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    गाजीपुर। भारत की आजादी में उर्दू और हिंदी के सहयोग को भुलाया नहीं आ सकता:- डॉ सेराज खान बातिश

    महताब आलम\गाजीपुर। जनपद मुख्यालय से 24 किलोमीटर दूर मोहम्मदाबाद तहसील अंतर्गत अली अहमद एजुकेशनल वेलफेयर सोसाइटी द्वारा "भारत की आजादी में उर्दू के योगदान" विचार गोष्ठी एवं कवि गोष्टी का आयोजन शम्स मॉडल स्कूल मुरकी खुर्द के प्रांगण में किया गया! इस अवसर पर संस्था द्वारा डॉक्टर सेराज खान बातिश को कोलकाता में लेखक ,कहानीकार एवं कवि के तौर पर उत्कृष्ट कार्य करने पर "शाने गाजीपुर एवार्ड" देकर सम्मानित किया गया। 

    इस अवसर पर कोलकाता से पधारे प्रसिद्ध लेखक एवं कवि मुख्य अतिथि डॉ सेराज खान बातिश ने अपना विचार प्रकट करते हुए कहा कि भारत की आजादी में उर्दू और हिंदी भाषा ने जो योगदान दिया है। इसे भुलाया नहीं जा सकता है। भारत की आजादी में मुगल काल का आखरी बादशाह बहादुर शाह जफर एक ऐसे बादशाह गुजरे हैं। जो उर्दू और हिंदी दोनों भाषाओं के माध्यम से आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए शायरी किया था। उर्दू और हिंदी का विस्तार पूरी दुनिया में हो चुकी हैl लेकिन इसमें निखार दोनों की मोहब्बत से अधिक हो सकती है। जिस तरह से हिंदी भाषा में अपने अंदर बहुत सुधार किया है। उसी तरह से उर्दू के अंदर भी कुछ विस्तार करने की जरूरत हैl खास तौर पर लिपि में lक्योंकि हिंदी में उर्दू अक्षर के उच्चारण को प्रस्तुत करने के लिए नए-नए अक्षर बना लिया हैl लेकिन उर्दू के जानकारों ने हिंदी से सबक आज तक नहीं लिया हैl भाषा किसी धर्म की नहीं होती है उर्दू को जबरदस्ती आजाद भारत के बाद धर्म से जोड़ दिया गया। उर्दू का विस्तार और तरक्की के लिए बांग्ला और सिख वासियों से सीखने की जरूरत है। बंगाली और सीख दुनिया के किसी कोने में रहते हैंl अपनी जबान को अपने साथ रखते हैंl जवान सरकार के बूते कम अपने बूते अधिक फलती फूलती है l

    इस अवसर पर प्रधानाचार्य राजदा खातून ने विषय परिचय कराते हुए कहा कि शम्स मॉडल स्कूल सूर्य की तरह पूरे क्षेत्र में प्रकाश देना चाहता है। इसलिए उर्दू और हिंदी का योगदान को बच्चों को बताने के लिए विचार गोष्ठी को करना पड़ा। इस अवसर पर कोलकाता से आए हुए मुख्य अतिथि की शायरी के साथ-साथ कवि दानिश दोलताबादी और सरवर मोहम्मदाबादी को लोगों ने खूब पसंद किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से पूजा शर्मा, आशीष यादव ,सलमा परवीन, फैयाज अहमद, अदनान रजा ,सारा जावेद ,चंद्रभान पांडे ,सुखराम यादव, जहांआरा ,संजीदा खातून ,खुशनुमा खानम, निखत परवीन एवं संजीव कुमार दुबे आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे। इस विचार गोष्ठी एवं कवि गोष्टी की अध्यक्षता कन्हैया अग्रवाल एवं संचालन नाजिम रजा ने किया। 

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