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    मिश्रित\सीतापुर। प्रधान व सचिव द्वारा की जा रही मनमानियों और पक्षपात के विरोध में ग्रामीणों द्वारा गांव में किए गए आमरण अनशन।

    संदीप चौरसिया तहसील मिश्रिख की रिपोर्ट

    मिश्रित\सीतापुर। विकास क्षेत्र मिश्रित की ग्राम पंचायत कोहरावां के एक मजरा अरसेहड़ा सहित अन्य मजरो के विकास को लेकर प्रधान व सचिव द्वारा की जा रही मनमानियों और पक्षपात के विरोध में ग्रामीणों द्वारा गांव में किए गए आमरण अनशन।

    बताते चलें की ब्लाक से लेकर जनपद स्तर के अधिकारियों द्वारा दिए गए लिखित आश्वासन को एक वर्ष व्यतीत हो जाने के बाद भी मांगे अभी तक पूरी नहीं हुई है। जागरूक ग्रामीण सुरेश मिश्र ने अपने सहयोगियों के साथ पुनः उसी स्थल पर उसी तिथि से विकास की उन्ही मांगो को लेकर फिर से गांव के उसी स्थल पर आमरण अनशन करने का ऐलान कर दिया है। बताते चले कि भ्रष्टाचार के आकंठ में पूरी तरह डूबे मिश्रित ब्लाक की ग्राम पंचायत कोहरावां के एक मजरा अरसेहड़ा निवासी सुरेश मिश्र ने गांव के अपने अन्य सहयोगियों क्रमशः शशि देवी, राजबहादुर, पुनीत, राधेलाल, गिरजा शंकर आदि अन्य ग्रामीणों  के साथ बीते वर्ष 16 दिसंबर को गांव में ही स्थित विद्यालय के सामने पात्रों को आवास शौचालय सहित अन्य ग्रामीण विकास की मांगों में प्रधान और सचिव द्वारा की जा रही मनमानियों को लेकर भूख हड़ताल शुरू की थी जो 21 दिसंबर को आमरण अनशन में तब्दील हो गई थी। मामला मीडिया की सुर्खियों में आने से प्रशासन चेता था और ब्लॉक के तत्कालीन खंड विकास अधिकारी सहायक विकास अधिकारी पंचायत तहसील के उप जिलाधिकारी व जनपद के परियोजना निदेशक ने अनशन स्थल पर पहुंचकर सभी आंदोलनकारियों को 8 सूत्री मांगों पर 15 दिन के अंदर कार्य और कार्यवाही शुरु करवा देते का 8 विन्दुओं पर लिखित आश्वासन दिया था तब से अब तक लगभग 1 वर्ष का समय गुजर जाने के बावजूद भी जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा दिए गए आश्वासन के अनुरूप कोई कार्यवाही अमल में नहीं लाई गई है प्रदेश शासन का ग्रामीण विकास का सपना चकनाचूर होकर रह गया है  इसी बात से नाराज ग्रामीणों के सहयोग में गांव के ही जागरूक नागरिक सुरेश मिश्र ने फिर गांव के विकास को लेकर अनशन पर बैठने का ऐलान कर दिया है कि अगर आगामी 16 दिसंबर 2022 तक पिछले वर्ष अधिकारियों द्वारा दिए गए लिखित आश्वासन पूरे नहीं कराए गए तो पिछले वर्ष वाली तिथि 16 दिसंबर से ही इस वर्ष भी पुनः विकास की उन्हीं मांगों को लेकर ग्रामीणों द्वारा गांव में ही अनशन प्रारंभ कर दिया जाएगा और छेड़ा गया यह आंदोलन कब तक जारी रहेगा जब तक प्रशासन द्वारा दिया गया लिखित आश्वासन पूरा नहीं हो जाता। कहना गलत न होगा कि विकास का यह मामला मिश्रित ब्लॉक की ग्राम पंचायत कोहरावां का  अकेला नहीं है वल्कि ब्लॉक की सभी 71 ग्राम पंचायतों में धांधलीयों का यही आलम है अपात्र मौज छान रहे हैं और पात्र दर-दर भटकने को मजबूर हो रहे हैं वहीं प्रधान व सचिव तथा उनके मुंह लगे कथित प्रतिनिधि अपनी जेबें भरने में लगे हुए हैं अगर मिश्रित ब्लॉक की सभी ग्राम पंचायतों में निष्पक्षता से किसी उच्च स्तरीय एजेंसी द्वारा जांच करा ली जाए तो सारी कलई खुद ब खुद खुलकर सामने आ जाएगी वैसे जनपद में अकेला मिश्रित ब्लॉक ही नहीं बल्कि सभी ब्लाकों और उनकी ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों का यही आलम है इस स्थिति में कैसे साकार होगा प्रदेश सरकार का ग्रामीण विकास का सपना और कैसे पहुंचेगा पात्रों और आम जनों तक सरकारी योजनाओं का लाभ।


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