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  • INA BREAKING NEWS

    जिनपिंग बनाम हमारे पंत प्रधान।

     कुकड़ूं क्यूं

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    तुमसे तो मुर्गे बेहतर है

    रोज देते हैंठ कुर्बानी

    लेकिन नहीं मांगते दया की भीख

    उल्टे दे जाते हैं सीख

    मरते रहो पर बोलो

    अपने पंख पूरी ताकत से खोलो

    पौ फटने से पहले जागो

    जो जानबूझकर सोये है

    उन्हे जगाओ ।

    आज के क्रूर समय में 

    ' कुकडूं कूं ' एक आवाज ही  नहीं 

    यलगार भी है

    इसमें तलवार की धार भी है॥ 

    राकेश अचल का लेख। चीन से खबर आती है तो समझिये कि उसके पीछे कुछ है। चीन से खबरें आसानी से बाहर नहीं आतीं। अब खबर आयी है कि चीन में राष्ट्रपति सही जिनपिंग की तीसरी बार ताजपोशी से पहले उनके खिलाफ प्रदर्शन करने वाले 14 लाख सत्याग्रहियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किये गए लोग शी जिनपिंग को तानाशाह बता रहे थे। चीन दुनिया का एक महत्वपूर्ण शक्तिशाली देश हैं जहां वामपंथियों का क्रूर शासन है। 

    चीन में लोकतंत्र की क्या स्थिति है उसे मैंने एक पर्यटक के नाते चीन में रहकर महसूस किया है। वहां कोई आसानी से प्रदर्शन नहीं कर सकता। लोग बुझे-बुझे और तनावग्रस्त दिखाई देते हैं। ऐसे में राजधानी बीजिंग में 16 अक्‍टूबर को चीन की सत्‍तारूढ़ कम्‍युनिस्‍ट पार्टी शी जिनपिंग को तीसरी बार देश की कमान सौंपने की तैयारी कर रही  हैं। करीब 5 साल बाद होने वाली इस बेहद अहम बैठक से पहले चीन में हुए  दुर्लभ प्रदर्शन में  शी जिनपिंग की ' जीरो कोविड ' नीति से बुरी तरह से परेशान हो चुकी जनता ने बीजिंग के कई इलाकों में पोस्‍टर-बैनर लगाकर चीन के राष्‍ट्रपति को तानाशाह बता दिया। चीन की जनता  कोरोना टेस्‍ट नहीं बल्कि खाना मांग रही है।

    भारत में जनता कोविड से नहीं घबड़ाती क्योंकि यहां 80  करोड़ जनता को मुफ्त अनाज बांटकर पिछले अनेक वर्षों से मूर्ख बनाया जा रहा है ,लेकिन जनता की आँख कब खुल जाए और वो कब चीन की जनता की तरह मुफ्त का भंडारा नहीं सचमुच का रोजगार मांगने लगे कहा नहीं जा सकता .जनता को जगाने के लिए कांग्रेस के राहुल गांधी कदमताल तो कर ही रहे हैं । 

    चीन से छलनी लगाकर आने वाली खबरें डरावनी तो हैं लेकिन उत्साहित भी करतीं हैं कि जनता तानाशाही के खिलाफ खड़ा होना सीख रही है। चीन ने इस पार्टी कांग्रेस से ठीक पहले बीजिंग को एक किले में बदल दिया है। शी जिनपिंग चीन के संस्‍थापक माओ के बाद दूसरे ऐसे नेता हैं जिन्‍हें तीसरी बार राष्‍ट्रपति बनाया जा रहा है। चीन का दावा है कि उसने 14 लाख अपराधियों को गिरफ्तार  किया है। इसके अलावा अल्‍पसंख्‍यकों के खिलाफ जासूसी को बहुत बढ़ा दिया गया है। फाइनेंशियल टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक बीजिंग आने वाले हर व्‍यक्ति की व्‍यापक जांच की जा रही है। चीन ने किसी भी विरोध की स्थिति से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर अतिरिक्‍त सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है। 

