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    विशेष गीत : ख्वाहिश

     ख्वाहिश

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    सब कुछ ढांक सके,ऐसा चादर दे दे

    गांव में था जैसा,वैसा ही दर दे दे

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    इष्टमित्र तो भरे पड़े हैं दुनिया में

    ईश्वर जैसा एक अदद फादर दे दे

    *

    मुंबई पर तो मेहरबानियां बरसा दीं

    दिल्ली कै भी ठीकठाक दादर दे दे

    *

    एक पसेरी नाज बहुत कम लगता है

    धक्कों के बदले थोड़ा आदर दे दे

    *

    मिट्टी की काया से काम चला लूंगा

    कम से कम दिल तो मुझको कादर दे दे

    *

    कभी नहीं मांगूंगा जन्नत वादा है

    एक जन्म धरती पर फिर सादर दे दे

    *

    @ राकेश अचल



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