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    सीतापुर। अल्लाह के रसूल से मोहब्बत करना और जन मानस से मोहब्बत करके ही हम कामियाबी हासिल कर सकते हैं नमाज़ की पाबन्दी पहली शर्त है:-फुरक़ान मियां सज्जादानशीन

    शरद कपूर /सीतापुर। इस्लाम धर्म के प्रवर्तक हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जन्मदिन के अवसर पर पूरे खैराबाद में जगह जगह महफिले मीलाद तो कहीं जलसा सीरतुन्नबी का आयोजन किया गया जिसमें धर्म गुरुओं ने अपने आक़ा व मौला की ज़िन्दगी से जुड़े उन तमाम पहलुओं पर बयान किया जिससे इंसान के अंदर इंसानियत पैदा हो सके और अपने आचरण को अच्छा बना सके।बारह वफात की पूर्व संध्या पर दरगाह हाफ़िज़िया में आयोजित महफिले मीलाद को सम्बोधित करते हुए हाजी सैय्यद फुरक़ान मियां ने कहा कि हम ऐसे रहनुमा के मानने वाले है जिन्होंने सदैव अमन व इंसानियत का संदेश दिया और अपने आचरण को सही करके समाज के सामने पेश करने की शिक्षा दी आपने कभी किसी को परेशान करने या किसी से किसी तरह का बदला लेने,और चाहे जितनी कठिन परिस्थितिया हो पर कभी गलत और झूठ का सहारा लेने को मना किया सदैव सच्चाई पर चलने और उसी पर ज़िन्दगी गुज़ारने का पैग़ाम दिया।

    इसी क्रम में दरगाह हाफ़िज़िया असलमिया में बारहवफात के अवसर पर महफिले मीलाद का आयोजन किया गया जिसका शुभारम्भ तिलावत क़ुरआन पाक से क़ारी इस्लाम अहमद आरफ़ी ने किया किया  तत्पश्चात मौलाना फहीम मिस्बाही ने उपस्थिति जनसमुदाय को सम्बोधित करते हुए कहा कि सरकार दो आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ज़ात बाबरकत से हमे ये शिक्षा मिलती है कि हमेशा दूसरों के साथ अच्छा बर्ताव करें और नमाज़ की पाबन्दी के साथ साथ औलिया अल्लाह व औलादे रसूल से सच्ची मोहब्बत करें अपने माँ बाप की इज़्ज़त और उनका आदर सत्कार करें तथा अपने बूढ़े माँ बाप की भरपूर सेवा करें ,साथ ही ये भी कहा कि याद रखिये की यदि आप बड़ी पाबन्दी से नमाज़ पढ़ते हैं रोज़ा रखते हों और अपने माँ बाप की सेवा न करते हों उनका खयाल न रखते हों तो जान लीजिए कि आप पूरी तरह घाटे में हैं आप के काम कुछ भी आने वाला नही ।इसके बाद फुरक़ान मियां ने अपने सम्बोधन में  कहा कि आज बड़ा अहमियत वाला दिन है आज हम सबको ये प्रतिज्ञा लेनी होगी कि आज से हम अपने तमाम खराब कामो को बंद करेंगे और सिर्फ अल्लाह और उसके रसूल की खुशी के लिए काम करेंगे औलिया अल्लाह से मोहब्बत करेंगे अपने पड़ोसियों से अपने मुल्क से सच्ची मोहब्बत करेंगे।इसके बाद गुफरान एवं उनके साथियो तथा सज्जादानशीन के सुपुत्र सैय्यद फ़रमान मियां ने सलाम पढ़ा और उसके बाद फुरक़ान मियां ने बाल मुबारक शरीफ की जनमानस को ज़ियारत करवाई।

    इसी क्रम में खैराबाद इमाम ईदगाह बब्बन मियां ने अपने मकान पर बाल मुबारक शरीफ की ज़ियारत कराई  और सम्बोधित करते हुए कहा कि हमे अपने ब्यवहार और अपने आचरण को अच्छा बनाना होगा क्योंकि इसके बिना मनुष्य का जीवन बेकार है।इससे पूर्व संध्या पर ही छोटे मखदूम साहब की दरगाह में मदनीं मियां ने तथा मदरसा शाहीरूल उलूम में हाफिज शारिक ने महफिले मीलाद का आयोजन किया। दरगाह अस्लामियाँ में ज़ियारत के समय मौजूद सज्जादानशीन में नजमुल हसन शोएब मियां,सैय्यद मदनीं मियां,सैय्यद लईक मियां,एजाज़ हसन खान, में सैय्यद इरफ़ान वहीद हाशमी, सैय्यद फरजान मियां,सैय्यद सलमी मियां,फरहान मियां,फ़रमान मियां चिश्ती,हमज़ा सिद्दीकी,सलीम खान,सैय्यद दानिश अली, क़ारी इस्लाम आरफी,डॉ ज़फ़र याब बेग इमरान सिद्दीकी, अवसाफ अहमद,फहद फ़ारूक़ी, सादी फ़ारूक़ी, इस्लाम अस्लमी,पप्पू,गुड्डू, अंसार मियां,शब्बन इमरान,अक़ील खान, ,अनीस अहमद,शकील,दानियाल, हाफिज आकिब, हाफिज नदीम, सय्यद अंसार काज़मी,आमिर रिज़वी,सैय्यद रेहान रिज़वी, सैय्यद इश्तियाक अली वारसी,सिराजुल हसन,मेराजुल हसन,टीटू खान आदि उपस्थित रहे।

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