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    अयोध्या। रहस्य, रामनगरी के स्वर्ग द्वार की एक गली से गुजरते ही ठीक हो जाता है मानसिक रोग।

     ......... अयोध्या की स्वर्गद्वार क्षेत्र में 60 से अधिक है सकरी गलियां

    अयोध्या। प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि सहित लगभग साढ़े 10 हजार मंदिरों को अपने आप मे समेटे राम नगरी अयोध्या का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्त्व अपने आप मे बहुत बड़ा है। लेकिन इन मंदिरों के बीच कई सारे रहस्य और मान्यताएं भी छुपी हुई है। ऐसा ही एक रहस्य अयोध्या के मंदिरों के बीच स्थित स्वर्गद्वार क्षेत्र का भी है। जिसके बारे में जनश्रुति है कि इस क्षेत्र के बीच एक ऐसी गली है जहां पर गुजरने से मानसिक रोगी खुद ब खुद ही ठीक हो जाते हैं। क्षेत्र के स्थानीय लोगों की मानें तो आज भी इस गली और स्थान का पता किसी को नहीं चल सका है। इसलिए इस क्षेत्र को रहस्यमयी माना गया है।

    बता दे कि स्वर्ग द्वार सरयू तट के किनारे स्थित है। अयोध्या के स्वर्गद्वार क्षेत्र में 1500 से अधिक निजी मकान बने हुए हैं और 60 से ज्यादा इस क्षेत्र में गलियां हैं। कहा जाता है कि अनजान शख्स इन सकरी गलियों में आ जाए तो बाहर नहीं निकल पाता। यहां पर छोटे बड़े घर के अलावा महाल जैसे बंगले भी बने हुए हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो अच्छे से अच्छे जानकार भी इन गलियों में घरों का पता नहीं ढूंढ पाते है।

    अयोध्या के इसी स्वर्गद्वार में एक और रहस्य छुपा हुआ है कहा जाता है कि इस क्षेत्र में बहुत गलियां है जो टेढ़ी-मेढ़ी और पतली है। कई गलियां तो ऐसी है कि यहां रहने वाले लोग भी जीवन में शायद ही कभी वहां से गुजरते होंगे। कहा जाता है कि एक ऐसी भी गली है। जहां मानसिक रोगी पहुंच कर स्वस्थ हो जाते हैं। यह मान्यता बहुत पुराने समय से चली आ रही है लोगों ने इनके बारे में अपने बुजुर्गों से सुना है यहां के कई बुजुर्गों ने इसे बचपन में देखा भी है। पीढ़ियों से इस मोहल्ले में रहने वाले  एक आयुर्वेदिक डॉक्टर है और इस क्षेत्र में कई वर्षों से अपनी एक क्लीनिक चला रहे हैं। उनके पिता और उनके दादा भी इसी सेवा कार्य से जुड़े हुए थे। उनका कहना है कि उनके उम्र 60 साल की है। उन्होंने बचपन में देखा है कि लोग मानसिक रूप से अस्वस्थ रोगियों को क्षेत्र में घुमाते थे।

    स्वर्गद्वार क्षेत्र अयोध्या में एक बहुत पुराना तीर्थ माना जाता है हमारा जन्म भी यही हुआ है बचपन में हमने देखा है कि लोग पागल को लेकर आते थे और हाथ बांधकर उन्हें यहां घुमाते थे और आज भी इस क्षेत्र में पागल को लोग छोड़ जाते हैं।

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