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    निवेशकों के लिए ' रेडकार्पेट ' बिछाता मप्र।

    राकेश अचल का लेख। औद्योगिक विकास की दृष्टि से देश में 7 वें नंबर पर खड़े मप्र में प्रवासी भारतीयों से पूंजी निवेश आकर्षित करने के लिए मप्र की डबल इंजन की भाजपा सरकार रेडकार्पेट बिछाने में लगी है,ताकि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अपनी जमीन को थोड़ा -बहुत मजबूत किया जा सके।

    मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित होने वाले 17वें प्रवासी भारतीय सम्मलेन में सबसे ज़्यादा खाड़ी देशों से भागेदारी हो रही है। सिर्फ़ यूएई से ही 715 प्रवासी भारतीयों ने सम्मलेन में शामिल होने के लिए विदेश मंत्रालय के समक्ष अपना पंजीकरण कराया है।क़तर से 275  ओमान से 233, कुवैत से 95 और बहरीन से 72 प्रतिनिधियों ने सम्मलेन में भागेदारी की स्वीकृति दी है. अमेरिका से भी 167 प्रतिनिधि शामिल होने आ रहे हैं. युएई के बाद मॉरिशस ऐसा देश है जहां से 447 प्रतिनिधि सम्मलेन में शामिल हो रहे हैं। 

    मप्र में कांग्रेस की निर्वाचित सरकार गिराकर दोबारा सरकार बनाने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का यह पहला बड़ा आयोजन है।इस आयोजन पर पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है,ताकि कुछ न कुछ हासिल किया जा सके। चौहान सरकार को जनता की आंखों में धूल झोंककर ऐसे निवेशक सम्मेलन आयोजित करने का बेहतर तजुर्बा है। अपने पंद्रह साल के पुराने कार्यकाल में चौहान सरकार ने आधा दर्जन निवेशक सम्मेलन किए थे।

    मप्र में अब तक जितने भी निवेशक सम्मेलन हुए उनमें से कुछ में मै भी बाहैसियत पत्रकार शामिल हुआ।इन सम्मेलनों में हुए एम ओ यू में से आधे भी मूर्त रूप नहीं ले सके।

    इस बार गले -गले तक कर्ज में डूबी मप्र सरकार कुल 66 देशों से 2705 प्रतिनिधि बुलाकर पूंजी निवेश हासिल करना चाहता है।. इस समारोह में विदेश मंत्रालय की साझेदारी है जबकि निवेशकों का सम्मलेन पूरी तरह से राज्य सरकार आयोजित कर रही है.

    मध्य प्रदेश में 2003 में भाजपा सरकार बनने के बाद हुई पांच इन्‍वेस्टर्स समिट के जरिए सरकार ने, एक लाख सात हजार करोड़ का निवेश हासिल कर दो लाख 40 हजार युवाओं को  रोजगार देने का दावा किया है। हालांकि इन आंकड़ों का किसी जिम्मेदार एजेंसी ने सत्यापन नहीं किया है।

    आंकड़े गढ़ने में सिद्ध हस्त मप्र के नौकरशाही का दावा है कि प्रदेश में फिलहाल 320 बड़ी औद्योगिक इकाइयां चल रही हैं। वहीं छोटे और मध्यम उद्योगों की संख्या 26 लाख तक पहुंच गई है।सरकार को उम्मीद है कि इंदौर में 11/12 जनवरी को होने वाली ग्लोबल इन्‍वेस्टर्स समिट मध्य प्रदेश में निवेश का नया इतिहास लिखेगी।

    इंदौर के निवेशक सम्मेलन में पहली बार  निवेशकों को लैंड बैंक की डिजिटल प्रस्तुति भी दी जाएगी। उन्हें जहां की भूमि पसंद आएगी, सरकार वहां की भूमि आवंटित करेगी। अतीत में ऐसे ही सम्मेलनों के जरिए बाबा रामदेव से लेकर तमाम चंगू मंगू उद्योगपति बनकर प्रदेश की कीमती जमीनें हथिया चुके हैं। बहुत कम निवेशकों ने अपनी इकाइयों को अंतिम रूप दिया है।

