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    सम्भल। मुलायम सिंह के निधन पर राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं।

    उवैस दानिश\सम्भल। समाजवाद के जनक कहे जाने वाले वह दलित पिछड़ों की आवाज बुलंद करने वाले धरतीपुत्र स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के निधन को लेकर राजनीतिक दलों के नेताओं ने सतभावनाये दी, तो वही उनसे पूछे गए सवालों के जवाब आपको लेकर उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव एक जमीनी नेता थे। वह हर कार्यकर्ता को नाम से जानते थे। वही अखिलेश यादव मुलायम सिंह यादव की विरासत को लेकर पूछे गए सवाल को नेताओं ने कहा कि अखिलेश यादव मुलायम सिंह यादव की विरासत को आगे नहीं ले जा सकते है। उन्होंने पहले से ही अपने चाचा शिवपाल यादव को पार्टी से अलग किया है तो वही घर में भी एकता नहीं है।

    भाजपा नेता परीक्षित कुमार मोंगिया ने कहा कि मुलायम सिंह एक लोकतंत्र के बहुत बड़े रक्षक थे। जब देश में आपातकाल लगा तो मुलायम सिंह सबसे पहले जेल गए, आपातकाल में डेढ़ साल जेल में रहे लोगों को मुलायम सिंह ने ही लोकतंत्र सेनानी घोषित किया। 2006 में सबको लखनऊ बुलाकर उनका सम्मान किया। हमारी पहचान बनवाने के साथ ही हमारी पेंशन भी बनवाई। जितना काम हमारा मुलायम सिंह ने किया किसी ने नहीं किया। हमारे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने भी कहा है कि सच्चे लोकतंत्र रक्षक मुलायम सिंह यादव थे। शहर कांग्रेस जिलाध्यक्ष तौकीर अहमद ने कहा कि मुलायम सिंह कुछ और चाहते थे अखिलेश यादव कुछ ओर करते थे। जब मुलायम सिंह पार्टी के संरक्षक थे और जिंदा थे जब भी मुलायम सिंह की बात को कोई नहीं मानता था। अगर मुलायम सिंह की बात चलती तो पार्टी बिखरती ही नहीं पार्टी जो बिखरी है तब दिख रही है जब मुलायम सिंह का पार्टी से हस्तक्षेप खत्म हो गया। अखिलेश यादव अपनी मनमानी करने लगे थे उन्होंने अपने वोट कोई संरक्षित नहीं रखा मुलायम सिंह यादव एक अच्छे राजनेता थे उन्होंने अपने मुस्लिम वोट बैंक ध्रुवीकरण नहीं होने दिया। मुस्लिम की बात, समस्याओं को सुना। हमेशा अपने सभी कार्यकर्ताओं को अपने परिवार की तरह माना, लेकिन मुलायम सिंह के हटने के बाद अखिलेश यादव ने अपने परिवार और मूल वोट बैंक को बिखेर दिया। वह अपने मेन कार्यकर्ताओं की बात ही सुनने नहीं आते है। जब पार्टी का नेता पार्टी के कार्यकर्ताओं की सुनना बंद कर देता है, तो उस पार्टी का पतन निश्चित है। समाजवादी पार्टी का पतन शुरू हो चुका है और आगामी चुनाव में समाजवादी पार्टी बैकफुट पर रहेगी। पार्टी कार्यकर्ता अपने आपको पार्टी में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। एआईएमआईएम जिलाध्यक्ष असद अब्दुल्ला ने कहा कि अखिलेश यादव मुलायम सिंह की विरासत को नहीं संभाल पाएंगे। मुलायम सिंह यादव ने एटा से साइकिल से राजनीतिक सफर तय किया था और वह प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे। चौथी बार उन्होंने अपनी विरासत अखिलेश यादव को दे दी। अखिलेश यादव को अंदाजा नहीं है कि मुलायम सिंह यादव ने किस मुश्किल से ये सफर तय किया था। अखिलेश यादव इस विरासत को नहीं संभाल पाएंगे क्योंकि अखिलेश यादव के परिवार में ही देखी आज चाचा शिवपाल अलग है दूसरे भाइयों की बीबियां अलग-थलग है। पार्टी में भी गुटबाजी नजर आती है। सपा नेता डॉ. राशीक अनवर ने कहा कि मुलायम सिंह यादव के निधन की क्षतिपूर्ति करना असंभव है। नेताजी हमेशा किसानों के लिए लड़े क्योंकि वह किसान थे। जितने काम अल्पसंख्यकों के लिए नेताजी ने किए इतने किसी नेता ने नहीं किये। उन्होंने नई इबारत लिखी चाहे लाइन आर्डर हो, उन पर कई इल्ज़ाम भी लगे। उनको मुल्ला मुलायम भी कहा गया। वह धर्म और जाति के आधार पर किसी में भेदभाव नहीं रखते थे। मुझे नहीं लगता कि समाजवादी विचारधारा का मुलायम सिंह यादव की तरह कोई दूसरा नेता हो सकता है।समाजसेवी सय्यद असलम ने कहा कि मुलायम सिंह का कार्यकाल बहुत अच्छा रहा उनके जाने से देश भक्त देश को बहुत बड़ा नुकसान है। मुलायम सिंह एक जमीनी नेता बहुत मेहनत करने वाले थे। वह आठ बार विधायक, सात बार सांसद, तीन बार मुख्यमंत्री, एक बार एमएलसी व एक बार रक्षा मंत्री रहे। उनका सियासी सफर बहुत अच्छा था उनमें एक खूबी थी। वह अपने कार्यकर्ताओं को जोड़कर चलते थे, कार्यकर्ताओं को नाम से बुलाया करते थे, कार्यकर्ता उनसे बहुत खुश रहते थे।

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