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    सीतापुर। विशाल भण्डारों के साथ शारदीय नवरात्रि उत्सव का हुआ समापन, हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद।

    ........... कहीं खीर पूड़ी, कहीं पर सब्जी पूड़ी तो कहीं पर छोला पूड़ी के साथ कढ़ी चावल व खीर का महाप्रसाद का आयोजित हुआ भण्डारा। 

    शरद कपूर/सीतापुर। शारदीय नवरात्रि  की धूम पूरे जनपद में भक्तिमय वातावरण में पूरे हर्षोल्लास के साथ रही लगातार 7 दिनों तक भक्तों व श्रद्धालुओं ने माता रानी का गुणगान किया एवं स्थान स्थान पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से योगेश्वर कन्हैया की लीलाओं का वर्णन सुन  पुण्यलाभ अर्जित किया।

    भक्तों को प्रसाद देते महंत बजरंग मुनि महाराज एवं समाजसेवी बब्लू गुप्ता

    संपूर्ण जिले में कहीं पर नवरात्र की नवमी पर तो किसी देव स्थान पर नवरात्रि की दशमी वाले दिन विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। प्रातः कन्या भोज के साथ ही भंडारे का आयोजन शुरू हो गया जो कि अर्धरात्रि तक निरंतर जारी रहा जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया। जिले के खैराबाद कस्बे में स्थित जगत जननी मां गौरी देवी के प्राचीन मंदिर के प्रांगण में नवरात्रि की नवमी को विशाल भंडारे का आयोजन गत वर्षो की भांति इस शारदीय नवरात्र में भी कमेटी अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार मिश्रा उर्फ बच्चन महाराज के नेतृत्व में आयोजित किया गया। यहां पर रहता 10:00 बजे कन्या भोज के साथ ही भंडारे का प्रसाद वितरण शुरू हो गया जो कि अर्धरात्रि के बाद तक निरंतर जारी रहा इस स्थान पर लगभग 15000 श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया। मां गौरी देवी मंदिर कमेटी के सदस्य आलोक बाजपाई, बबलू मिश्रा, जयसवाल बंधु, मयंक बाजपेई, सोनू महेंद्र, विनीत अवस्थी, सहित सैकड़ों माता रानी के भक्तों का सराहनीय योगदान रहा।

    भण्डारें में प्रसाद ग्रहण करते श्रद्धालु

    जिले के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल भुइंयाताली तीर्थ  स्थित अष्ट भुजा धारी मां पूर्वी देवी के मंदिर प्रांगण में दशहरे वाले दिन महर्षि लक्ष्मण दास उदासीन आश्रम कमाल सरायं के महंत बजरंग मुनि दास के नेतृत्व में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें देर रात तक हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। यहां पर सर्वप्रथम महंत बजरंग मुनि दास ने स्वयं कन्या पूजन कर कन्या भोज कराया एवं उसके पश्चात भंडारा का प्रसाद वितरण शुरू हो गया जो की देर रात्रि तक निरंतर जारी रहा हालांकि इस वर्ष वर्षा के कारण कुछ असुविधा उत्पन्न हुई लेकिन तत्काल ही महंत बजरंग मुनि दास ने स्थान परिवर्तित कर वहां पर भंडारे का सफल आयोजन किया।

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