    मुझे जहां तक याद है कि मप्र में पहली समिट-अक्टूबर 2007 में हुई थी। इसमें  17,311.19 करोड़ का निवेश हासिल करने के लिए 120 एम ओ यू किए गए। दावा किया गया था कि 49 हजार 750 को रोजगार मिलेगा, लेकिन बात आंकड़ों से आगे नहीं बढ़ी।

    प्रदेश में दूसरी समिट अक्टूबर 2010 में हुई इसमें 109 एमओयू हुए, 26,879.23 करोड़ का निवेश आने का दावा किया गया, कहा गया कि  25 हजार को रोजगार मिलेगा, मिला या नहीं ये सिर्फ सरकार जानती है। यही हाल तीसरी समिट का हुआ। अक्टूबर 2012 में हुई इस समिट में एम ओ यू की झड़ी लग गई। कुल 425 एमओयू हुए । उम्मीद थी कि इससे 26,054.85 करोड़ का निवेश आएगा और 31 हजार 530 को रोजगार मिलेगा, लेकिन हकीकत और अफसाना अलग अलग हैं।

    निवेशकों की चौथी समिट अक्टूबर 2014 में हुई थी। इसमें भी सरकारी मेहमान बनकर आए उद्योगपति दबाव से  3,160 एमओयू तो कर गए लेकिन इनके जरिए, 49,272.5 करोड़ का निवेश नहीं आया और न ही  38 हजार 750 को रोजगार मिला । यही हश्र पांचवीं समिट - का भी हुआ।अक्टूबर 2016 में हुई समिट में नौकरशाही ने 2,635 एमओयू कराने का कीर्तिमान बनाकर दोनों हाथों से वाहवाही लूटी।दावा किया कि , 32,597.66 करोड़ का निवेश आएगा और 92 हजार 700 को रोजगार मिलेगा। लेकिन नतीजा ठनठन गोपाल ही रहा।

    मध्य प्रदेश पहले से टाइगर स्टेट है, लेपर्ड स्टेट है और अब हम चीता स्टेट भी हो गए हैं। अब मध्य प्रदेश  इंवेस्ट फ्रेंडली प्रदेश भी बन गया है।प्रदेश में रेडीमेड गारमेंट्स के क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है।आटोमोबाइल के क्षेत्र में अनेक कंपनियां यहां काम कर रही हैं।

    अनेक शहरों में आईटी पार्क जंग खा रहे  हैं।कोविड के दौरान मध्यप्रदेश के फार्मा सेक्टर ने विदेशों में दवाइयों का एक्सपोर्ट किया है।मध्य प्रदेश में आटोमोबाइल सेक्टर पहले से है, अब इथनाल पॉलिसी भी बनाई गई है।मप्र में कई तरह के खनिज हैं। कोयला, मैंग्नीज़, कापर हैं, इससे जुड़े उद्योग की स्थापना लक्ष्य है।

    कहने के लिए उद्योगों की स्थापना के लिए झंझट मुक्त प्रदेश है मध्यप्रदेश। यहां सिंगल विंडो प्रणाली से एक भी काम नहीं होता। दावा है कि नया उद्योग लगाने के लिए आठ विभागों की 44 सेवाओं की अनुमति 30 दिन के भीतर उपलब्ध कराने की सुविधा देने वाला यह एकमात्र प्रदेश है।

    मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि पहले मध्य प्रदेश में उद्योग लगाने में निवेशकों की रुचि नहीं थी। इसकी वजहें कई थीं। हमने धीरे-धीरे नियमों को निवेशकों के अनुकूल बनाया, उनका विश्वास जीता, तब कहीं अब देश-दुनिया के निवेशक मप्र खुद रुचि लेकर आ रहे हैं। इस छठी इंवेस्टर्स समिट से हमें बहुत उम्मीदें हैं। भगवान इन उम्मीदों को पूरा करे।

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