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    अयोध्या\भरतकुंड। सुरक्षा बंधनों से मुक्त लोकोत्सव बन गया है भरतकुंड महोत्सव।

    •  सारेगामापा लिटिल चैंप्स अंशिका सिंह के सुरों से सजेगी सांस्कृतिक संध्या...
    • गरबा के साथ दुरदुरिया पूजन के लिए ग्यारह हजार महिलाओं का होगा संगम...
    • दशरथ महल अयोध्या से भरत की तपोभूमि नंदीग्राम तक निकलेगी चरण पादुका यात्रा...

    ओम प्रकाश सिंह

    अयोध्या\भरतकुंड। रामनवमी, सावन झूला, परिक्रमा, दीपोत्सव, रामायण मेला जैसे धार्मिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों से रामनगरी साल भर गुलजार रहने लगी है। रामायणकालीन स्थलों पर भी राम अनुयायी वर्षों से उत्सव मना रहे हैं। अयोध्या के सबसे लोकप्रिय सम्राट महात्मा भरत की भूमि नंदीग्राम उत्सवों के लिए सज रही है। राजधानी से बाहर संत की तरह रहकर राज्य संचालन करने वाले महराज की जन सुलभता का उत्सव भी जन भागीदारी से हो रहा है। जहां भरत ने श्रीराम की पादुकाएं रखकर 14 वर्ष तक राज काज चलाया, अयोध्यावासी उसी स्थान पर पादुकाएं लाकर त्याग व तप का उत्सव मनाएंगे। श्रीराम की पादुकाएं अयोध्या के दशरथ महल से लाकर त्रेता की स्मृतियों जीवंत की जाएंगीं। यह महोत्सव सात दिनों तक चलेगा, जिसमें विभिन्न सांस्कृतिक आयोजन होंगे। भरत जी महाराज की पावन तपोस्थली नंदीग्राम में आयोजित होने वाला चौबीसवां भरतकुंड महोत्सव एक नवंबर  से सात नवंबर 2022 को आयोजित हो रहा है। 


    दो दशक पूर्व तक भरतकुंड नंदीग्राम की पहचान पितृपक्ष में पिंडदान के लिए थी, इसे छोटा गया भी कहते हैं। यहां पर होने वाले भरतकुंड महोत्सव ने अब इसकी पहचान बदल दी है।महात्मा भरत ने यहां पर प्रभु श्री राम का 14 वर्ष तक इंतजार किया था और उनकी खड़ाऊं को पूजकर अयोध्या का शासन। राम प्रभु श्री राम ने वनवास से लौटने के बाद पिता दशरथ का श्राद्ध यहींं किया था । तेइस वर्ष पूर्व क्षेत्र के एक युवा अंजनी कुमार पांडे ने अंबरीश पांडेय, मंहत राजेंद्र दास व सहयोगियों के साथ भरतकुंड महोत्सव की शुरुआत की थी जो आज बड़े स्वरूप में परिलक्षित है। उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन विभाग ने भी इसे अनुदानित किया है। धीरे-धीरे लोग जुड़ते गए और कारवां बनता गया।

    भूमि पूजन कार्यक्रम संपन्न हो चुका है। केंद्र व प्रदेश सरकार के सांस्कृतिक विभागों ने भी इस महोत्सव में विभिन्न कार्यक्रमों के लिए कलाकारों को चयनित कर लिया है। लोक महोत्सव बन चुके इस आयोजन पर अयोध्या से भाजपा सांसद लल्लू सिंह की विशेप निगरानी है। महोत्सव आयोजकों को हर संभव सहायता के लिए सांसद वचनबद्ध हो चुके हैं।  मंडलायुक्त अयोध्या ने भी महोत्सव स्थल का निरीक्षण कर अधिकारियों को दिशा निर्देश दिया है। भरतकुंड महोत्सव की व्यापकता में दीपोत्सव जनक, डाक्टर राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित का सराहनीय योगदान है।

    इस महोत्सव मे ग्यारह हजार मातृ शक्तियों द्वारा दुरदुरिया पूजन किया जाएगा। सारेगामापा लिटिल चैंप्स अंशिका सिंह के सुरों से सांस्कृतिक संध्या सजेगी। गिरिजा देवी की शिष्या ममता शर्मा का भजन झूमने पर मजबूर कर देगा। महोत्सव का एक प्रमुख आयोजन चरण पादुका यात्रा भी है जो अयोध्या के दशरथ महल से एक नवंबर को नंदीग्राम लाई जाएगी। यह चरण पादुका अगले वर्ष यहां से राम राज्याभिषेक के अवसर पर अयोध्या जाएगी।

    विशाल मेले का स्वरूप ले चुके इस महोत्सव में झूला प्रदर्शनी, महिला और पुरुष वर्ग का विशाल दंगल, कबड्डी प्रतियोगिता, विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम, आल्हा, कवि सम्मेलन, कॉमेडी शो, गरबा रास, भरत सरोवर परिक्रमा कलश यात्रा एवं महाआरती, सामूहिक हनुमान चालीसा तथा प्रतिदिन  रामलीला, रासलीला, मयूर नृत्य, फरवाही नृत्य, फूलों की होली, वृंदावन की लठमार होली आदि मनोरंजक कार्यक्रमों का आयोजन होना है। 

    भरतकुंड महोत्सव न्यास के अध्यक्ष अंजनी पांडेय के साथ पदाधिकारी और सदस्य इसकी तैयारियों में जुट गए हैं। सूचना मंत्रालय भारत सरकार से दस कार्यक्रम, संस्कृति विभाग से चार कार्यक्रम, उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र से चार कार्यक्रम, अयोध्या शोध संस्थान से तीन कार्यक्रम, उत्तर प्रदेश संस्कृति मंत्रालय से तीन कार्यक्रम आयोजित किए जाएगें। पर्यटन विभाग से अन्य कार्यक्रमों के लिए  सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

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