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    कानपुर। कानपुर कोर्ट में एक सनसनी खेज मामला प्रकाश में आया।

    तकी हैदर

    कानपुर। आपने देखा होगा कि जब कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति के साथ धोखाधड़ी करता है तो उस मामले की शिकायत पुलिस प्रशासन से को जाती है जिसके बाद प्रशासन द्वारा कानूनी कार्यवाही करते हुए आरोपी को न्यायालय में पुलिस द्वारा सुपुर्द किया जाता है जिसके बाद न्याय पालिका उस मामले को संज्ञान में लेकर सारी सुनवाई एवं गवाहों के आधार पर यह तय करती है कि आरोपी पर अपराध सिद्ध होता है या नही जिसकी सुनवाई के दौरान आरोपी अपनी बेगुनाही साबित करने हेतु न्याय पालिका से कुछ समय मांगता है अपने अधिवक्ता के माध्यम से जिसमे न्याय पालिका उस आरोपी को मुकदमे की सुनवाई के दौरान 2 गारंटर यानि कि जमानतगीर के आधार पर आरोपी को समय देती है

    लेकिन यहां तो न्यायपालिका के साथ ही धोखाधड़ी होती नजर आई जिसमे कुछ तथाकथित काले कोट वाले लोग न्यायपालिका को गुमराह करके फर्जी जमानते करा बैठे जिसमे वादी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से इस बात का खुलासा किया। आज दिनांक 18 नवंबर 2022 को एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया जिसमे वादी उपेंद्र तिवारी एवं उनकी अधिवक्ता रश्मि चौहान ने अवगत कराया की उपेंद्र तिवारी के मुकदमे में आरोपी पक्ष द्वारा न्यायालय को गुमराह कर फर्जी जमानतगिर लगाकर आरोपियों की जमानत कराई गई है जिसकी पुष्टि स्वयं क्राइम ब्रांच ने अपनी जांच में की है। 

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