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    अयोध्या। अलाव के नाम और गीली लकड़ियों की आपूर्ति कर निगम को चूना लगा रहे ठेकेदार।

    कहाँ तो तय था चिराग हर एक घर के लिए।

    कहाँ चिराग मयस्सर नही शहर के लिए।।

    किसी शायर की ये पंक्तियां नगर निगम के सर्दी में गरीबो मजलुमो को मिलने वाली सरकारी अलाव की व्यवस्था पर बिल्कुल सटीक बैठती है। नगर निगम के निर्माण  विभाग के ठेकेदार सरकारी मिलने वाली अलाव की लकड़ियों को अपनी आमदनी का जरिया बनाकर नगर निगम को चूना लगा रहे है। 

    अयोध्या निगम प्रशासन ने भले ही टेंडर सूखी लकड़ियों का किया है लेकिन वजन अधिक दिखाकर सरकारी धन की लूट में जुटे ठेकेदार और विभागीय अधिकारी निर्धारित अलाव स्थलों पर गीली लकड़ियां आपूर्ति कर सरकारी धन की बंदरबांट करने में जुटे है। कड़कड़ाती सर्दी और गलन के बीच अलाव के लिए महज खानापूर्ति बनी गीली लकड़ियां आम जनता के लिए परेशानी का सबब बन गयी है। 

    बता दे कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार अयोध्या शहर में 130 जगह और अयोध्या धाम में 90 जगह अलाव के लिये सूखी लकड़ियां गिराए जाने के दावे किए जा रहे है। ऐसा नही है कि लकड़ियां गिर नही रही है गिरती तो है लेकिन वो गीली होने के कारण तौल में तो निर्धारित मानक के बराबर होती है लेकिन वह जरूरतमंद लोगों की सुविधा के लिए नही बल्कि उन्हें सर्दी में चिढ़ाने के काम मे आ रही है। जब हमारी टीम ने सच खंगालने की कोशिश की तो मामला कुछ उल्टा नजर आया। लकड़िया गिर तो रही है लेकिन पूरी गीली जिससे रात को कुछ घंटे जलकर शेष लकड़ी बच जाए और दूसरे दिन थोड़ी लकड़ियां गिरा कर खानापूर्ति कर दी जाती है। रेलवे स्टेशन, बस स्टॉप और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर  गरीब, बेसहारा इस कड़ाके की ठंड में अलाव सेंककर जीवन जीते है। लेकिन नगर निगम निर्माण विभाग के अधिकारी मौन है। और तो और जब इस विषय मे विभाग के अधिकारियों से जानकारी लेने की कोशिश की गई तो उन्होंने अपना पल्ला झाड़ते हुए साफ कहा कि आपको को जो दिखाना है दिखाइए। हम तो यही करेंगे।

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