Header Ads

  • INA BREAKING NEWS

    हरदोई। डाक्टर का गलत बर्ताव, जिला अस्पताल पहुंची एसडीएम सदर को नहीं दी गई कुर्सी, ज़हर खाने वाली किशोरी के वहां लेने पहुंची थी बयान।

     विजयलक्ष्मी सिंह  

    खबर उत्तर प्रदेश के हरदोई मेडिकल कॉलेज की है। लापरवाही और अपनी गैर-ज़िम्मेदाराना हरकतों के लिए हर बार सुर्खियों में रहने वाले मेडिकल कालेज में एक और कारनामा  खड़ा हो गया। एसडीएम सदर स्वाति शुक्ला आत्महत्या की कोशिश करने वाली वहां भर्ती किशोरी के बयान दर्ज करने पहुंची, लेकिन वहां ड्यूटी पर तैनात डाक्टर ने उन्हें कुर्सी तक आफर करना भूल गये और डाक्टर कुर्सी पर डटे रहे। बस फिर क्या था, मैडम का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उनका कहना था कि जब उनके साथ ऐसा बर्ताव किया गया,तो वहां पहुंचने वाले दूसरे लोगों के साथ कैसा बर्ताव होता होगा ? इस पर उन्होंने सीएमओ से अपनी शिकायत दर्ज कराई और उन्हें माइनर्स सीखने की हिदायत दी।


    • डाक्टर को नहीं पता कौन-कौन से केस आए। 
    .ज़हर खाने वाली किशोरी के बयान दर्ज करने जिला अस्पताल पहुंची एसडीएम सदर स्वाति शुक्ला और सीओ हरियावां शिल्पा कुमारी ने जब ईएमओ डा. चन्द्रकांत से किशोरी के बारे में पूछा,तो उन्हें कुछ भी पता नहीं था। इतना ही नहीं उनकी ड्यूटी के दौरान कौन-कौन से केस आए ? ईएमओ को इस बारे में भी कुछ नहीं पता था। एसडीएम सदर और सीओ हरियावां के सामने मुंह लटकाए खड़े रहे।
    • संगीन मामलों में बयान दर्ज कराया जाना ज़रूरी नहीं
    इस तरह के बर्ताव से नाराज़ हुई एसडीएम सदर ने तुरंत ही सीएमओ को फोन कर के अपनी शिकायत दर्ज कराई और उनसे कहा कि अपने डाक्टरों को माइनर्स सिखाएं। इसके अलावा वहां और भी तमाम खामियां नज़र आई। वहां देखा गया कि आने वाले संगीन मामलों में बयान दर्ज कराया जाना ज़रूरी नहीं समझा जाता है और जूनियर डाक्टर अपनी मालूमात के हिसाब से उसका इलाज कर ज़िम्मेदारी से बरी हो जाते हैं। इमरजेंसी वार्ड में क्या खेल हो रहा है। सीनियर डाक्टरों को इससे कोई मतलब नहीं रहता है। इसके अलावा इधर-उधर फैली पड़ी गंदगी और बद-इंतज़ामी दूर से ही दिखाई दे रही थी। मैडम के तेवरों को देख कर वहां सभी की घिग्घी बंध गई।
    • मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल ने उपजिलाधिकारी को ही मैनर्स सीखने की सलाह दे डाली। 

    मेडिकल कालेज की प्रिंसिपल डा.वाणी गुप्ता का कहना है कि एसडीएम सदर को कुर्सी नहीं दी गई,इसी वजह से नाराज़ हुई। उनका कहना है कि अगर ऐसा हुआ भी तो,तो कौन सा गुनाह हो गया। प्रिंसिपल ने उल्टे एसडीएम सदर को ही मैनर्स सीखने की सीख दे डाली और कहा कि इस तरह की बातें होती रहती हैं।

    अपमान का घूटं पीकर वह पीडित का बयान दर्ज कर वापस आ रही थी, इसी बीच एक पत्रकार ने उनसे अस्पताल आने की वजह पुछा तो अनौपचारिक रुप से उन्होंने ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक के व्यवहार को उनकी कु्र्सी के हिसाब से अव्यावहारिक बताते हुए जिले के आला अधिकारियों को अवगत कराने की बात कही। उत्तर प्रदेश में योगी राज है जहां सनातन धर्म और संस्कारों की बात होती है। अगर सामाजिक रिश्तो को छोड़ दें शास्त्रों की बात करें तो कहा जाता है कि जहां स्त्रियों का सम्मान नहीं होता है वहां देवता निवास नहीं करते हैं । और अच्छे कर्म भी निष्फल हो जाते हैं।
    • डाक्टर का अफसर के साथ ऐसा बर्ताव, क्या होता होगा मरीजो के साथ 

    पहले भी डॉक्टर के बारे में उनके दुर्व्यवहार की घटनाएं सुनने में आती रही है ,पर अब तो डाक्टर की बदसलूकी का शिकार खुद एसडीएम सदर, स्वाति शुक्ला ने जब मेडिकल कालेज का चिट्ठा खोला तो वहां के ज़िम्मेदारों को मिर्ची लगना लाज़िम था। एसडीएम ने गलती पकड़ ली, लेकिन इस मामले को कोई दूसरा मोड़ देने के लिए गुणा-भाग लगाया जाने लगा है। बताया जा रहा है कि इसे तूल देने के लिए पीएमएस तक को आगे किया जा सकता है। अब देखना ये है कि गलत को गलत कहने वाली उपजिलाधिकारी का इस प्रक्रिया पर क्या कार्यवाही करेंगी। 

    Post Top Ad


    Post Bottom Ad


    Blogger द्वारा संचालित.