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    अयोध्या। तीन दिवसीय क्षेत्रीय वैदिक सम्मेलन का हुआ भव्य उद्घाटन समारोह।

    अयोध्या। सभी धर्मों का मूल वेद है। वेद विज्ञान है ,वेद ही धर्म है।  वेद में भारत की  आत्मा समाहित है ऐसा श्रद्धेय अशोक सिंघल जी के कथनों को उजागर करते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने वेद की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज भारत सरकार ने भी वेदशिक्षा को औपचारिक रूप से मान्यता प्रदान कर दी है जब तक संसार के घर घर में वेद नहीं पहुंच जाता तब तक एक शुचिता से पूर्ण और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण समाज का निर्माण असंभव है हम सभी को अपने नैतिक दायित्व के नाते आवश्यकता है कि वेद मंत्रों की वैज्ञानिकता और मंत्रों के स्वर विज्ञान को भारत समेत समस्त संसार में प्रचारित प्रसारित करें। 

    क्योंकि वैदिक पद्धति से ही हमारा समाज शुचिता पूर्ण होगा हमें वैदिक मंत्रों की बिक्री नहीं करनी चाहिए बल्कि स्वाध्याय के माध्यम से नित्य वेद मंत्रों का पारायणण करना चाहिए क्योंकि वेद मंत्रों में देवताओं का वास होता है और यदि हम नित्य वैदिक मंत्रों का स्वाध्याय करेंगे तो वेद हमारे रक्त अस्थि मज्जा तक विद्ममान होकर हमारा साक्षात्कार उस देवता से करा देगा। वेद में ही विज्ञान है जिसके रहस्य को समझ कर हम समाज को वैदिक सभ्यता को पुनर्जीवित करके उपहार दे सकते हैं ।

    वेद  के प्रचार प्रसार के लिए प्रतिबद्ध भारत सरकार की शीघ्र संस्था महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान उज्जैन एवं वशिष्ट विद्या समिति अयोध्या के संयुक्त तत्वावधान में क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसके  उद्घाटन सत्र का  आज शुभारंभ हुआ। मंच संचालनकर्ता भारत संस्कृत परिषद के अध्यक्ष श्री राधा कृष्ण  मनोरी जी ने किया। तत्पश्चात हम सभी को अतिथि महानुभावों का मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त हुआ। वेदों के प्रचार प्रसार के लिए राष्ट्र की शीर्ष संस्था  महर्षि सांदीपनी राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान के उपाध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार मिश्र जी ने प्राचीन काल से आधुनिक काल तक वेद  के माध्यम से कैसे भारत जगत का सिरमौर रहा पर प्रकाश डाला, साथ ही जो हमारा वातावरण विषाक्त हो गया जिसको केवल वेद पारायण से ही समाप्त किया जा सकता है वेद सर्वजनीन हैं।  इसलिए आज आवश्यकता है कि हम वैदिक पद्धति को संरक्षित  संवर्धित करें।

    वैदिक विश्वविद्यालय तिरुपति के पूर्व कुलपति प्रोफेसर सुदर्शन शर्मा ने कहा कि अशोक सिंघल जी के सपनों को साकार करने के लिए अशोक सिंघल वैदिक विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है जिस विद्यालय में वेद मंत्रों के रहस्य को समझ कर आधुनिक विज्ञान और तकनीकी का विकास किया जाएगा जिससे समाज को वैज्ञानिकता का भान होगा ।

    मणिराम छावनी के पूज्य महाराज श्री कमलनयन दास  जी ने वेदों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि शीघ्र ही वैदिक भारत की संकल्पना के अनुरूप राष्ट्र का निर्माण और इतिहास का संकलन होगा सारे धर्म का मूल , आधुनिक तकनीकी  , विज्ञान सब वेदों में समाहित है। आज आवश्यकता मात्र इतनी हैं कि हम समाज में इसको प्रचारित करें ।

    क्षेत्रीय वैदिक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र्  कार्यक्रम में अशोक तिवारी ( केंद्रीय मंत्री विश्व हिंदू परिषद), हरिशंकर सिंह जी (वेद विद्यालय प्रमुख ),वेदमूर्ति चंद्र भानु शर्मा जी ,वेदमूर्ति सत्यम् जी ,महर्षि वशिष्ठ विद्या समिति के मंत्री एवं लोकतंत्र सेनानी राधेश्याम मिश्र जी  जी , महर्षि वसिष्ठ विद्या समिति के सचिव प्रो. विक्रमा प्रसाद पांडेय जी , हनुमत् प्रसाद नौटियाल , डा. अरूणव कुमार मिश्र, रामरूप शर्मा जी , तो तिवारी मंदिर के महंत गिरीश पति तिवारी जी , अम्बरीश उपाध्याय जी ,  लीलाराम गौतम जी के साथ-साथ समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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