल्मों की भूमिका’ जैसे विषयों पर केंद्रित विशेषज्ञ चर्चाएं भी आयोजित की गईं। 

    (इंडिया साइंस वायर)

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