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    सम्भल। कश्मीर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राशिद अज़ीज़ सम्मानित, मुशायरे का आयोजन किया गया।

     ....... आपको भी तो मोहब्बत का भरम रखना था"

    उवैस दानिश\सम्भल। उपनगरी सरायतरीन में अल-अमीन एजुकेशनल एंड वेलफ़ेयर सोसाइटी के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में कश्मीर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राशिद अज़ीज़ की साहित्यिक क्षेत्र में दिए गए योगदान हेतु सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में ताहिर सलामी ने प्रोफेसर राशिद अज़ीज़  की साहित्यिक सेवाओ पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने कश्मीर के केंद्रीय विश्विद्यालय में प्रोफेसर के पद पर रहते हुए साहित्य की अद्वितीय सेवा की और सम्भल का नाम रोशन किया। 

    इस अवसर पर प्रोफेसर राशिद अज़ीज़ के सम्मान में मुशायरे का आयोजन किया गया जिसमें मकामी शायरों ने कलाम पेश कर दाद बटोरी। मुशायरे की शुरुआत तनवीर अशरफी ने नाते पाक से की। बाद में ग़ज़ल के दौर का आरम्भ करते हुए शाह आलम रौनक़ ने कहा- बेवफा आपकी नज़रो में चलो हम ही सही,आपको भी तो मोहब्बत का भरम रखना था। इंतेखाब सम्भली ने कहा-इंतेखाब मां की दुआओं में सफर में मेरी,मेरे दुश्मन की भी ताकत का गला घोंट दिया। कामिल मुरादाबादी ने कहा- रहबरी आप जब मेरी करने लगे,मेरे हालात यूं ही संवरने लगे।कौसर सम्भली ने कहा-मैं हंसी दूसरों पे लुटाता रहा,मेरे होंठों की किसने हंसी छीन ली। तनवीर अशरफी ने कहा- यह तेरी मांग में वीरानियाँ सी क्योंकर हैं,फलक पे खैर तो है कहकशां सलामत है।डॉ मुनव्वर ताबिश ने कहा- अखलाक की दौलत से कभी दूर न होना,कोनैन भी मिल जाये तो मगरूर न होना। मीर शाह हुसैन आरिफ़ ने कहा- छू के निकलें न गम की हवाएं तुम्हे,मेरी मिट्टी भी देगी दुआएँ तुम्हे। शफीक़ बरकाती ने कहा- मोहब्बत से अगर सरशार है दिल,तो फिर यह सहन में दीवार क्या है। राज़ अंजुम ने कहा- ग़मज़दा हो गया जो सामने मंजर आये,काफिला लूटने रहज़न नही रहबर आये।वरिष्ठ शायर डॉ कैफ़ी सम्भली ने कहा- अभी से आदत रखो तिशनगी की,यज़ीदों की बस्ती में जाना पड़ेगा। तौफीक आज़ाद ने कहा-मेरी उंगली में कांटा चुभ गया है,मैं कलियों की जवानी लिख रहा था। सैय्यद हुसैन अफसर सम्भली ने कहा- हर एक अमल का तुम्हारे जवाब है लेकिन, में क्या करूँ के मेरी आँख में मुरव्वत है। मुशायरे की अध्यक्षता कर रहे है सुल्तान मोहम्मद खां कलीम ने कहा- मैंने उसके गम कलेजे से लगाकर रख लिए,इश्क़ में जीने का यह कुछ तो असर हो जाएगा। देर रात तक चले मुशायरे में शारिक जीलानी, ताहिर सलामी,फहीम साकिब,नाज़ुक सम्भली,मोहम्मद दानिश,कादिर सम्भली,आदि शामिल रहे। मुशायरे की अध्यक्षता बुजुर्ग शायर मोहम्मद सुल्तान खां कलीम एवं संचालन मीर शाह हुसैन आरिफ तथा शफीक़ बरकाती ने संयुक्त रूप से किया। अंत मे मुशायरे के आयोजक शारिक जीलानी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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