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    मिश्रिख\सीतापुर। मानक विहीन सामग्री से हो रहा एकल कक्ष निर्माण,प्राक्कलन बोर्ड भी नदारद।

    संदीप चौरसिया तहसील मिश्रिख की रिपोर्ट

    मिश्रिख\सीतापुर। ब्लॉक मिश्रिख से सबसे निकटतम ग्राम पंचायत जसरथपुर के पंचायत घर प्रांगण में निर्मित हो रहे एकल कक्ष में मानको की खुले आम धज्जियाँ उड़ाई जा रही है, न कही प्राकलन बोर्ड नजर आता है, ना ही कार्य की स्वीकृत लागत और ना ही ठेकेदार और ना ही देखरेख करने वाला जेई,  कौन है? लेकिन कार्य प्रगति पर है। निर्माणाधीन कक्ष में घटिया सामग्री का प्रयोग तो हो ही रहा है वहीं ग्राम प्रधान रामपाल और पंचायत सचिव अमित चतुर्वेदी बजाय निर्माण कार्य की देखरेख एक कथित ठेकेदार के सहारे कार्य करा रहे हैं। इस संबंध में ग्राम पंचायत के सेक्रेटरी अमित चतुर्वेदी से जब बात की गई तो उन्होंने कहा की निर्माण पूरा होने पर प्राकलन बोर्ड लगवा देंगे मनरेगा के कार्यों में पहले लगाया जाता है और ग्राम पंचायत के अन्य कार्यों में बाद में। 

    जबकि जानकार लोगों का कहना है, कि सरकारी धनराशि से होने वाले निर्माण व विकास कार्यों से सम्बंधित प्राक्कलन बोर्ड कार्य शुरू होने से पहले कार्य स्थल पर लगाया जाना चाहिये। ताकि लोगों को पता चल सके कि निर्माण कार्य किस मद से और किस योजना के तहत कराया जा रहा है। ब्लॉक की नाक के नीचे स्थित ग्राम पंचायत का जब यह आलम है। तो अन्य ग्राम पंचायतों के कार्यो की दशा क्या होगी, एक गम्भीर प्रश्न बना हुआ है। ज्ञातव्य हो कि ग्राम पंचायत जसरथपुर के पंचायत घर प्रांगण में एकल कक्ष का निर्माण ठेकेदारी प्रथा से वर्तमान में हो रहा है- जिसमें मानक अनुरूप न तो मसाला लगाया जा रहा है और न ही ईंट, मौके से स्वीकृत धनराशि और कार्य सम्बन्धी प्रांकलन बोर्ड भी नदारत है जिसको बाद मे लगवा देने की बात कहकर  ग्राम पंचायत सेक्रेटरी द्वारा अपना पल्ला झाड़ा जा रहा है, ग्रामीण यह जानने के इच्छुक है कि कार्य कितनी धनराशि से होना स्वीकृत है इसकी निर्माण तिथि क्या है और यह की तारीख तक पूरा होगा। इतना ही नहीं इस ग्राम पंचायत के इसी गांव में कई  निर्माण कार्य और सड़कें भी पहले कागजों पर ही बन जाने की बात दबी जुबान सूत्र बताते हैं लेकिन निर्मित मार्ग और अन्य विकास कार्य कहीं दृष्टिगोचर न हो जाये, कहना गलत न होगा कि जब ग्राम पंचायत के मुख्य गांव का यह आलम है तो अन्य मजरों की दशा क्या होगी सहज ही अंदाज लगाया जा सकता है।  जिसकी तरफ जिला प्रशासन और प्रदेश शासन को गंभीरता से पहल करने की आवश्यकता है ताकि प्रदेश सरकार जिन विकास के दावों की बातें करती है वह कहीं हजम न हो जाये।

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