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    सीतापुर। बाज़ारो को गुलज़ार कर रखा प्रतिबंधित पॉलीथिन ने ,मुख्यमंत्री के आदेशो की धज्जिया उड़ा रहा प्रशासन।

    शरद कपूर\सीतापुर। जिले की सीतापुर बाजार हो या खैराबाद की बाजार हो महोली, मिश्रिख, नीमसार, रेउसा, महमूदाबाद, सिधौली, लहरपुर, पैंतेपुर, या फिर बिसवां की ही बाजार क्यों ना हो हर जगह प्रत्येक दुकान पर प्रतिबंधित पॉलीथिन की बिक्री धड़ल्ले से खुलेआम जारी है। जबकि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने पॉलीथिन को पूर्ण  रूप से प्रतिबंधित कर रखा,लगभग सम्पूर्ण दुकानों पर पॉलीथिन देखने को मिलेगी।जबकि इस पॉलीथिन को पता नही कितने जानवर खा जाते हैं और उनकी जिंदगी काल के गाल मे समा जाती है। इस बाबत मे न0पा0 परिषद ने सघन चेकिंग अभियान चलाया था और जुर्माना भी वसूला गया था। 

    इसके बाद भी पॉलीथिन ने बाज़ारो को गुलजार कर रखा है।जबकि पॉलीथिन पर्यावरण ,सामाजिक और प्रकति की सुरक्षा के प्रति हर व्यक्ति को अपने दायित्वों को समझना चाहिए और पॉलीथिन का प्रयोग बिल्कुल  नही करना चाहिये। अब चिंतन का विषय यह है कि आखिर पॉलीथिन आ कहा से रही है। आखिर स्थानीय प्रशासन क्यो बौना साबित हो रहा,कठोर कदम क्यों नहीं उठा रहा।

    कहने को तो खाना पूर्ति के लिए 24 महा में एक बार पॉलिथीन की चेकिंग का अभियान चलाकर कानून की इतिश्री कर ली जाती है और  कागजों का पेट भर दिया जाता है। एक आध दुकानदार पर जुर्माना भी कर दिया जाता है और विद्वत रसीद काटकर उनसे हजार या ₹500 जुर्माने के रूप में वसूले भी जाते हैं। परंतु चेकिंग टीम के हटते ही सभी कुछ पहले की तरह सामान्य हो जाता है और दुकानदार के साथ ही ग्राहक भी धड़ल्ले से पॉलिथीन का प्रयोग करता नजर आता है। देखने मात्र से स्पष्ट नजर आता है वह चाहे ठेलेवाला हो पटरी दुकानदार हो या खोमचे वाला हो चाहे स्थाई बड़ा दुकानदार हो हर दुकान पर पॉलीथिन का प्रयोग खुलेआम हो रहा है। इस संबंध में जब इस संवाददाता ने जिले के कुछ व्यापारियों से बात की तो उन लोगों ने स्पष्ट रूप से कहा कि हम भी नहीं चाहते हैं कि पालीथिन का प्रयोग हो लेकिन ग्राहक हम लोगों को मजबूर करता है।

    फिलहाल कुछ भी हो यह प्रतिबंधित पॉलिथीन एक ओर जहां पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है वहीं दूसरी ओर बेजुबान जानवरों को असमय ही काल के मुंह में पहुंचा रही है। इसी के साथ ही इस प्रतिबंधित पॉलिथीन से नालिया नाले चोक हो जाते हैं तो जगह-जगह गंदगी के ढेर भी लग जाते हैं।

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