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    हाथरस। शुक्र अस्त है! इसलिए देव उठान को भी नहीं बजेगी शहनाई।

    • 01 अक्तूबर से 23 नवंबर तक शुक्र अस्त है
    • जबकि मान्यता है, देव उठ जाते है तो मागंलिक कार्य भी  आरम्भ हो जाते है 
    • लेकिन इस बार शुक्र ने भांति बिगाड़ा, कोई भी शुभ कार्य वर्जित होगा

    नीरज चक्रपाणि\हाथरस। पौराणिक काल से आज तक सत्य सनातन वैदिक हिन्दू धर्म के अनुसार देव प्रबोधिनी (देव उठान) एकादशी से शुभ कार्यों पर लगा अवरोध हट जाता है। यानी रुके हुए शुभ कार्य आरंभ हो जाते हैं, लेकिन शास्त्रीय मत को माने तो इस बार देव उठान को भी शहनाई बादन नहीं होगा। यानी मंगलिक कार्यों का होना संभव नहीं,  क्योंकि शुक्र अस्त है। शास्त्रीय मत को माने तो शुक्र अगर अस्त है तो शुभ कार्य निषिद्ध (वर्जित) होते हैं। 04 नवंबर यानी तिथि देव प्रबोधिनी (देव उठान) एकादशी है, लेकिन शुक्र अस्त है तो फिर कैसे वजेगी शहनाई ?
    मान्यता है कि देव शयनी एकादशी को भगवान शयन को चले जाते हैं। इसलिए सभी शुभ कार्यों को  दव शयन के बाद वर्जित माना जाता है। जबकि देव उठान एकादशी से शुभ कार्यों के लगी रोक हटा माना जाता है और शुभ कार्य आरंभ हो जाते हैं। इस वर्ष बीती 10  जुलाई दिन रविवार को देव शयनी एकादशी थी। इसलिए शभी शुभ कार्यों पर रोक लग गई थी जो आज यानी 04 नवंबर दिन शुक्रवार को देव उठान एकादशी है। मान्यता के अनुसार तो सभी शुभ कार्यों पर लगे ब्रेक हट जाने थे, लेकिन शास्त्रीय मतानुसार शुक्र अस्त चल रहा है इसलिए आज जो शहनाई बजनी थी नहीं बजेगी। क्यों 01 अक्तूबर को शुक्र अस्त हुआ था जो 23 नवंबर को उदित होगा। अर्थात शास्त्रीय मतानुसार अब 04 के स्थान पर 23 नवंबर को शहनाई की गूंज होगी। यानी नव युगलों का विवाह महोत्सव (दाम्पत्य-सूत्र-बंधन) अब 23 नवंबर से हो सकेंगे।
    *क्या हैं शास्त्रीय प्रमाण ? जानते हैं*
    ज्योतिषाचार्य उपेंद्रनाथ चतुर्वेदी
    विवाह के मुहूर्त्तकाल निश्चय करने में गुरु व शुक्र के अस्त काल को पूर्ण वर्जित माना गया है। कोई भी परिहार इस अस्त का प्रतिवाद रूप में शास्त्रों में प्राप्त नहीं होता। देवशयनी काल भी वर्जित है, किंतु देश-भेद से इंगित देशों में ( पंजाब- पाकिस्तान- सिंध ) में देवशयन काल भी विवाह में ग्राह्य है । किंतु गुरु-शुक्र अस्त काल का विचार उक्त द्विगर्न देशों में पूर्व वर्जित रूप में ही मान्य है, देवाठान एकादशी को अबूझ मुहुर्त मानकर विवाह संपन्न करना लोक परंपरा है। जबकि इसको शास्त्रीय प्रमाण प्राप्त नहीं है। अब तो कुछ पुरोहित देवठान एकादशी से पूर्णिमा तक 5 दिनों को भी विवाह के अबूझ मुहूर्त्त कहकर मान्यता देने लगे हैं। किंतु शास्त्र प्रमाण के अभाव में यह बात हमको स्वीकार बनेही है।,  गुरु व शुक्र अस्त काल पूर्ण निषिद्ध है।
    आचार्य विनोद शास्त्री
    देखिए देव उठान एकादशी से ही बैंड, बाजा,  बारात  और शहनाई  का सीजन आरम्भ हो जाता था, लेकिन शुक्र अस्त होने के कारण इस वर्ष यह संभव नहीं है। 10 जुलाई से 04/05 नवंबर को देव उठान एकादशी को 119  दिन वाद चातुर्मास पूर्ण हो रहा है। इस बार देव उठान को शहनाई नहीं बनेगी, क्योंकि शुक्र अस्त है। 
    01 अक्तूबर से 23 नवंबर तक शुक्र अस्त होने के कारण नव युगलों को  परिणय उत्सव के लिए 23 नवंबर तक प्रतिक्षा करनी होगी।
     मनु महाराज
    देव उठान एकादशी को तुलसी-शालिग्राम, विष्णु-लक्ष्मी, मनोरमा-सहस्रार्जुन, अरूधंति-वशिष्ठ, श्रीकृष्ण-रुक्मणि  आदि के पौराणिक प्रमाण मिलते हैं, लेकिन अगर शुक्र अस्त है तो शास्त्रीय प्रमाण ना होने के कारण देश उठान एकादशी पर भी विवाह मुहूर्त शुभ नहीं है। इस वार शुक्र के अस्त होने के कारण देव उठान पर भी विवाह कर्म उचित नहीं पूर्णत: निषिद्ध है।
    • दिसंबर में केवल चार विवाह मुहूर्त
    आचार्य विनोद शास्त्री के मुताबिक माह दिसंबर में चार ही मुहूर्त हैं। वह कहते हैं कि हम विवाह मुहूर्तो की बात करें तो प्रथम विवाह मुहूर्त 02 दिसंबर 2022,  द्वितीय विवाह मुहूर्त 08 दिसंबर, तृतीय मुहूर्त 09 दिसंबर  और चतुर्थ विवाह मुहूर्त 14 दिसंबर 2022 का है। क्योंकि इसके बाद सेवा हेतु सूर्यनारायण अपने गुरु बृहस्पति देव के घर धनु राशि में चले जाएंगे और फिर 01 माह के लिए विवाह मुहूर्त पर विराम लग जाएगा। कुल मिलाकर दिसंबर माह में चार विवाह मुहूर्त ही शुभ है। देव उठान एकादशी का दिन शास्त्रों में प्रशस्त माना गया  है।  इस दिन तुलसी-शालिग्राम, विष्णु-लक्ष्मी, मनोरमा-सहस्रार्जुन, अरूधंति-वशिष्ठ, श्रीकृष्ण-रुक्मणि  आदि देवी-देवताओं का विवाह होने के प्रमाण हमारे  धर्मशास्त्रों  मे पाये जाते है।  इस तिथि को विवाह करना वेहद शुभ माना गया है।  इस दिन विवाह करने से कुयोग नष्ट होकर जीवन पर्यन्त वैवाहिक सुख भोगता है, परंतु शुक्र अस्त होने के कारण नव युगलों को यह अवसर इस बार नहीं मिलने वाला।

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