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    बाराबंकी। इस मौसम में अवसाद बढ़ने से बढ़ती है ख़ुदकुशी की वरदाते :- मनो चिकित्सक

    • आत्महत्या करने वालो की गतिविधियों को समझे परिजन - डॉ. आरती
    • साक्षात्कार में मनो चिकित्सक ने बताया बताये मानसिक बीमारियों से बचाव के बताएं नुस्खे

    बाराबंकी। मनुष्य के रूप में मिला जीवन ईश्वर की खूबसूरत देन है। इस बहुमूल्य जीवन को लोग मानसिक दबाव में समाप्त करके अपनी जान से तो हाथ धो ही बैठते है, पीछे अपने परिजनों के लिए भी संकट और दुखो का पर्याय बनते है। यह स्थिति मानसिक तनाव से होती है। मनोचिकित्सक के अनुसार वर्तमान में चल रहे सर्दियों के मौसम में इस बीमारी को यूनोपोलर डिप्रेशन जो दीपावली के बाद शुरू होता है। और दूसरा गर्मी के मौसम में आत्महत्या की स्थिति उत्पन्न करने वाला 'मेनियर' रोग है। इस गंभीर विषय पर जिला अस्पताल के मनो कक्ष में तैनात मनो चिकित्सक डॉ. आरती यादव ने विस्तार से जानकारी दी।

    बीते वर्षो में आत्महत्या से हुई मौतो के आंकड़े पूरे विश्व में तेजी हो रही बढ़त हमारे समाज के लिए चिन्ता का विषय है। दौड़-भाग से भरी जिंदगी के बीच लोग किसी अपने के द्वारा आत्महत्या किये जाने को समझे बिना कुछ दिन शोक मनाकर, उसे बुरे सपने की तरह भुला बैठते है। जो कही ना कही मानवीय रिश्तो में आ रही गिरावट की ओर ईशारा करता है। वही मनो चिकित्सकों का कहना है कि गर्मी और सर्दी के मौसम में आत्महत्या की दरो में तेजी से बढ़ोत्तरी होती है। सर्दी के मौसम में अवसाद ग्रस्त मरीज के परिजनों को सावधान रहना चाहिए। साक्षात्कार के दौरान डॉ. आरती यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि सर्दी में होने वाले यूनोपोलर डिप्रेशन के लक्षण पहले से दिखने लगते है। इन लक्षणो को आसानी से समझा जा सकता है। जैसे, नींद का पूरा ना होना या ना आना, काम में मन ना लगना, बाते कम करना, अकेले अलग बैठना, बिना वजह रोने जैसे तमाम संकेत मिलने लगते है। बहुत कम ऐसे लोग होते है जिनके लक्षण नहीं दिखते। बताया कि ख़ुदकुशी करने से पहले व्यक्ति छोटे -छोटे संकेत देना शुरू कर देता है। युवा लोग अपनी प्रिय चीजे दूसरों को देना शुरू कर देते है, बुजुर्ग अपनी वसीयत लिखने लगते है, मरने की बाते करना, गूगल पर आत्महत्या के तरीके खोजने लगते है, और ऐसी चीजे एकत्रित करना शुरू कर देते है जिससे आत्महत्या की जा सकती है। उन्होंने इसके आकड़ो की जानकारी देते हुए बताया कि कोविड के आने के बाद इस संख्या में इजाफा हुआ है। डॉ. आरती ने बताया कि सर्दी में होने वाला अवसाद और गर्मी के मौसम में होने वाली मानसिक बीमारी मेनिया 1-2 प्रतिशत लोगो में होती है। ज्यादातर मामलो में सुसाइड का एक निश्चित समय होता है, जिसे टाले जाने से मरीज की जिंदगी बचाई जा सकती है। बाहर रह रहे लोगो से घर के लोग यें सोच कर बात नहीं करते की बिज़ी होगा यह सोचकर आमतौर पर टालना नहीं चाहिए बल्कि समय-समय पर बात करते रहना चाहिए। पढ़ने और नौकरी तलाश रहे ऐसे लोगो को परिवार और मित्रो का सपोर्ट बहुत जरुरी है। ऐसे मरीज जो दवाइयां छोड़ देते है उन्हें चिकित्सक की सलाह के बिना दवा लेना नहीं छोड़ना चाहिए।

    • एक अंजानी आशंका और विटामिन डी

    जर्नलाइज एन्जाइटी डिसऑर्डर इस बीमारी का मरीज एक अंजानी आशंका से ग्रस्त रहता है। जो एक बीमारी का हिस्सा है मनो चिकित्सक डॉ. आरती कहती है कि इसका मात्र 5-6 महीने ईलाज कराकर इस बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है। वही शारीर में विटामिन -डी का भी महतत्त्व है। विटामिन डी की कमी से मानसिक तनाव बढ़ता है यें सीधा फैक्टर है इसकी कमी वालों का मूड लो होता है।

    • ओसीडी भी खतरनाक- मनोचिकित्सक

    ऑप्सेसिव कंप्रेसिव डिसऑर्डर जिसे शार्ट में ओसीडी नाम की बीमारी कहाँ जाता है। इस बीमारी से ग्रसित लोगो को अत्यधिक साफ-सफाई की बुरी आदत होना, बार-बार ताला चेक करना, घर से बाहर निकलने से परहेज करने के साथ एक ही काम को बार-बार करना इस बीमारी के प्रमुख लक्षण है।

    • मनोरोग से बचाव के उपाय

    इंसान को अपनी दिनचर्या को नियमित रखना चाहिए। योगा, नींद पूरी करना, सूर्य की धूप लेकर विटामिन-डी की पूर्ति, पौष्टिक आहार, हरी सब्जी, मौसम के फलो का सेवन, खेल-कूद और सोशल गतिविधियों में शामिल रहकर मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के बेहतर उपाय है।

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