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    बाराबंकी। मजार और तांत्रिक के पास नहीं मनो चिकित्सा से मिलेगा लाभ - डॉ. आरती

    .......... भ्रम घबराहट और शक का जिला चिकित्सालय के मनो रोग कक्ष में हो रहा ईलाज

    बाराबंकी। अगर किसी को ईर्ष्या, शक, बेचैनी और घबराहट होती है तो यह एक दिमागी बीमारी है, इस बीमारी का ईलाज अब जिला अस्पताल परिसर में मन कक्ष में कराकर मरीज को पूर्णतः स्वस्थ किया जा सकता है। मनो चिकित्सक डॉ. आरती यादव द्वारा मानसिक बीमारी से होने वाले लक्षणो और उनके कई उपायो की जानकारी देते हुए बताया कि मानसिक बीमारियों के प्रति समाज में अंधविश्वास का बोलबाला है जिसके लिये सबको जागरूक होने की आवश्यकता है।

    आगरा जिले के मेंटल हॉस्पिटल में पांच वर्षो तक प्रेक्टिस करने के बाद बीते सितंबर माह से जिला अस्पताल में आयुष के सामने स्थित मन कक्ष में तैनात, डॉ. आरती यादव (एम डी) मनो चिकित्सक मानसिक मरीजों के जीवन में रोशनी की किरण लाने की जिम्मेदारी वहन कर रही है। बताती है कि लोग मनोरोग को समझ नहीं रहे है, लोगो में जागरूकता की कमी है। अगर बीमारी समझ जाते है तो सही जगह उपचार के लिये नहीं जाते। इसके विपरीत मजार, तांत्रिक और ओझा के पास पहुंच कर अपना भारी नुकसान कर लेते है।

    सरकार ऐसे मरीजों को जागरूक करने के लिये जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (डिस्ट्रिक मेंटल हेल्थ प्रोग्राम) के तहत काम कर रही है। डॉ आरती के नेतृत्व में 10 सदस्ययीय टीम, गॉव-गॉव, बस्ती-बस्ती मजारो और स्कूलो जैसी जगहों पर जाकर लोगो को जागरूक करने की मुहिम में जुटी है। इस टीम में एमबीबीएस डॉ. राहुल सिंह, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट विनोद पाल, सोशल वर्कर प्रेम प्रकाश सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल है।

    जिले को मनोरोग चिकित्सक के रूप में बेहतर उपचार देने के लिये डॉ. आरती ने बताया कि शक, बेचैनी, भ्रम और घबराहट होना, अलग-अलग लक्षण होना उनके लंबे लंबे इलाज से ठीक नहीं होना देखने को मिलता है। जैसे सिर, पेट, हाथ, गले या सीने दर्द या हाथ आदि जगह की नसों का चलना, यह सोमैटो फार्म बीमारी के लक्षण है, जो बीमारी बनी है रह रही है और जाँच में नहीं निकल रही है। जिसका इलाज मनो चिकित्सका से ही सम्भव है।

    • बच्चो और बुजर्गो की बीमारियां

    लोगो को लगता है कि बच्चा ज्यादा शैतान है, यदि एक काम को बार-बार करना या बच्चे के शांत बैठे रहने पर मनो चिकित्सक के पास ले जाने की आवश्यकता है। जबकि लोग इसे मामूली बात समझते है। डॉ आरती बताती है कि अगर बच्चा लिख लेता है और पढ़ नहीं पाता या किसी एक विषय में कमजोर है तो इसका भी मनो चिकित्सा में ईलाज मौजूद है। बुजुर्गो में आमतौर पर बड़बड़ाना, हाथ पैर काँपना या उठकर चल देना मनोरोग है। यह स्कीजोफ्रिनिया नाम की बीमारी है, इसका ईलाज कराना चाहिये है।

    • शराब की लत को गंभीरता से ले

    समाज में शराब की लत को अक्सर परिवार के लोग स्वीकार कर लेते है जबकि यह तमाम समस्याओ की जड़ बनती है। शराब की लत को छुड़ाने के लिये मनो चिकित्सा के जरिये ईलाज कराये जाने से ये लत आसानी से छूट जाती है। मनो चिकित्सक ने बताया कि शराब, तम्बाकू जैसी नशे की चीजे इसका इस्तेमाल करने वालों में तमाम मानसिक रोग और ईर्ष्या -भ्रम जैसी बीमारी का कारण बनती है।

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