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    अयोध्या। रामनगरी में कल्पवासी श्रद्धालुओं का आगमन शुरू।

    ....... सरयू तट सहित प्रमुख मंदिरों में कथा प्रवचन का दौर प्रारंभ

    अयोध्या। कार्तिक मास का प्रारंभ होते ही अयोध्या में एक महीने तक चलने वाला कल्पवास शुरू हो गया है। देश के कई स्थानों सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र से हजारों की संख्या में श्रद्धालु रामनगरी पहुंच रहे है। सरयू स्नान के बाद तुलसी की आरती- पूजा कर रहे हैं। वे नागेश्वर नाथ, कनक भवन, हनुमानगढ़ी, कालेराम और रामलला मंदिर आदि स्थानों पर दर्शन कर रामकथा सुनने में लीन हैं।

    बता दे कि कल्पवासी कार्तिक पूर्णिमा स्नान के बाद अयोध्या से अपने गंतव्य को रवाना होंगे। इस बीच दीपावली, हनुमान जयंती, अक्षय नवमी पर अयोध्या की 14 कोसी परिक्रमा और देवोत्थानी एकादशी पर 5 कोस की परिक्रमा में 20 लाख से ज्यादा श्रद्धालु शामिल होते हैं। अभी कार्तिक कृष्ण पक्ष में कल्प वास शुरू हुआ है। इस मेले की भीड़ शुक्ल पक्ष की सप्तमी से बढ़ने लगती है। सरयू स्नान और पूजन के साथ सरयू आरती में कल्पवासी शामिल हो रहे हैं। सरयू के जलस्तर में भारी वृद्धि के चलते उन्हें स्नान के दौरान जोखिम से बचने की सलाह दी जा रही है। 

    बता दे कि शास्त्रों के अनुसार पूरा कार्तिक माह बेहद पुण्य देने वाला है। सरयू के किनारे दीपदान,सरयू दर्शन और स्नान के साथ तुलसी के पूजन का विशेष महत्व है।अयोध्या की परिक्रमा का एक-,एक पग जन्म -जन्मान्तर के पाप नष्ट कर प्रभु की कृपा प्रदान करता है। इस माह अयोध्या के वास व सरयू स्नान भगवान का समीपता प्रदान करता है। हिंदू धर्मशास्त्रों में कल्पवास को सन्यास और वानप्रस्थ आश्रम का संयोजक कहा गया है। शास्त्रों के अनुसार सन्यास आश्रम में प्रवेश करने के पूर्व एक माह माघ माह में कल्पवास करने का विधान है। कल्पवास शब्द 'कल्प' अर्थात एक निश्चित समयावधि तथा वास का अर्थ है रहना। इस आधार पर कल्पवास, एक निश्चित समयावधि तक सरयू तट पर रहने का कहा जाता है। सामान्यतया कल्पवास कार्तिक माह एक महीने का होता है। लेकिन सामर्थ्य अनुसार संकल्प ले कर 5, 11 या 21 दिन का कल्पवास भी किया जा सकता है। कल्पवास में नियमित रूप से सरयू स्नान करने और साधु-संन्यासियों के सतसंग का विधान है।

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