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    कानपुर। समाज कल्याण सेवा समिति द्वारा आयोजित लावारिस शवों को ससम्मान पांच दिवसीय कंधा दान अभियान के अन्तिम दिन।

    इब्ने हसन ज़ैदी\कानपुर। बौद्ध धर्म समुदाय की महिलाओं द्वारा लावारिस शवों को कंधा दिया गया अन्तिम संस्कार स्थल भैरव घाट पहुंचकर जहां पर महिलाओं ने भी कंधा दिया। फूल मालाओं से सजी अर्थियां जब पोस्टमार्टम हाउस से निकली व महिलाओं के कंधों पर अर्थियों को लोगों ने देखा तो अचंभित रह गये कि ऐसा कौन सा धर्म है जिसमें महिलाएं भी कंधा देने को आतुर दिखी। केवल बुद्ध का धर्म ही ऐसा धर्म है जिसमें करुणा मैत्री भाईचारा और सबको समानता का अधिकार है इसी के तहत आज बौद्ध समाज की महिलाओं द्वारा लावारिस शवों को सा सम्मान कंधा दान दिया गया।

    पूज्य भंते अंगुली माल  द्वारा पंचशील त्रिशरण एवं बुद्ध वंदना का पाठ कराया गया इसके उपरांत शव यात्रा प्रारंभ हुई।कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सर्वश्री भिक्खु अंगुलिमाल ,प्रेमी बौद्ध, रमेश बौद्धाचार्य, सीमा संखवार, मनीषा पैंथर, मुन्नी देवी, कंचन वर्मा, अनीता, रुकमणी, रेखा, मालती, मीना वर्मा, सीमा जीत, उर्मिला राजपूत, सरोज गौतम,  किरण,  ज्योति राजपूत , शिवदेवी , शकुंतला देवी, रीना,संगीता कटियार , सोनी,  राधा , सुमन राजपूत,  शालिनी गौतम,  पिंकी चंद्रा, स्नेह शुक्ला,  शैलेंद्र कुमार , अजय वर्मा , डॉक्टर सुभाष चंद्र, विजय सागर एडवोकेट, मनोज गुप्ता, अरुण कुशवाहा ,प्रभु दयाल आदिम, कुमार सुंदरम, राज बहादुर,  राम लखन , श्याम नारायण,  डॉ अजय कुमार, यशवंतराव, राहुल गौतम सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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