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    हाथरस। करवाचौथ का व्रत रखकर सुहागिनों ने पति के लिए मांगी लंबी उम्र।

    नीरज चक्रपाणि

    हाथरस। शहरों के अलावा देहातों में भी करवा चैथ का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। महिलाओं ने पूरे दिन निर्जला रहकर पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए पूजा अर्चना कर व्रत पूरा किया। गुरूवार की शाम व्रत पूरा होने से पूर्व  शाम को घरों में अपनी बुजुर्ग महिालओं द्वारा करवाचैथ की कथा सुनकर उन्होंने विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की। मिट्टी के बने करवा को सुहागिनों द्वारा बदला गया। 


    उसी करवे के पानी से रात को चांद निकलने पर अर्घ्य दिया फिर व्रत खोला। करवा चैथ व्रत की पौराणिक कथा के अनुसार जब सत्यवान की आत्मा को लेने के लिए यमराज आए तो पतिव्रता सावित्री ने उनसे अपने पति सत्यवान के प्राणों की भीख मांगी और अपने सुहाग को न ले जाने के लिए निवेदन किया। यमराज के न मानने पर सावित्री ने अन्न-जल को त्याग दिया। वो अपने पति के शरीर के पास विलाप करने लगीं। पतिव्रता स्त्री के इस विलाप से यमराज विचलित हो गए, उन्होंने सावित्री से कहा कि अपने पति सत्यवान के जीवन के अतिरिक्त कोई और वर मांग लो। सावित्री ने यमराज से कहा कि आप मुझे कई संतानों की मां बनने का वर दें, जिसे यमराज ने हां कह दिया। पतिव्रता स्त्री होने के नाते सत्यवान के अतिरिक्त किसी अन्य पुरुष के बारे में सोचना भी सावित्री के लिए संभव नहीं था। अंत में अपने वचन में बंधने के कारण एक पतिव्रता स्त्री के सुहाग को यमराज लेकर नहीं जा सके और सत्यवान के जीवन को सावित्री को सौंप दिया। कहा जाता है कि तब से स्त्रियां अन्न-जल का त्यागकर अपने पति की दीर्घायु की कामना करते हुए करवाचैथ का व्रत रखती हैं।

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