    भारत में भी दो साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनना है। वे देश के एक जबरदस्त या जबरदस्ती के लोकप्रिय नेता हैं ,लेकिन उनके खिलाफ भी सही की तरह उनकी अपनी पार्टी और आम जनता में असंतोष पनप रहा है। मोदी जी जिस तरह से प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को अपने कारकेट के पीछे दौड़ाते हैं या अपने कार्यक्रमों में अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों को ' बिड़ार ' देते हैं उससे जाहिर है कि  वे शी जिनपिंग से कम नहीं हैं। हाल ही में उज्जैन में लोगों ने प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादत्य सिंधिया समेत अनेक केंद्रीय मंत्रियों की फजीहत नंगी आँखों से देखी। 

    चीन में यदि कुछ होता है तो उसका आसपास की राजनीति पर असर पड़ता है या नहीं,ये हम जैसे आम लेखक नहीं बता सकते ,ये काम विदेशनीति के जानकार ही कर सकते हैं, लेकिन हम जैसे लोग ये जरूर बता सकते हैं कि  भारत में भी हालात चीन से कम खराब नहीं हैं .यहां भी जनता में असंतोष लगातार पनप रहा है लेकिन उसे फिलहाल भक्तिरस में डुबो दिया गया है। सरकार भूख,गरीबी ,मंहगाई ,बेरोजगारी पर ध्यान देने के बजाय मंदिरों को जगमग करने में लगी है। जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा मंदिरों को चमकाने और उन्हें पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने पर खर्च किया जा रहा है। जनता का एक बड़ा वर्ग सरकार की इन कोशिशों से यदि असंतुष्ट है तो एक बड़ा वर्ग अभिभूत भी है। 

    भारत में जनता विरोध करना भूल गयी है,या उसे भुला दिया गया है,लेकिन इसी के चलते आसमान से जमीन पर आयी कांग्रेस ने सड़क पर उतर कर जनता के मन से डर समाप्त करने की जो मुहिम शुरू की है वो मुमकिन है कि  आने वाले दिनों में विकराल रूप धारण कर ले। भारत में जनता का आंदोलित होना लोकतंत्र के लिए बहुत आवश्यक है .जनता के लगातार मौन ने देश में तानाशही प्रवृत्ति को बहुत मजबूत कर दिया है। हमारा नेतृत्व ' अहम  ब्रम्हास्मि ' की मुद्रा में है .उसे आसपास कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा। अभिभूत नेतृत्व को किराए की भीड़ अपने इर्दगिर्द देखकर ये भरम हो रहा है कि  देश में उसके बराबर कोई बचा ही नहीं है। 

    पिछले कुछ महीने में दुनिया के तमाम छोटे-बड़े देशों में तानाशही मनोवृत्ति के खिलाफ जनता का गुस्सा आपने देखा ही होगा.भगवत कृपा से अभी भारत इस गुस्से से बचा हुआ है ,लेकिन जिस तरह से देश में नफरत की अंधी चल रही है,जिस तरीके से देश को एक ख़ास धार्मिक रंग में रंगने  की कोशिश की जा रही है ,उसे देखकर लगता है कि आने वाले दिन बहुत सुखद नहीं हैं। देश की जनता ने जिस सरकार को अपने पहरेदारी के लिए चुना है उसे पूजाघरों की सजावट के लिए नहीं बल्कि देश को सजाने-सँवारने के लिए चुना है। लोकतंत्र की रक्षा केलिए फिलहाल देश में वोट ही एकमात्र ' रामायुध ' है ,इसका इस्तेमाल सही तरीके से होता रहे तो मुमकिन है कि  देश में चीन की तरह के हालात न बनें ,अन्यथा राम ही राखे। 

    भारत और चीन की आजादी लगभग एक ही उम्र की है ,लेकिन चीन ने राजनीति का अलग बाना पहना और भारत ने अलग. दोनों ही देशों के नेता अपने-अपने तरीके से अपने अपने-अपने देश को ताकतवर बनाने में लगे हैं। किसे कितनी कामयाबी मिली है ये दुनिया से छिपा नहीं है। दुनिया से जो छिपा है वो भी धीरे-धीरे बाहर आ रहा है .लाख पहरों के बावजूद उसे छिपाया नहीं जा सकता। क्योंकि पहरा धरती पर लगाया जा सकता है आसमानों पर नहीं .इसलिए सावधान रहिये ,अपनी जिम्मेदारियों को समझदारी से निभाते रहिये। 

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