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    जयंती विशेष : मिसाइल मैन को कृतज्ञ राष्ट्र का सलाम, एपीजे अब्दुल कलाम ने भारत को दी एक नई दिशा।

     अतुल कपूर (स्टेट हेड)

    विशेष रिपोर्ट। मिसाइलमैन के नाम से मशहूर पूर्व राष्ट्रपति डॉ अब्दुल कलाम अपनी जीवन यात्रा से यह संदेश दे गए कि अगर इरादे मजबूत हो और लगन तथा परिश्रम से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ा जाए तो एक न एक दिन मंजिल मिलती जरूर है। उनका पूरा नाम अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम है और आज उनकी 91वी जयंती है। उनका जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम् में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम और माता का नाम आशिमा जैनुलाब्दीन था। कलाम के पिता उन्हें कलेक्टर बनाना चाहते थे लेकिन वे कठिन परिस्थितियों में भी अपने रास्ते खुद मनाते हुए आगे बढ़ते चले गए। उनका बचपन गरीबी में बिता था।  पिता मछुवारों को नाव किराए पर देकर 10 बच्चों का पालन-पोषण करते थे।


    गुदड़ी के लाल

    डॉ. कलाम का प्रारंभिक जीवन और बचपन कठिनाइयों में बीता। उनको 'गुदड़ी के लाल' कहा जाए तो अतिशयोक्ति न होगी। 

    1939 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कलाम महज 8 साल के थे तब उन्होंने इमली के बीजों को बेचकर रोजाना एक आना कमाना शुरू कर दिया था। उन्होंने कुछ समय तक अखबार बेचकर भी अपनी पढ़ाई जारी रखी।  डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम  का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में स्थित धनुषकोडी में एक मध्यमवर्ग मुस्लिम परिवार में हुआ था। उनके पिता न तो ज्यादा पढ़े-लिखे थे और न ही उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी थी। घर की माली हालत खराब होने की वजह से अब्दुल कलाम को अपनी प्रारंभिक शिक्षा जारी रखने के लिए लोगों के घर जाकर अखबार बेचने का काम करना पड़ता था। सन् 1950 में अंतरिक्ष विज्ञान में स्नातक की डिग्री पाने के बाद उन्होंने भारतीय रक्षा अनुसंधान में प्रवेश किया। विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में बहुमूल्य योगदान देने के लिए उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न के अलावा कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया।

    डा कलाम ने भारत के दो प्रमुख अंतरिक्ष अनुसंधान संगठनों- रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ काम किया था। साथ ही अग्नि मिसाइल और पृथ्वी मिसाइल का सफल परीक्षण का श्रेय भी कलाम को ही जाता है। साथ उनकी देखरेख में भारत ने 1998 में पोखरण में अपना दूसरा सफल परमाणु परीक्षण किया था। अब्दुल कलाम को भारत रत्न से  सम्मानित किया गया।

     भारत सरकार ने 1981 में कलाम को पद्म भूषण और 1990 में पद्म विभूषण और 1997 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा था। अब्दुल कलाम भारत रत्न पाने वाले देश के तीसरे राष्ट्रपति थे। इससे पहले सर्वपल्ली राधाकृष्णन और जाकिर हुसैन को भरात रत्न दिया जा चुका है। गौरव की बात तो यह है कि वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन गए।

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