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    शाहजहांपुर। माता सीता का पता लगाने हनुमान पहुंचे लंका, मेघनाथ ने हनुमान को बांधा ब्रहमफांस मे।

    ........... हनुमानजी ने रावण की सोने की लंका का किया दहन, दर्शकों ने कलाकारों के अच्छे मंचन के लिए किया उत्साहवर्धन

    फै़याज़ उद्दीन\शाहजहांपुर। आज का मंचन प्रतिदिन के मंचन की तरह माता सरस्वती की वंदना से आरंभ हुआ मंचन ऑडनेंस ड्रामेटिक क्लब के कलाकारों द्वारा किया जा रहा है। आज के मंचन में दर्शाया गया। श्रीराम माता सीता का पता लगाने के लिए हनुमान को लंका भेजते हैं। लंका में पहुंचते ही हनुमान का सामना लंकिनी से होता है। वह रावण की लंका की पहरेदारी करती है और हनुमान को लंका में प्रवेश करने से रोकती है। हनुमान जी क्रोधित होकर उस पर लात से वार करते हैं और उसे सुरलोक पहुंचा कर उसका उद्धार करते हैं लंका में प्रवेश करते ही हनुमान जी माता सीता की खोज कर रहे होते हैं तभी हनुमान जी को श्री राम नाम का स्वर सुनाई देता है। 

    हनुमान जी आश्चर्यचकित रह जाते हैं और इधर-उधर देखने लगते हैं देखते हैं रावण का छोटा भाई विभीषण राम नाम का जाप कर रहे होते हैं हनुमान जी विभीषण जी से भेंट करते हैं और एक दूसरे को अपना परिचय देते हैं विभीषण जी बताते हैं माता सीता को रावण ने अशोक वाटिका में रखा है हनुमान जी अशोक वाटिका जाते हैं और माता सीता को ढूंढते हैं हनुमान जी को माता सीता नजर आती हैं  वह एक पेड़ के नीचे वैठी हैं और प्रभु श्री राम को याद कर रही हैं इतने में ही रावण आ जाता है और माता सीता को डराने की कोशिश करता है वह माता सीता को एक माह का समय देता है और उनसे अपने आप को अपनाने के लिए कहता है कहता है अगर मुझे नहीं अपनाया तो मैं तुम्हारा वध कर दूंगा और यह कहकर वहां से चला जाता है रावण की दासी त्रिजटा माता सीता की निगरानी करती है वह माता सीता को अपनी पुत्री समान मानते हैं और माता सीता को धीरज धरने को कहती हैं माता सीता को अकेला देखकर हनुमान जी माता सीता के सामने आकर अपना परिचय देते हैं तथा प्रभु श्रीराम द्वारा दी गई सोने की मुद्रिका माता सीता को देते हैं माता सीता प्रसन्न होकर हनुमान को पुत्र का वरदान देते हैं कि हनुमान आज से तो मेरे पुत्र के समान हो हनुमान जी को भूख लगती है वह माता से आज्ञा लेकर वाटिका में लगे फल खाने का आग्रह करते हैं माता सीता उनको आज्ञा देते हैं वे फल खाने लगते हैं इतने में रावण के दूत वहां आकर उनको मना करता हैं और उन पर क्रोध करता हैं इतने में हनुमान जी दूतों के मना करने पर रावण की सारी वाटिका उजाड़ देते हैं यह सब देखकर रावण का पुत्र अक्षय कुमार आता है और हनुमान जी से युद्ध करता है हनुमान जी उसका वध कर देते हैं हनुमान को रोकने रावण का पुत्र मेघनाथ आता है और अपनी शक्ति के द्वारा हनुमान जी को ब्रह्म फास में बांधकर रावण के सामने लाता है हनुमान जी रावण को समझाते हैं कि वह माता सीता को सम्मान सहित वापस करते हैं इससे क्रोधित होकर रावण रावण हनुमान जी को मारने को कहते हैं लेकिन विभीषण को समझाते हैं दूत को मारना न्याय संगत नहीं है इसलिए वह हनुमान की पूंछ में आग लगा देता है हनुमान उसी से रावण की सोने की लंका में आग लगा देते हैं और रावण की लंका को खाक कर देते हैं। आज के मंचन में रानी मिश्रा, मोहित, अरशद आजाद, सुभाष, कौशलेंद्र पांडे, अंकित सक्सेना, विनय आदि कलाकार शामिल रहे। आज के मंचन को सफल बनाने में सत्यनारायण जुगनू, निर्देशक अंकित सक्सेना, पैट्रिक दास, टीम कंट्रोलर अरुण डी.आर, मंचन मीडिया प्रभारी रोहित सक्सेना बीएसए, मंच संचालक सतीश सक्सेना, राजीव सिंह आदि लोगों का सहयोग रहा।

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