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    कानपुर। जमीयत उलेमा कानपुर द्वारा ग़रीबों,ज़रूरतमंदों में लिहाफ व कम्बल वितरित करने का सिलसिला शुरू।

     ......... उम्मत के प्रत्येक व्यक्ति पर फर्ज़ है कि अगर किसी ज़रूरतमंद को देखे तो वह उसकी मदद करें :- मौलाना अब्दुल्लाह क़ासमी

    इब्ने हसन ज़ैदी\कानपुर। अल्लाह तआला ने इन्सान को दुनिया में आपसी लगाव और मुहब्बत देकर पैदा फरमाया है, इंसान बना ही इंसानियत से है, जिस इंसान में एक दूसरे प्राणी से लगाव ना हो वह नाम का तो इंसान हो सकता है लेकिन वास्तव में वह इंसानी विशेषताओं से खाली होगा। इन विचारों को बजरिया मुहल्ला निकट गुलाब घोसी मस्जिद चमनगंज में ग़रीबों को लिहाफ वितरित करते हुए जमीयत उलेमा उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष मौलाना अमीनुल हक़ अब्दुल्लाह क़ासमी ने व्यक्त किया। मौलाना ने फरमाया कि हज़रत मुहम्मद स0अ0व0 ने केवल इंसानों को नहीं बल्कि समस्त प्राणियों को अल्लाह का परिवार बताया है। जो इनसे अच्छा सुलूक करेगा वह उतना हीं अल्लाह का प्यारा बन्दा होगा, इस्लामी शरीअत में तो यहां तक लिखा है कि अगर कोई व्यक्ति ज़्यादा बीमार है और उसका कोई पुरसाने हाल नहीं है तो उम्मत के प्रत्येक व्यक्ति पर लाज़िम है कि उसका ख्याल रखे, इसमें इसकी कै़द नहीं कि कोई ग़रीब है या अमीर बल्कि प्रत्येक अमीर व ग़रीब पर लाज़िमी है। 

    प्रदेश उपाध्यक्ष मौलाना अमीनुल हक़ अब्दुल्लाह ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति भूख की वजह से मरने वाला है और देखने वाला व्यक्ति ग़रीब है तो उस पर फर्ज़ है कि वह उस भूखे को दो रोटी खिलाकर पानी पिला दे जिससे उसकी जान बच जाये, खुदानख्वास्ता उसको मदद नहीं मिल सकी और वह भूख की वजह से मर गया तो अल्लाह के यहां यह जवाब नहीं चलेगा कि हम ग़रीब थे और इसलिये भूखे को खाना नहीं खिला पाये। मौलाना ने बताया कि अगर हम हज़रत मौलाना मुहम्मद मतीनुल हक़ उसामा साहब क़ासमी रह0 समेत बड़े-बड़े बुजुर्गों और औलिया अल्लाह के जीवन को पढ़ें तो उनके जीवन का सबसे बड़ा कारनामा लोगों की सेवा है, इसलिये समस्त प्राणियों के काम आना विशेषरूप से ज़रूरतमंदों के काम आना हमारे जीवन का उद्देश्य होना चाहिये यही इंसानियत की सबसे बड़ी पहचान, दीन और रसूल अल्लाह स0अ0व0 की तालीमात का महत्वपूर्ण भाग है। इस अवसर पर जमीअत उलमा कानपुर के अध्यक्ष डा0 हलीमुल्लाह खां, सचिव का़री अब्दुल मुईद चौधरी, मौलाना फरीदुद्दीन क़ासमी, हाफिज़ मुहम्मद शहबाज, हाफिज़ मुहम्मद मेराज, हाफिज़ अब्दुल हलीम, हाफिज़ मुहम्मद चांद, मुहम्मद अफसार, मुहम्मद चांद, मुहम्मद फैसल, नौशाद के अलावा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद। 

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