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    अयोध्या धाम। यज्ञ अनुष्ठान ही वैदिक सनातन धर्म के विस्तार का मूल-जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी वल्लभाचार्य

    ........ 108 कुंडीय श्रीराममंत्र महायज्ञ का संत सम्मेलन के साथ हुआ भव्य समापन

    अयोध्या धाम। श्रीराम हर्षण मैथिल सख्यपीठ धर्मार्थ सेवा ट्रस्ट चारूशिला मंदिर जानकीघाट में श्रीमद जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी वल्लभाचार्य महाराज संयोजन में चल रहे 108 कुंडीय श्रीराममंत्र महायज्ञ का भव्य समापन हुआ। 5 अक्टूबर से कलश यात्रा के साथ प्रारंभ हुए इस महायज्ञ में 501 विद्वानों ने 13 करोड़ षड़ाक्षर श्री राम मंत्र का निरंतर जप किया।  जगतगुरु रामानन्दाचार्य वल्लभाचार्य महाराज ने कहा कि यज्ञ अनुष्ठान और भगवत चर्चा ही वैदिक सनातन धर्म के विस्तार का मूल आधार है। सभी को निरंतर देश विदेश में भ्रमण करते हुए। विविध आयोजनों को करते रहना चाहिए जिससे आम जनमानस का लगाव सनातन धर्म के तरफ बढ़ेगा जिससे निश्चित ही सनातन धर्म का विस्तार होगा।

    इसके साथ ही 108 कुंडों में वैदिक विद्वानों और यज्ञ के यजमानों ने हवन किया। इस नौ दिवसीय श्री राम मंत्र महायज्ञ में 800 कुंटल हवन सामग्री का प्रयोग किया गया। 9 दिनों में कुल 1 करोड़ 30 लाख आहुतियां डाली गयी। साथ ही साथ वृंदावन धाम से पधारे जगद्गुरू द्वाराचार्य मलूकपीठाधीश्वर डॉ. राजेंद्रदेवाचार्य के श्रीमुख से श्रीरामकथा की अमृत वर्षा हुई। वृंदावन की प्रसिद्ध चैतन्य महाप्रभु लीला का आनंद भक्तों ने लियाl सनातन धर्म के प्रचार प्रसार के लिए 11, 12 और 13 अक्टूबर को विशाल संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें अयोध्या ही नहीं बल्कि देश के कोने-कोने से महान विद्वानों ने अपने व्याख्यान से देश विदेश से आए हुए भक्तों श्रद्धालुओं को आनंदित कराया।

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