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    पीलीभीत विशेष: पधारो म्हारे पीलीभीत, नए वर्ष के लिए बहुत कुछ है ख़ास।

    कुँवर निर्भय सिंह

    पीलीभीत विशेष: नव वर्ष के आगाज की दस्तक होने लगी है  लोग नए वर्ष में लुफ्त उठाने के लिए  लाखों रुपए खर्च करके अपने शहर से दूर किसी खास स्थान पर घूमने फिरने का मन बनाने लगे हैं।

    वर्ष का अंतिम सप्ताह चल रहा है।  नया वर्ष का आनंद उठाने के लिए लोग पहले से ही घूमने फिरने का स्थान निश्चित कर लेते हैं और दूरदराज के मशहूर पिकनिक स्पॉट ,ऐतिहासिक स्थल या धार्मिक स्थलों पर चले जाते हैं।  आप के लिए भारत -नेपाल सीमावर्ती जनपद पीलीभीत में बहुत कुछ खास है  यहां बहुत से ऐसे खूबसूरत धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल है जहां पर घूमकर आप परिवार  के साथ नए वर्ष को खास बना सकते हैं हिमालय पर्वत की तलहटी में बसे खूबसूरत तराई का यह जनपद चारों और वनों से आच्छादित है और इन वनों में अकूत वन संपदा एवं वन्य जीव जंतु विचरण करते हैं जनपद के कई मार्ग जंगल के बीचों-बीच से गुजरते हैं जो अपने आप में ही मनमोहक लगते हैं। 

    पीलीभीत टाइगर रिजर्व बन जाने के बाद पीलीभीत में स्थानीय स्तर के पर्यटकों के अलावा देश विदेश के पर्यटकों ने भी अपनी आमद दर्ज कराई आज स्थिति यह हो गई की पीलीभीत टाइगर रिजर्व के मशहूर चूका स्पॉट और वन क्षेत्र के सभी गेस्ट हाउस पूर्ण रुप से एडवांस बुक हो चुके हैं।

    पीलीभीत टाइगर रिजर्व में पहुंचने पर आपका यदि भाग्य साथ देता है तो हो सकता है कि आप को बाघ के दर्शन हो जाएं और यह वर्ष आपके लिए यादगार वर्ष साबित हो जाए जंगल सफारी करते समय आपको घास के मैदानों में या सड़क  पर हिरणों के झुंड कुलांचे मारकर आपके करीब से गुजर जाएगा तो सड़क पर आराम करता हुआ आपको अजगर के भी दर्शन हो सकते हैं शारदा सागर के जलाशय में सुबह की धूप का आनंद लेता हुआ मगरमच्छ भी दिख सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है   शारदा सागर के डैम के  साइबेरियन पक्षियों के झुंड कलरव करते हुए दिखाई दे जाएंगे जो आपकी मन की शांति को और सुकून देंगे चारों ओर आपको बस प्रकृति की खूबसूरती ही नजर आएगी इस खूबसूरत पीलीभीत टाइगर रिजर्व में  जंगल सफारी   करते समय शारदा मुख्य कैनाल की धारा भी आपका मन मोह  लेगी मोर ,मुर्गे और बंदर कदम कदम पर आपका स्वागत करते हुए नजर आएंगे मन को शांति प्रदान  करने के लिये  गौधूलि की वेला में लखनऊ की शान बढ़ाने वाली मां आदि गंगा गोमती नदी का उद्गम स्थल  माधोटांडा की फुल्हर झील के नजारे भी आपको अपनी ओर आकर्षित करने में कम साबित नहीं होंगे । जहां वनारस की तर्ज पर होने वाली सायंकाल की आरती आपके मन को मोह लेंगी।

    सप्त सरोवर

    • यह है पीलीभीत के खूबसूरत मनोरम पिकनिक और धार्मिक स्पॉट मां आदि गंगा गोमती नदी उद्गम स्थल\तीर्थ स्थल। 

