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    गोंडा। विलक्षण योग शिविर के समापन पर धारण किये अष्टांग योग- योगाचार्य धर्मेन्द्र प्रजापति

    गोंडा। जिले के स्वामीनाथ लॉन निकट नवीन गल्ला मंडी में हो रहे श्रीमद्भागवत कथा मंडल से योग शिविर के समापन पर सभी उपस्थित साधकों को योगाभ्यास कराकर महर्षि पतंजलि द्वारा दिए गए अष्टांग योग व स्वरोदय विज्ञान को विस्तृत रूप से योगाचार्य धर्मेन्द्र प्रजापति जी ने बताएं व उनके यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान व समाधि पर चलने को कहें। 

    यदि मनुष्य योग के इतने ही अष्ठांगिक अंगों को अपने जीवन में धारण कर ले तो हमारा जीवन कैवल्य मोक्ष के तरफ बढ़ सकता है और यदि इन आठ अंगों में से किसी एक अंग को हम छोड़ देते हैं तो जीवन को योग के तरफ नही बढा पाते। जिस प्रकार एक कुर्सी के चार पाँव, जिसमें से एक पाव हटा दिया जाए तो उस पर बैठना मुश्किल हो जाता है ठीक उसी प्रकार अष्टांग योग विधि है जिस पर चलकर जीवन को पुरुषार्थ के तरफ ले जाया जा सकता है।दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संचालक स्वामी अर्जुनानंद जी ने समापन पर सभी को स्वस्थ जीवन की कामना करते हुए कहे कि यह योग विद्या हम सभी को ग्रहण करना चाहिए तथा उस पर चलने का प्रयास करना चाहिए जिससे हमें सद्गति मिल सके।

    योग कार्यक्रम को सफल बनाने में विशिष्ट महानुभाव दुर्गेश जी, राम तेरस जी, नीरज जी,अनुपमा देवी,ज्योति जी, रानी जी,सिमरन जी व अन्य सभी का योगदान रहा।

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