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    पीलीभीत। जल स्रोत खोजने गोमती उद्गम पहुंचे रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर के वैज्ञानिक।

    कुँवर निर्भय सिंह\पीलीभीत। लखनऊ की लाइफ लाइन अवध की शान मां आदि गंगा गोमती नदी प्रदेश की पवित्र नदियों में से  एक नदी है नदी को  उद्गम स्थल से सदानीरा बनाने के लिए जिला अधिकारी के आमंत्रण पर रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर लखनऊ से डॉक्टर सुधाकर शुक्ला अपनी टीम के साथ सोमवार को उद्गम तीर्थ स्थल पहुंचे जहां उन्होंने  गोमती के प्राकृतिक जल स्रोतों की खोज करने की बात कही। उनके साथ एसडीएम कलीनगर शिखा शुक्ला और पूरनपुर विकास खंड अधिकारी सर्वेश कुमार सिंह थे।

    गोमती नदी  का उद्गम माधोटांडा की फुलहर झील के प्राकृतिक जल स्रोत से होता है नदी के प्राकृतिक  जलस्रोत अवरूद्ध  हो जाने  के चलते नदी की अविरल धारा नहीं बह पा रही है जिससे सदानीरा कहीं जाने वाली गोमती नदी अपने वास्तविक स्वरूप में नहीं बह पा रही है सोमवार को गोमती उद्गम के स्थलीय निरीक्षण के दौरान रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर के  वैज्ञानिक डॉक्टर सुधाकर शुक्ला ने गोमती नदी के पुनरुद्धार के लिए पूर्व में किए गए उपायों की जानकारी ली। साथ ही  अविरल बहाव के  लिए उठाए जाने वाले जरूरी कदमों  पर जोर दिया । इसके लिए गोमती  उद्गम स्थल पर तीन हिस्सों में विभाजित झील के पहले दो हिस्सों को जोड़ने वाले सेतु के स्थान पर  सी टाइप पुल, एवं गोमती के इर्द गिर्द अतिक्रमण हटाने की बात भी उभर कर सामने आईं ।डॉ शुक्ला ने बताया कि यह उनका दूसरा दौरा है तथा पहले दौरे के निष्कर्ष चिंताजनक है। 

    उप जिलाधिकारी शिखा शुक्ला ने गोमती की वर्तमान हालत पर दुःख व्यक्त करते हुए इसकी बेहतरी के लिए जरूरी कदम उठाए जाने पर बल दिया। इस अवसर पर गोमती सेवक राममूर्ति सिंह, निर्भय सिंह, प्रधान नईम अली, एवं गोमती की सांस्कृतिक विरासत को संजों रहे सुशील सीतापुरी भी मौजूद रहे।

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