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    सम्भल। विजयदशमी पर किया गया विजय तीर्थ का पूजन।

    उवैस दानिश\सम्भल। हिंदू जागृति मंच के सदस्यों ने विजय तीर्थ पर विधि-विधान पूर्वक पूजा अर्चना की गई। ईश्वर से फल प्राप्ति की कामना करते हुए प्रसाद वितरण किया गया।

    सम्भल एक ऐतिहासिक और पौराणिक नगरी है, इसे कल्कि नगरी के नाम से भी जाना जाता है। यह पृथ्वीराज चौहान की राजधानी भी रह चुका है। यह अपने अंदर हजारों इतिहास समेटे हुए हैं। सम्भल के 68 तीर्थ और 19 कूपो में विजय तीर्थ का अपना अलग ही महत्व है। यहां पूजन और दर्शन करने से व्यक्ति के शत्रु का सर्वनाश होता है। असत्य पर सत्य की जीत यानी विजयदशमी के मौके पर हिंदू जागृति मंच के सदस्य चंदौसी रोड स्थित विजय तीर्थ पर पहुंचे जहां पहुंचकर उन्होंने वहां पर विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना करते हुए सामूहिक रुप से दीप, रोली, कलावा, चावल और मिष्ठान के साथ मंत्र उच्चारण कर विजय तीर्थ का पूजन कर फल प्राप्ति की कामना की। इसके बाद प्रसाद वितरण किया गया। अजय कुमार शर्मा ने बताया कि श्रीलंका में रावण वध के उपरांत ब्राह्मण हत्या जैसे घोर पाप से बचने के लिए श्रीराम ने लंका में ही स्थित विजय तीर्थ में स्नान किया ताकि उनके द्वारा हुए पाप से मुक्ति मिल सके। उसी तीर्थ के जल, मिट्टी और वनस्पति से सम्भल के विजय तीर्थ का निर्माण हुआ। सम्भल स्थित विजय तीर्थ के दर्शन व पूजन करने से वही फल प्राप्त होता है, जो श्रीलंका विजय तीर्थ में प्राप्त होता है।

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