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    स्वागतम प्रधान जी ,स्वागतम ।

    राकेश अचल का लेख। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11  अक्टूबर को उज्जैन आ रहे हैं. उनके स्वागत के लिए महाकाल की नगरी उज्जयनी को दुल्हन की तरह सजना-संवरना चाहिए ,सुना है ऐसा हुआ भी है। प्रधान जी यहां करोड़ों की लागत से बने महाकाल लोक का लोकार्पण करेंगे .गनीमत है कि हमारी सरकार ने मंत्रिमंडल की बैठक की तरह ये काम खुद महाकाल से नहीं कराया। हालांकि कराना चाहिए, महाकाल लोक का लोकार्पण करने  का पहला हक उन्हीं का बनता है। सबसे अच्छी बात ये है कि इस अवसर पर उज्जैन ही नहीं बल्कि प्रदेश भर के मंदिरों में भंडारे के अलावा भजन, कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान होंगे। 

    पहली बार जनता द्वारा न चुने जाने पर भी भाजपा की मौजूदा सरकार जनता की सरकार की तरह जनता के लिए ये सब कर रही है ताकि इहलोक में रहकर भी जनता महाकाल लोक के दर्शन कर अपना लोक,परलोक सम्हाल सकती है। एक लोकतान्त्रिक सरकार की इससे अच्छी दूसरी भूमिका क्या हो सकती है ? हमारे सूबे की सरकार ने देश में सबसे पहले महाकाल को मंत्रिमंडल की बैठक करने का मौक़ा दिया ,इसलिए आजकल महाकाल गदगद हैं। महाकाल लोक देखकर और उसका उद्घाटन करने का अवसर पाकर कलियुग के अवतार प्रधानमंत्री जी भी गदगद होंगे ही। 

    प्रधानमंत्री जी को 2024  का महाभारत  जीतने के लिए महाकाल की कृपा की जरूरत है भी, वे बाबा विश्वनाथ के सेवक और गंगा के पुत्र तो पहले से हैं ही इसलिए इन दोनों का आशीर्वाद तो उनके पास पहले से है ही, अब महाकाल का आशीर्वाद भी मिल जाएगा तो ये तिगुना हो जाएगा। इससे प्रधानमंत्री जी और उनकी भाजपा को 2019  में हारी लोकसभा की 144  सीटें जीतने में आसानी होगी ,ये महाभारत जीतने के लिए मोदी जी ने कमर कस ली है,कहते हैं कि वे इन सीटों को जीतने के लिए 40  मेगा रैलियां करेंगे .बाक़ी की 104  सीटें जीतने का जिम्मा शाह और नड्ढा साहब की जोड़ी का है। 

    देश का सौभाग्य है कि उसे प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी जैसा मेहनती नेता मिला है ,अन्यथा उनसे पहले के नेता तो बिना मेहनत के ही 400 से ज्यादा सीटें न जाने कैसे जीत लेते थे। जबकि उनके पास न महाकाल की कृपा थी और न बाबा विश्वनाथ की। गंगा माँ की तो थी ही नहीं। मोदी जी का मुकाबला करने के लिए उनके प्रतिद्वंदी बजाय पूजा-रचा करने के बेकार में सड़कें नाप रहें हैं। अरे सड़कें नापने से भी भला कोई चुनाव जीतता है? यदि ऐसा होता तो आप यकीन मानिये कि मोदी-शाह की जोड़ी अब तक दस-बीस पद यात्राएं कर आयोजित कर चुकी होती। 

    बहरहाल हम मध्यप्रदेश के लोग मोदी जी का उज्जैन  आगमन पर हार्दिक स्वागत करते हैं। उनके लिए पलक-पांवड़े बिछाना दो छोटी बात है। हमारी पूरी सरकार उनके स्वागत के लिए बिछी हुई है। स्वागत में बिछना वैसे पहले कांग्रेसियों को ही आता था ,लेकिन अब इस मामले में भाजपा देश में सबसे आगे है। स्वागत करने से मन खुश रहता है .जब मन खुश होता है तो सब कुछ अच्छा होता है .यदि मोदी जी खुश होते हैं तो मध्यप्रदेश की किस्मत खुल सकती है। वैसे भी मध्यप्रदेश की किस्मत खुलने की बहुत जरूरत है क्योंकि मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार जनादेश की नहीं बल्कि अपहृत सरकार है। 

    मध्यप्रदेश पर यदि प्रधानमंत्री जी की कृपा हो जाए तो मुमकिन है कि प्रदेश कि जनता भी भाजपा पर कृपा कर दे और आगामी विधानसभा में भाजपा को जनादेश की सरकार बनाने का मौक़ा मिल जाये,अन्यथा मौजूदा हालत अच्छे नहीं हैं,हालाँकि यहां कोई भी पदयात्रा पर नहीं है. कांग्रस के कमलनाथ महाकाल लोक की आधारशिला रखकर ही खुश हैं और मानकर चल रहे हैं कि महाकाल का आशीर्वाद उनको भी मिलेगा .कमलनाथ ने मध्यप्रदेश के लिए पार्टी के अध्यक्ष पद के चुनाव में भी कोई रूचि नहीं ली,अन्यथा वे कांग्रेस के यशस्वी अध्यक्ष हो सकते थे .

    उज्जैन में मोदी जी का स्वागत करने का अलग ही मजा है। ये मजा सरकार के साथ उज्जैन के लोगों को भी मिलने वाला है। उज्जैन के लोग विकास नहीं केवल महाकाल की कृपा चाहते हैं। बहुत से नौकरशाह ऐसे हैं जो महाकाल की कृपा पाने के लिए बजाय इंदौर ,भोपाल के उज्जैन में ही बस गए। महाकाल की कृपा से अब शिवराज और महाराज का विवाद भी अपने आप समाप्त हो जाएगा .मौजूदा परिस्थिति में भाजपा को ही नहीं अपितु सभी को महाकाल और मोदी की कृपा की जरूरत है। 

    कभी-कभी मुझे लगता है कि कांग्रेस को भी रेस में बने रहने के लिए भाजपा की तरह हारी हुई लोकसभा की सैकड़ों सीटों के लिए मेगाप्लान बनाना चाहिए,महाकाल के दर्शन करना चाहिए। सियासत में प्लानिंग और दर्शनों का बड़ा महत्व है .जो इसे समझता है वो पार पा लेता है और जो नहीं समझता उसकी नाव डूब जाती है .भाजपा के पास बाबा विश्वनाथ और महाकाल दोनों हैं ऐसे में कांग्रेस चाहे तो नेपाल जाकर पशुपतिनाथ को मना सकती है .क्योंकि देश में तो अब बाबा बैजनाथ के अलावा कोई और ठिकाना बचा नहीं है। 

    तो चलिए मै भी अपने आपको महाकाल की साधना और महाकाल के भक्तों के स्वागत की तैयारियों में जुटता हूँ .अतिथियों का स्वागत करना हमारी सनातन परम्परा है। हमारी सनातनी सरकार है,जनता सनातनी है इसलिए परम्पराएं भी सनातनी ही होंगी। इस पर यदि किसी को आपत्ति है तो बेकार है। ऐसी तमाम आपत्तियों को खारिज किया जाता है .आपत्ति करने वाले लोग पद यात्रा में शामिल होकर देश जोड़ने का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। 

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