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    सम्भल। गैर मुस्लिम बच्चों को मदरसों से निकाल कर दूसरे स्कूलों में पढ़ाने के बाल आयोग के फैसले को धर्मगुरु मौलाना मौहम्मद मियां ने गलत बताया है।

    उवैस दानिश\सम्भल। मदरसा सिराजुल उलूम के प्रिंसिपल तथा धर्म गुरु मौलाना मौहम्मद मियां ने कहा है कि मदरसे ईश्वर का वरदान हैं। शिक्षा पर कोई पाबंदी नहीं होनी चाहिए। सभी धर्मों का ज्ञान आवश्यक है, जो लोग गैर मुस्लिम बच्चों को मदरसे से निकालने की बात कह रहे हैं उन्हें भरोसा होना चाहिए कि मदरसे में पढ़ने वाला दूसरा धर्म ग्रहण नहीं कर लेगा। उन्होंने गैर मुस्लिम बच्चों को मदरसे से निकालकर दूसरे स्कूलों में पढ़ाने के बाल आयोग के फैसले को ग़लत बताया है।

    मौलाना मोहम्मद मियां ने कहा कि शिक्षा के ऊपर किसी धर्म का अधिकार नहीं है मदरसे अगर शिक्षा दे रहे हैं तो मदरसों के दरवाजे शिक्षा के लिए तमाम धर्मों के लिए खुले रहने चाहिए और मदरसों को किसी खास धर्म की शिक्षा का केंद्र मानकर यह समझकर कि वहां पर उस से इनके धर्म को कोई नुकसान हो जाएगा मैं समझता हूं यह छोटी सोच है। हर धर्म को अपनी शिक्षा सबको देनी चाहिए और जनता को यह अधिकार होना चाहिए वह हर धर्म के बारे में पूरी जानकारी रखें। ऐसे लोगों को जो यह मुतालबा कर रहे हैं मदरसों से अन्य धर्म के लोगों को बाहर निकाल दिया जाए उन्हें अपनी सोच में तब्दीली लाने की जरूरत है अपनी जनता के ऊपर उन्हें भरोसा करना चाहिए और अपने धर्म के बारे में भी यह सोचना नहीं चाहिए कि उनका धर्म ऐसा नहीं है कि कोई अगर उनके अतिरिक्त कोई चीज पढ़ेगा तो वह धर्म छोड़ बैठेगा। मुझे सब धर्मों की जानकारी है मैं हिंदू, ईसाई, यहूदी धर्म के बारे में जानता हूं और धर्मों के बारे में भी कोशिश कर रहा हूं कि मुझे पता होना चाहिए कि कौन सा धर्म क्या शिक्षा देता है धर्म तो मानवता के लिए ईश्वर का वरदान है। लिहाजा इसके बारे में अगर कोई जानकारी लेना चाहता है तो उसके ऊपर रोक लगाना उचित नहीं है अगर कोई संवैधानिक पाबंदी है तो वह अलग बात है लेकिन ऐसी संवैधानिक पाबंदी होनी नहीं चाहिए बल्कि हर किसी को हर धर्म के बारे में पूरी जानकारी लेने का अधिकार होना चाहिए।

    मौलाना मौहम्मद मियां धर्मगुरु एवं प्रिंसपल मदरसा सिराजुल उलूम

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