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    आगरा। सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा के प्रतिनिधि मण्डल ने एयरपोर्ट डाइरेक्टर से की मुलाक़ात।

    ......सिविल एंकलावे बनाने के लिए टेंडर प्रक्रिया, प्रथम वरीयता - ए ए अंसारी -एयरपोर्ट डाइरेक्टर।

    आगरा। आगरा की 'एयर कनेक्टिविटी' तो दशकों पुरानी है,लेकिन हवाई जहाज तक आम नागरिक की पहुंच में बढ़ती जा रही दिक्कतों से अब जल्द ही छुटकारा मिल सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने 17 जनवरी 2023 को एक लंबित वाद में सिविल एन्क्लेव को सहज जन पहुंच के स्थान स्थानांतरित करने का आदेश पारित कर दिया है। इस आदेश के तहत सिविल एन्‍कलेव को वायुसेना स्टेशन परिसर से 10 कि मी से बाहर ले जाया सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण विदों के द्वारा फ्लाइटों की संख्या बढाये जाने पर रोक लगाये जाने के सुझाव को भी अमान्य कर दिया। 

    सिविल एयरपोर्ट को वायुसेना परिसर से बाहर ले जाये जाने की मांग को करते रहने वाले एक्टिविस्ट ग्रुप सिविल सोसायटी ऑफ आगरा ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को आगरा की जरूरत को पूरा करने वाला बताया है।सोसायटी के  सेक्रेटरी अनिल शर्मा,अध्यक्ष डॉ शिरोमणि सिह ,असलम सलीमी तथा जर्नलिस्ट राजीव सक्सेना ने एयरपोर्ट डायरेक्टर ए ए अंसारी से मुलाकात कर उनके आधारभूत प्रयासों और अनवरत इस मामले से संबंधित छोटे छोटे मुद्दे को  गंभीरता से लिये जाने पर बधाई दी।

    एयरपोर्ट डायरेक्टर ने बताया -"के यह उनके आगरा के कार्यकाल में सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब शीघ्र सिविल एंकलावे को बनाने के लिए टेंडर प्रोसेस शुरू कर के कंस्ट्रक्शन का कार्य शुरू करना प्राथमिकता है।" उन्होंने सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा के सहयोग के लिए प्राशनशा की और आगे सहयोग की अपेक्षा की जरूरत बताया। सूप्रीम कोर्ट की पर्मिशन से और भी एयरलाइन्स आगरा से उड़ान भरेंगी, आशा है फरवरी मे दूसरी एयरलाइन्स का संचालन शुरू हो सकता है। एयरपोर्ट पर पुष्पांजलि हॉस्पिटल की निशुल्क मेडिकल फैसिलिटी सेंटर का शुभ आरम्भ हो चुका है।     

    सिविल सोसायटी ऑफ आगरा  का मानना है कि कुछ निहित स्वार्थी तत्व इस मामले को अनावश्यक रूप से उलझाये रखना चाहते थे। बादलों से हजारों फीट ऊपर उडने वाले हवाई जहाज से ताजमहल की इमारत के संरक्षण के विरुद्ध प्रचारित कर रहे थे। सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा को उम्मीद है अब अर्जुन नगर गेट पर बनने वाले यात्री लॉउंज को इस परमिशन के अनुरूप बनाया जाएगा। स्थानांतरित सिविल एंकलावे ऐरक्राफ्ट के नाइट हाल्ट करने का अवसर प्रदान करेगा। आगरा में पार्किंग चार्ज कम होने पर एयरलाइन्स इस सुविधा का लाभ लेंगी। ऐसा होने पर होटल , गेस्ट हाउस की जरूरत रुकने वाले एयरलाइंस के कर्मचारियों को पड़ेगी। 

    • जी-20 ब्रांडिंग प्रक्रिया की तैयारी सुचारू रूप से क्रियान्वित

    डेलीगेट्स 10 फरवरी को आएंगे और 13 को लौटेंगे। करीब 37 देशों (यूरोपियन यूनियन को मिला कर) के जी-20 में से 20 से '25  देशों के प्रतिनिधियों के आने की उम्मीद। एयरफोर्स स्टेशन आगरा मूल रूप से सिविल एयरपोर्ट ही है,इसकी शुरुआत टाटा एयरलाइंस के डॉक विमान (डैकोट) के हैंगर के रूप में की गयी थी ,आगरा फतेहपुर सीकरी रोड पर पृथ्‍रीनाथ मंदिर के फाटक से आधा किमी दूरी पर वायु सेना के खेरिया एयरपोर्ट परिसर के मुख्य गेट को अब भी उसके पुराने मूल नाम  'टाटा गेट के नाम से ही जाना जाता है।उपनिवेशिक भारत की  रॉयल इंडियन एयरफोर्स वायु ( Royal Indian Air Force) को हस्तांतरित कर दिया गया। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान यहां सी बी आई (इंडिया चाइना  बर्मा - सी बी आई) की लॉजिस्टिक एयर डिपो रही। 

    देश आजाद हो जाने के बाद 1947 में आगरा एयरपोर्ट वायुसेना के पास ही रहा। टाटा एयरलाइंस ने पूरा एयरपोर्ट अपने पास रखने के स्थान पर वायुसेना के पास ही रहने दिया तथा सीमित फ्लाइट संख्या वाले अपने सिविल एयरक्राफ्ट ऑपरेशन को वायुसेना से सामंजस्य बैठा कर शुरू कर दिया। हालांकि आगरा एयरपोर्ट 1972 से ही एयरपोर्ट अथॉरिटी के प्रबंधन में है,लेकिन इसके व्यवस्थित विकास का क्रम नेशनल एयरपोर्ट अथॉरिटी और इंटरनेशनल एयरपोर्ट अथॉरिटी के 1995 में आपस में मिल जाने के बाद से ही शुरू हुआ।

    इंटरनेशनल फ्लाइटों का आना इस एयरपोर्ट पर हमेशा रहा है। 1990 के दशक में यहां इमीग्रेशन चैकअप सहित इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिये आधारभूत जरूरतें संभव रहीं। मौजूदा सिविल एयरपोर्ट टर्मिनल बिल्डिंग की शुरुआत पूर्व उप प्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी ने ही की थी। भारत सरकार की ओपेन स्काई पॉलिसी के प्रभावी हो जाने के बाद तमाम प्राइवेट एयरलाइंस  के ऑपरेशन शुरू हो जाने के बाद यह प्रदेश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डा माना जाने लगा। 

    लेकिन ताज ट्रिपेजियम जोन अथॉरिटी के बन जाने के बाद से इसके विकास की गति थम गयी। बसपा शासन में इसे वायुसेना परिसर से बाहर करने के लिये धनौली -अभयपुरा -बल्‍हेरा में जमीन अधिग्रहित करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया, लेकिन भू अधिग्रहण की प्रक्रिया भाजपा की पहली  योगी सरकार के कार्यकाल में ही पूरी हो सकी। जमीन,जमीन पर बाउंड्री करवाने तक की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है  । अब केवल जमीन हस्तांतरण करने का कार्य अवशेष रह गया है।


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