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    कानपुर। मनु की मूर्ति व भीमा कोरेगॉव के कार्यक्रम में फंसाये गये निर्दोषो को रिहा करने के लिए डीएसएमएम ने ज्ञापन दिया।

    इब्ने हसन ज़ैदी\कानपुर। दलित शोषण मुक्ति मंच (डी एस एम एम ) ने भीमा कोरेगांव के सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा किये जाने व हाईकोर्ट जयपुर राजस्थान में मनु की मूर्ति हटाए जाने के संबंध में कानपुर जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति  को निम्नलिखित ज्ञापन दिया!01 जनवरी 2018 को पुणे महाराष्ट्र में भीमा कोरेगांव दिवस के कार्यक्रम में भड़की हिंसा में महाराष्ट्र पुलिस ने 16 लोगों पर हिंसा भड़काने और हिंसा की साजिश रचने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया। 

    उक्त घटना की जांच के लिए गठित एन0जे0 पटेल आयोग के समक्ष तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गणेश मौरे ने शपथ पत्र दिया कि जेल में बंद 16 राजनीतिज्ञों को जो एल्गार परिषद से हैं उनका भीमा कोरेगांव में भड़की हिंसा के मामले में कोई संबंध नहीं है, गणेश मौरे ने अपने शपथ पत्र के तहत स्पष्ट किया कि उस दिन हुई हिंसा संभाजी भिड़े और मिलिंद एडबोटे की वजह से हुई थी और वे ही इस हिंसा के जिम्मेदार हैं  क्योंकि मनु की मनुस्मृति हमारे देश की भारतीय संविधान विरोधी दस्तावेज है जिसके कारण मनु स्वत: ही संविधान विरोधी बन जाते हैं ऐसे में हाई कोर्ट जयपुर में मनु की मूर्ति के लगे होने का कोई औचित्य नहीं है । ज्ञापन देने में:-  गोविंद नारायण, चमन खन्ना, एड0 आनंद गौतम, एड0 जफर आबिद, टेकचंद, शिवकुमार, हरिशंकर वर्मा, अशोक तिवारी, उमाकांत विश्वकर्मा, मो0 वसी, मो0 कलीम, मोनी, हरभजन बाल्मीकि, युवराज, आर्यन राहुलन अम्बेडकर, एड0 जय प्रकाश आदि। 

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