    ऋषि वशिष्ठ की पुत्री,

    लखनऊ की लाइफ लाइन कहीं जाने वाली मां आदि गंगा गोमती नदी का उद्गम स्थल जनपद पीलीभीत के माधोटाडा की फुल्हर झील है इस नदी का  ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व है इस उद्गम स्थल के तट पर कई प्राचीन मंदिर एवं माधोटांडा के राज घराने की हुई  सतियो के भी मंदिर है मां आदि गंगा गोमती  के तट पर  बाबा दुर्गा नाथ  की समाधि मंदिर,एवं   माता गोमती का भव्यमंदिर बना हुआ उद्गम तीर्थ स्थल पर प्रति शाम को बनारस की तर्ज पर आरती का आयोजन होता है जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु सम्लित होते हैं।

    गोमती उद्गम तीर्थ स्थल माधोटांडा

    ट्रैवल कैफे , बेहतरीन हट्स, गोमती फन जोन जिसमें नन्हे मुन्ने बच्चे से लेकर बड़े बूढ़े भी ट्रेन की सफारी का आनंद उठा सकते हैं, मां गोमती भोजनालय के डायनिंग हाल में चोखा बाटी एवं अन्य व्यंजनों का आनंद उठा सकते हैं गोमती लेकव्यू   14 फुट ऊंची तीन पेड़ों पर बनी  ट्री हट पर बैठकर चाय की चुस्की के साथ गोमती नदी अद्भुत नजारे का दीदार और  नजारे को अपने कैमरे में कैद कर सकते हैं। बाल जंतु विहार के भी नजारे उठा सकते हैं,झील के चारों ओर लाइटिंग से सजा हुआ  पथवे है। पीलीभीत मुख्यालय से यह स्थान लगभग 38 किलोमीटर दूर है।


    • पीटीआर का मिनी गोवा यानी चूका स्पॉट

    वन संपदा से परिपूर्ण पीलीभीत टाइगर रिजर्व की महोफ वन क्षेत्र मे बना चूका स्पॉट लोगों की पहली पसंद होता जा रहा है हरे भरे जंगलों के बीच एक ओर 22 किलोमीटर  लम्बा एवं पांच किलोमीटर चौड़ा शारदा सागर जलाशय का नीला स्वच्छ जल उसमे कल- कल करते हुए लाखों साइबेरियन पंक्षी लोगों का मन मोह लेते  हैं चूका स्पॉट पर वॉटर हट, ट्री हट ,थारु हॉट, पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है इस स्थान पर पहुंचने के लिए पीलीभीत टाइगर रिजर्व के निर्धारित मार्गो एवं उनके द्वारा संचालित किए जाने वाले वाहनों से ही जाया जा सकता हैं।

    • अंग्रेजो के जमाने का बना नहरों का जंक्शन बाईफरकेशन

    माधौटांडा स्टेट  के नजदीक बराही वन क्षेत्र में सन 1926 में अंग्रेजों ने अपनी हुकूमत के दौरान खूबसूरत जंगल के बीचो-बीच यहां के किसानों को उनकी फसलों की सिंचाई के लिए समुचित जल उपलब्ध कराने के लिए नहरों  का जाल फैलाया और एक वीवीआई पी निरीक्षण भवन का निर्माण  कराया  था ।ब्रिटिश काल के समय का बना हुआ यह निरक्षण भवन आज गेस्ट हाउस का रूप में लगातार  मशहूर हो रहा है। अभी हाल ही में बीते नवंबर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने यहां अपना 81वां जन्मदिन मनाया था। यहां चारों दिशाओं में नहरों में बहता हुआ पानी मन को मोह लेता है।

    साइफन

    • पीलीभीत के साल सागौन के हरे-भरे जंगल की खूबसूरत वादियां

    पीलीभीत के जंगल की खूबसूरती और यहां की प्राकृतिक  वन संपदा केवल भारत में ही नहीं देश दुनिया के तमाम देशों में प्रसिद्ध थी और आज भी यहां के प्राकृतिक वन और उनके बीच से निकलने वाली नहरे, घने सुरम्य वादियों के जंगल के बीच ब्रिटिश काल की बनी हुई कोठियां जिन्हें आज गेस्ट हाउस कहा जाता है अनायास ही लोगों को अपने मोबाइल में तस्वीर उतारने को लेकर विवश कर देते हैं। ऐसा लगता है जैसे स्वयं विधाता ने दोनों हाथों से पीलीभीत की सुंदरता को निखारा है।

