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    शाहजहांपुर। छुट्टा पशुओं से तंग आ कर किसान ने गेंहू की फसल को जोता।

    फै़याज़ उद्दीन\शाहजहांपुर। योगी सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले अपने तमाम भाषणों में वायदे किए थे कि सरकार बनते ही हाइटेक गौशालाओं का निर्माण करवाकर आवारा घूम रहे पशुओं से किसानों को निजात दिलाएंगे। किसानों ने भाजपा नेताओं के भाषण को सुना और यूपी में दोबारा योगी आदित्यनाथ की सरकार बनवाई। भाजपा की सरकार तो बन गई लेकिन वायदे सिर्फ जुमला बन गये। हाडक़ंपाने वाली भीषण ठण्ड से नेता और नौकरशाह तो मखमली रजाई में दुबक गये लेकिन बेचारा किसान पूरी रात जागकर अपनी फसल की रखवाली के लिये खेतों में पहरा देता नजर आ रहा है। छुट्टा पशुओं से तंग आकर एक किसान ने अपनी 7 बीघा खेत में खड़ी गेहूं की फसल को ट्रैक्टर से जोत दिया। क्योंकि हजारों की संख्या में मौजूद आवारा पशुओं ने उसकी फसल को खाकर बर्बाद कर दिया था। अब ऐसे में बेचारे किसान का परिवार एक-एक दाने के लिए मोहताज हो गया है। 

    आपको बतादें कि तहसील जलालाबाद के गांव कटेली निवासी किसान सुधीर पाल ने छुट्टा पशुओं से तंग आकर अपने 7 बीघा खेत में खड़ी गेहूं की फसल को ट्रैक्टर से जोत दिया है। जिसके बाद अब किसान सुधीर पाल दाने दाने के लिए मोहताज हो गया है। पीड़ित किसान ने बताया कि वह भूमिहीन किसान है उसके पास अपना कोई खेत नहीं है। इसीलिए परिवार का पेट पालने के लिए वह गांव के ही दूसरे व्यक्ति से जमीन को पटका पर ले लेता है और फिर उसमें फसल उगाकर बच्चों का पेट पालता है। इस बार भी उसने ऐसा ही किया था लेकिन क्षेत्र में हजारों की संख्या में छुट्टा पशुओं ने उसकी गेहूं की फसल को खा लिया। जिसके बाद किसान के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था इसलिए उसने गुस्से में आकर अपनी 7 बीघा गेहूं की फसल पर ट्रैक्टर चलवा दिया है। सिर्फ इतना ही नहीं किसान ने अपनी फसल को अपने ही हाथों से नष्ट करने से पहले क्षेत्र के दर्जनों किसानों के साथ मिलकर जलालाबाद की एसडीएम को ज्ञापन भी दिया था। जिसमें किसानों ने मांग की थी कि उनके गांव और आसपास क्षेत्र में हजारों की संख्या में आवारा पशु हैं जो उनकी फसलों को पूरी तरह से खा जाते हैं। इसलिए किसानों की मांग थी कि उन्हें छुट्टा पशुओं से निजात दिलाई जाए। लेकिन जिला प्रशासन ने किसानों की समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दिया। थकहार कर आज किसान को मजबूरन यह फैसला लेना पड़ा कि उसने अपने ही हाथों से अपनी सालभर की कमाई को नष्ट कर दिया। जिसके बाद अब किसान के परिवार के सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

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