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    सीतापुर। अंतिम दिवस श्रीकृष्ण-सुदामा मिलन एवं लीलाधर के धरा से बैकुंठ गमन की कथा सुन भावविभोर हो उठे भक्तगण।

    ............. धर्मों में सर्वश्रेष्ठ है सनातन धर्म तो वेदों में सर्वश्रेष्ठ है श्रीमदभगवद्गीता --- कथाव्यास उमापति मिश्र

    शरद कपूर\सीतापुर। जिले के अति प्राचीन कस्बा खैराबाद में महर्षि लक्ष्मण दास उदासीन कमाल सरायं संगत के महंत बाबा बजरंग मुनि महाराज के तत्वाधान में सुप्रसिद्ध तीर्थ स्थल भुइंयाताली क्षेत्र में जगत जननी शक्ति स्वरूपा मां पूर्वी देवी मंदिर के प्रांगण में चल रही शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिवस भुवनेश्वर नाथ धाम प्रतापगढ़ से पधारे विद्वान कथा व्यास महंत उमापति मिश्र ने भगवान श्रीकृष्ण एवं उनके परम सखा सुदामा के मिलन व भगवान के मृत्यु लोक से अपने धाम बैकुंठ धाम के गमन की कथा का रसास्वादन इतने मार्मिक शब्दों में कराया कि उपस्थित हजारों की संख्या में भक्तगण भाव विभोर हो उठे।

    कथाव्यास उमापति मिश्र

    इस सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा एवं महायज्ञ के दौरान मुख्य यजमान के रूप में सपत्नी बैठे शैलेंद्र गुप्ता-संध्या गुप्ता, राम नरेश राजपूत-सुनीता देवी, राम कुमार पाल-श्यामा कुमारी सहित उपस्थित अन्य भक्तों आंखों से बहती अश्रुधारा को स्पष्ट देखा जा सकता था, कथा वाचक उमा प्रति मिस्र के शब्द ही इतने मार्मिक थे कि लोग चाहते हुए भी अपनी आंखों से आंसू रोक ना सके। श्री कृष्ण सुदामा के मिलन का प्रसिद्ध गीत अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो कि दर पे तुम्हारे सुदामा....... के साथ ही भगवान का अपने तथा से मिलने के लिए नंगे पैर दौड़ना भक्तों को भाव विभोर कर गया। अपने मुखारविंद को विराम देते हुए कथा व्यास उमापति मिश्र ने अंत में इस पृथ्वी लोक से भगवान श्रीकृष्ण कृष्ण का बैकुंठ धाम को प्रस्थान की कथा को भी बड़े ही मार्मिक शब्दों में बखान किया। 

    आयोजक महंत बजरंग मुनि महाराज

    इस दौरान उन्होंने भगवान के तलवे में बहेलिया द्वारा तीर मारे जाने की कथा को सुनाते हुए यह भी बताया कि यह बहेलिया कोई और नहीं पूर्व जन्म का सुग्रीव का भाई बाली था, संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के दौरान हारमोनियम पर रमेश पांडे ढोलक पर रमाशंकर तिवारी कथा वाचक का बखूबी साथ दे रहे थे तो कीर्तनकार डीपी शुक्ला व मयंक शुक्ला अपने सुमधुर भक्तिमय  गीतों से श्रोताओं को थिरकने पर मजबूर कर दिया। कथा के अंत में लगभग आधे घंटे तक उपस्थित भक्तगण झूम झूम कर नाचने लगे।

    झूमते नाचते श्रद्धालु

    इस सात दिवसीय  कथा के दौरान मुख्य रूप से महर्षि लक्ष्मण दास उदासीन कमाल सरायं संगत के महंत बजरंग मुनि महाराज के अतिरिक्त बाबा मोहन दास, निरंकार गुप्ता, कुलदीप जयसवाल, शरद कपूर, रामू वर्मा, मनीष सिंह चौहान, धुरिया बाबा, नैमिष मिश्रा, सुमन कपूर, शुभ कपूर, अंश मिश्रा, नमित महेंद्र, सत्रोहन लोधी राजपूत, निर्मला देवी, शकुंतला देवी, आदि सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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