    • भारत- नेपाल सीमा पर कल- कल करती हुई शारदा नदी

    पीलीभीत हिमालय पर्वत की प्रमोद दायिनी शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में बसे होने के कारण अपने अंक में प्राकृतिक सुंदरता को समाए हुए है। इसकी शिवालिक पहाड़ियों से कल कल का नाद करती हुई शारदा नदी का इठलाता बलखाता विहंगम दृश्य मन को मोह लेता है। इस नदी के तट पर खूबसूरत जंगल और बंगाली कॉलोनी सुंदरता में चार चांद लगाती हैं।

    • ब्रिटिश काल का सप्त सरोवर

    पीटीआर के  बराही जंगल में बंगाली कॉलोनी के नजदीक  लगभग सौ साल पहले बना  साथ झाल आज का सप्त सरोवर भी अपने आप में अजूबा है।   यह जगह भी बेहद खूबसूरत है। इस स्थल का निर्माण भी ब्रिटिश काल में  ही कराया गया था।

    • एशिया का सबसे बड़ा शारदा सागर भी सुंदरता में लगा रहा चार चांद

    22 किलोमीटर लंबे और 5 किलोमीटर चौड़े शारदा सागर जलाशय के अथाह जल को देख कर ऐसा लगता है जैसे मुंबई के किनारे का सागर अपनी हिलोरे यहां पर मार रहा है। जलाशय में उठती हुई लहरें लोगों के मन में रोमांच पैदा कर देतीं हैं। इसकी खूबसूरती भी बहुत मनमोहक है। यहां की शाम और सुबह का दृश्य अपने आप में बड़ा ही मनमोहक होता है। जलाशय में कलरव करते हुए साईवेरियन पक्षी और धूप सेकते हुए मगरमच्छ अपने आप ही  अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं।

    • कई प्रान्तों की संस्कृति भी मौजूद

    यहां हमें केरल,उड़ीसा , असम और पश्चिम बंगाल की संस्कृति के शारदा सागर जलाशय और शारदा नदी के बीच में बसी बंगाली बाहुल्य कालोनियों में हमें दर्शन होते हैं। यहां बने हुए खूबसूरत घर सुंदरता में चार चांद लगाते हैं। इतना ही नहीं पूर्वांचल की भोजपुरी संस्कृति के भी दर्शन होते हैं।

    • गौरी शंकर मंदिर

    लगभग 250 वर्ष पूर्व देवहा और खकरा नदी के पास स्थापित गौरी शंकर का मंदिर अत्यंत ही प्राचीन मंदिर है। जिसका निर्माण रुहेला सरदार हाफिज रहमत खां ने कराया था। जहां भगवान भोलेशंकर के दर्शन करने से आप के सभी कष्ट का निवारण होता है।

    • राजा वेणु का किला

    पौराणिक और ऐतिहासिक भव्यता को अपने आपने समाहित किए हुए धर्म शास्त्रों में वर्णित माधोटांडा क्षेत्र के शहागढ़  रेलवे स्टेशन के नजदीक राजा वेणु का किला था जिस के खंडहर के अवशेष आज भी अपने वैभव की कहानी कहते हुए नजर आ रहे हैं। माती माफी में भी राजा वेणु का महल व देवी मंदिर स्थापित है। 

    • अद्भुत शिवलिंग वाला इकोत्तरनाथ शिव मंदिर

    पूरनपुर तहसील क्षेत्र के जंगल में स्थापित एकोहत्तहरनाथ का मंदिर अपने आप में अद्भुत है। यहां पर स्थापित शिवलिंग दिन में तीन बार रंग बदलता है। यह मंदिर 

    गोमती के तट पर स्थापित है। इस मंदिर के तीन ओर जंगल और एक और नदी का तट है। मान्यता है कि देवराज इंद्र ने श्राप मुक्ति हेतु खुद इस शिवलिंग की स्थापना की थी और वे प्रतिदिन यहां पूजा करने भी आते हैं।

    यह भी है खास

    शाही जामा मस्जिद , इलाबांस, गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा छेवी पातशाही, राधा रमण मंदिर, श्री ठाकुरद्वारा मंदिर ,माता बराही देवी मंदिर एवं सेल्हा बाबा सहित अन्य धार्मिक , रमणीक एवं ऐतिहासिक स्थल है जिनका का पर्यटक आनंद उठा सकते हैं।

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