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    सीतापुर। कार्तिक पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, चंद्र ग्रहण पड़ने से जनपद के मंदिरों के कपाट हुए बंद।

    ............ घर-घर में श्रद्ध भक्ति भाव की मनोकामना के साथ किया गया तुलसी पूजन

    सीतापुर। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर जनपद में बड़ी ही श्रद्धा भक्ति आस्था के साथ मां तुलसा की पूजा विधिवत विधि विधान से की गई घरों में लगा। तुलसी के पौधे के चारों तरफ चावल के आटे से पहले रंगोली बनाई गई एवं उन रंगोली में नमो नमो तुलसा महारानी नमो नमो विष्णु पटरानी आदि प्रकार के शब्दों का वर्णन किया गया। उसके उपरांत माता तुलसा की कथा श्रद्धालु महिलाओं द्वारा पढ़ी गई एवं कथा उपरांत माता तुलसी की आरती उतारकर पूरी, पुआ, हलवा, मिष्ठान, बतासे का भोग लगाया गया। 

    चन्द्र ग्रहण के चलते मंदिरों के बंद कपाट

    कार्तिक पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण पड़ने के कारण 1 दिन पूर्व ही लगभग 80 परसेंट लोगों द्वारा माता तुलसा की पूजा कर ली। जिन लोगों के द्वारा पूजा नहीं की गई उन्होंने आज प्रातः जल्दी उठ कर 8 बजे तक माता तुलसा की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना आराधना की। बड़ा हनुमान मंदिर के पुजारी रमाकांत पांडे के द्वारा बताया गया कि प्रातः 9 से सूतक लग रहे हैं, जिसके कारण उसके उपरांत चंद्र ग्रहण समाप्त होने तक किसी भी प्रकार की पूजा अर्चना आराधना नहीं की जा सकती चंद्र ग्रहण के कारण ही जनपद के नैमिष स्थित मां ललिता देवी मंदिर हनुमानगढ़ी काली माता मंदिर देवसर धाम रुद्राक्ष धाम संकटा देवी मंदिर शीतला देवी मंदिर दुर्गा माता मंदिर चांदी वाले हनुमान मंदिर बड़ा हनुमान मंदिर आदि जनपद के प्रमुख से लेकर छोटे छोटे मंदिरों के भी कपाट बंद कर दिए गए। शाम को चंद्र ग्रहण समाप्त होने के उपरांत मंदिरों के कपाट खोले गए एवं मंदिरों की साफ-सफाई कर मंदिरों में आरती की गई। वैसे तो भारत में कुछ ही जगह पर पूर्ण चंद्र ग्रहण था। अन्य स्थानों पर आंशिक चंद्रग्रहण ही लगा। 

    कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान करते श्रद्धालु

    वही कार्तिक पूर्णिमा पर नैमिषारण्यसंवाद कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने लगाई आदिगंगा गोमती में आस्था की डुबकी कार्तिक मास की पूर्णिमा पर पौराणिक तीर्थ नैमिषारण्य में आदिगंगा गोमती के राजघाट सहित चक्रतीर्थ में श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई और पुरोहितों को दान-दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रद्धालुओं का स्नान-दान का यह क्रम ब्रह्ममुहूर्त से ही प्रारम्भ हो गया जो दिनभर चलता रहा आदिगंगा गोमती व चक्रतीर्थ में स्नान के पश्चात लोगों ने नैमिषारण्य के अन्य धार्मिक स्थलों हनुमान गढ़ी, पाण्डव किला, व्यासगद्दी, सूतगद्दी, शौनक गद्दी एवं आदिशक्ति माँ ललिता देवी का दर्शन कर छत्र, चूनर, प्रसाद अर्पण किया एवं दण्डवत कर पुण्य लाभ अर्जित किया कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात,पश्चिम बंगाल, उड़ीसा एवं आंध्रप्रदेश आये हजारों श्रद्धालुओं ने गोमती व चक्रतीर्थ में दीपदान किया साथ ही लोगों ने मिट्टी के खिलौने, सिंघाड़ा, लाई-चूरा आदि की खरीदारी भी की।

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