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    भरतकुंड। योगीराज' मे उत्सवों से उल्लासित है 'योगीराज' भरत की तपोभूमि नंदीग्राम।

    ........आचार्य मनोज दीक्षित सहित नंदीग्राम रत्न से दस व महायोगीराज से तीन लोग होगें सम्मानित..

    भरतकुंड। अयोध्या सम्राट तपस्वी भरत की तपोस्थली नंदीग्राम इस समय उत्सवों से उल्लासित है। पर्यटन विभाग व भरतकुंड न्यास मिलकर सात दिवसीय भरतकुंड महोत्सव मना रहे हैं। महात्मा भरत को 'योगीराज' कहा जाता है और उत्तर प्रदेश में इस समय 'योगीराज' भी है। अयोध्या से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रेम किसी से छिपा नही है। भरत की तरह अपने राम के लिए दौड़े चले आते हैं। प्रभु श्री राम ने भी भरत के लिए कहा था कि जो यश मैनें दीर्घकाल में कमाया, भरत ने वह अतिशीघ्र संचित कर लिया। विभिन्न क्षेत्र की विशिष्ट शख्सियतों के सम्मान के साथ महोत्सव आज समाप्त हो जाएगा।

    गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ रामनगरी को खूबसूरत नगरी तो बनाना ही चाहते हैं, साथ में प्रभु श्रीराम से जुड़े हर प्रसंग, स्थल को निखारने का जतन भी हो रहा है। खासकर रामवनगमन मार्ग के साथ रामायणकालीन उल्लेखित चौरीसी कोस परिक्रमा के अंदर के स्थलों को विकसित करने पर लगातार कार्य हो रहा है। दीपोत्सव ने अयोध्या को वैश्विक पटल पर स्थापित कर ही दिया है। प्रभु राम से जुड़े अन्य उत्सवों पर भी 'योगीराज' में सरकारी खजाने का मुंह सुरसा की तरह खुला हुआ है।

    रामायण कालीन स्थलों में नंदीग्राम का स्थान बहुत महत्वपूर्ण है। इसी स्थान पर तपस्वी भरत ने सिंहासन पर खड़ाऊँ धर चौदह साल तक प्रभु श्रीराम का इंतजार करके अयोध्या का शासन चलाया था। उपेक्षित पड़े इस स्थान का महत्व सिर्फ पिंडदान तक रह गया था। क्षेत्र के कुछ युवाओं ने अंजनी पांडेय के नेतृत्व में इसकी पहचान रामायण कालीन करने का बीड़ा उठाया था जो कि अब फलित हो रहा है। योगीराज सरकार भी साथ चल पड़ी है। 

    मशहूर कवि कुमार विश्वास ने अपनी एक कथा में नंदीग्राम स्थल का बड़ा सुंदर चित्रण किया है। राजा दशरथ की मृत्यु पर भरत अयोध्या बुलाए गए तो उन्हें दशरथ की मृत्यु का समाचार नहीं दिया गया था। प्रसिद्ध संस्कृत नाटककार भास के नाटक प्रतिमानाटकम् के अनुसार अयोध्या में प्रवेश के पहले नंदीग्राम में सूर्यवंशी राजाओं का स्मारकगृह था, जिसमें दिवंगत राजाओं की प्रतिमाएं लगती थीं। भरत जी इसे मंदिर समझकर जब अंदर गए तो उन्हें अपने पूर्वजों की प्रतिमाएं दिखाई पड़ी। दिलीप, रघु, आज के बाद जब अगली प्रतिमा पर माल्यार्पण के लिए उन्होंने नजर ऊपर उठाई तो बेहोश हो गए क्योंकि वह प्रतिमा राजा दशरथ की थी। होश में आने पर देवकुलिक ने विस्तार से पूरी बात भरत को बताया।

    नंदीग्राम में इस वर्ष सात दिवसीय चौबीसवाँ भरतकुंड महोत्सव मनाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग, सूचना विभाग, संस्कृति विभाग के साथ केंद्र सरकार के सांस्कृतिक विभाग भी लगे हैं। महोत्सव  हाफ मैराथन, भरत चरित्र भित्ति चित्रण, चरण पादुका यात्रा, आल्हा, भजन संध्या, कबड्डी, अवधी भोजपुरी लोक गायन, दुरदुरिया पूजन, रामलीला, कॉमेडी शो, रासलीला, महिला पुरुष दंगल, गरबा, फूलों की होली आदि कार्यक्रमों से सजा है। 

    महोत्सव की शुरुआत पहली नवंबर को हुई जब भरत माथे खड़ाऊं धर अयोध्या से नंदीग्राम आए। तमाम सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ अंतिम दिन विभिन्न क्षेत्रों की शख्शियतों को सम्मानित कर महोत्सव आज समाप्त हो जाएगा। जिन लोगों को नंदीग्राम सम्मान के लिए चयनित किया गया है उसमें रितेश मिश्रा समाज सेवा, गौरी शंकर दास संगीत, स्वदेश मल्होत्रा साहित्य , खलीक अहमद कला, आचार्य मनोज दीक्षित संस्कृति, डॉ शैलेंद्र वर्मा शिक्षा, मालती गोस्वामी नारी सशक्तिकरण, डॉक्टर जयंती चौधरी चिकित्सा, सतीश पाठक युवा सम्मान, डॉ सुनीता सिंह अनुसंधान शामिल हैं। महायोगी राज सम्मान डॉ संदीप सिंह, रतन सिंह व अजय सिंह को मिलेगा।

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