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    सम्भल। भारत में भी बनना चाहिए अल्पसंख्यक पीएम - डॉ. बर्क

    उवैस दानिश\सम्भल। ब्रिटेन में अल्पसंख्यक भारतीय पीएम बनने पर सपा सांसद ने अपनी ख्वाहिश जाहिर करते हुए कहा कि हिंदुस्तान में भी काबिल अल्पसंख्यक पीएम बनना चाहिये साथ ही उन्होंने कहा कि दारुल उलूम देवबंद को किसी मान्यता की जरूरत नहीं है वह बहुत पुराना मदरसा है। उसे मान्यता प्राप्त मदरसों की हैसियत हासिल है।

    डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क, सपा सांसद सम्भल

    समाजवादी पार्टी के सांसद डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा कि ब्रिटेन में अल्पसंख्यक के पीएम बनने पर पी. चिदम्बरम के ट्वीट को लेकर सपा सांसद ने सही करार दिया है। ब्रिटेन में अच्छा काम हुआ है भारत में तो डेमोक्रेसी है डेमोक्रेसी के अंदर तो इससे ज्यादा आजादी है और हर आदमी को उसका हक दिया गया है। हर कौम, हर बिरादरी, हर मजहब के इंसान आगे बढ़ सकता है और अपनी जगह ले सकता है। हमारी ख्वाहिश है कि भारत के अंदर भी अल्पसंख्यक पीएम बने। ब्रिटेन ने जो फॉर्मूला इस्तेमाल किया है जिस बुनियाद पर भी किया है उसी तरीके से हिंदुस्तान के अंदर भी अल्पसंख्यक कोई काबिल तरीन पढ़ा लिखा आदमी हिंदुस्तान के अंदर जो मुल्क को चला सकता है उसे मौका मिलना चाहिये। मदरसों के हुए सर्वे में दारुल उलूम देवबंद गैर मान्यता प्राप्त होने पर कहा कि देवबंद से तो बहुत मदरसे जुड़े हुए हैं जो उन्होंने कायम किए हैं बहरहाल दारुल उलूम देवबंद एक बुनियादी मदरसा है जब इतनी पाबंदियां भी नहीं थे वह तभी से कायम है इस पर कोई कमी पहले भी दिखाई देती होती तो पहले भी यह सवाल उठना चाहिए था आप उसके अंदर यह कमी महसूस कर रहे हैं कि वह गैर मान्यता प्राप्त है अगर किसी के अंदर कमी है तो वह भी पूरी की जा सकती है लेकिन मैं समझता हूं कि दारुल उलूम देवबंद को मान्यता प्राप्त करने की जरूरत नहीं है जो इतने ज़माने से चल रहा है वह खुद-ब-खुद वह हैसियत हासिल है जो मान्यता प्राप्त को हासिल है।

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