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    मऊ। सकुशल संपन्न हुआ मऊ का ऐतिहासिक भरत मिलाप।

    .......... भगवान का विमान चला मस्जिद का चौखट चूम के, चारों भाइयों का मिलन होते देख दर्शकों की आंखें हो गई नम

    मऊ। एक ओर जहां पूरे विश्व में हिन्दू मुस्लिम एकता की वकालत हो रही है, वहीं लगभग एक हजार वर्षों का इतिहास लपेटे मऊ, जनपद अपने दंगो की वजह से मशहूर रहा। उसी में एक अनोखी परम्परा का निर्वहन यहां के निवासियों द्वारा किया जाता है। इसी श्रृंखला में ऐतिहासिक भरत मिलाप आपसी सौहार्द के बीच शुक्रवार को सकुशल सम्पन्न हो गया। सूर्य के उदय के साथ प्रभु भगवान श्रीराम का विमान जैसे ही शाही मस्जिद कटरा मऊ के मुख्य द्वार पर पहुँचा, वहाँ पहले की तरह मस्जिद के सामने मंच पर विधिवत मौजूद श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव व जय श्रीराम के नारे लगाना शुरू कर दिया। यहां अयोध्या का मंचन होना था। प्रभु श्रीराम अयोध्या में श्री हनुमान जी को भेजते हैं। वह भागते हुए अयोध्या पहुँचते है और भरत से इस बात की जानकारी देते है। यह सुनते ही भरत खुशी से झूम उठते है। इसके बाद भरत प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण व सीता जी के आगमन की तैयारी में जुट जाते है। अयोध्या पहुँचते ही चारो भाई गले से लिपट जाते है। चारों भाइयों का मिलन होते ही वहां पर मौजूद दर्शकों की आंखे नम हो जाती हैं।

    भरत और भगवान राम का मिलन की झांकी

    गौरतलब है की मुगलकाल में जहांआरा के समय से शुरू हुआ मऊ का ऐतिहासिक भरत मिलाप गंगा-जमुनी तहजीब की एक खूबसूरत मिसाल है। मऊ की यह परंपरा देख लोग दांतो तले अंगुली दबा लेते है। प्रत्येक वर्ष मऊ नगर के शाही कटरा के मैदान में भरत मिलाप का आयोजन किया जाता है। बीती रात राम, लक्ष्मण, सीता का विमान जैसे ही शाही कटरा के मैदान में पहुचता है वैसे ही हर-हर महादेव व जय श्रीराम के नारों से मऊ नगर गूंज उठता है। उसके बाद श्रीराम के पुष्पक विमान को शाही कटरा मस्जिद के चैनल गेट से तीन बार स्पर्श  कराया गया। विमान के आगे लोग नारदीय गीत गाते हुए आगे चल रहे थे। जैसे ही सुबह मस्जिद से अजान की सदा बुलंद हुई और इधर हर-हर महादेव और जय श्रीराम का नारा दर्शकों ने लगाना शुरु कर दिया। राम और रहीम दोनों को एक साथ पुकारने की जो परंपरा मऊ में बनी है वह शांति और सौहार्द्र का अनुपम उदाहरण है। यही उदाहरण मऊ के लोगों को हमेशा शांति देने का काम करती है। श्री रामलीला कमेटी मऊ के संरक्षक भरत लाल राही ने बताया की यह ऐतिहासिक भरत मिलाप है यहां पर जब तक अजान और और हर हर महादेव के स्वरो का मिलन न हो भरत मिलाप पूरा नहीं होता। 

    मस्जिद के गेट पर विमान स्पर्श कराते लोग

    स्पष्ट है कि सांकेतिक राम-रहीम के मिलन होने के बाद ही भरत मिलाप की प्रक्रिया सम्पन्न करायी जाती है। जानकारों के अनुसार यहां पर भरत मिलाप पहले होता था, लेकिन इस तरह से अद्भुत मिलन की सोच को जहांआरा बेगम ने शुरु कराया था ज्ञात हो कि मऊ जिले को औरंगजेब ने अपनी बहन जहां आरा को सौगात में दिया था। बताया जाता है कि स्वयं बनवाई हुई शाही मस्जिद कटरा के मैदान में जहांआरा बेगम खुद बैठकर भरत मिलाप की इस नयनाभिराम झांकी का लुत्फ उठातीं थी। इसकी सराहना भी करतीं। बताते चलें की बीच में यहां दंगा हुआ पर उससे भी इस गंगा-जमुनी तहजीब वाले भरत मिलाप पर असर नहीं पड़ा। सबकुछ ठीक हो गया। भरत मिलाप देखने के लिये लोगो ने बधाईयाँ दी साथ ही कहा कि इस भरत मिलाप की जो परम्परा है और मऊ की गंगा जमुनी तहजीब है, सहयोग और समन्यव की संस्कृति है वह बेमिसाल  है। हालांकि दूसरा पहलू यह भी है कि यह कार्य संपन्न कराने में प्रशासन के हाथ पांव फूल जाते हैं। भरत मिलाप को सकुशल संपन्न कराने के लिए यहां भारी संख्या में आरएएफ व पुलिस बल की तैनाती की जाती है, जिसका पूरा दारोमदार जिले के शासन प्रशासन का होता है।

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