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    अयोध्या। बिहार के 6 मुस्लिमो ने सीएम योगी के मन्दिर में पूजाकर उतारी आरती।

    ........... सरकारी जमीन पर बने मन्दिर मामले को सुनियोजित ढंग से दबाने में जुटा तहसील प्रशासन

    अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में एक बार फिर सीएम योगी आदित्यनाथ के मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू होने की बात सामने आई है। जिले में रहने वाले भगवानदीन उर्फ प्रभाकर मौर्य ने सीएम योगी का मंदिर बनवाया था। प्रभाकर के सगे चाचा की शिकायत पर की मन्दिर उनकी और सरकारी जमीन पर बना है  जिला प्रशासन ने योगी की मूर्ति हटवा दी थी। मंदिर बनावाने के बाद चर्चा में आए प्रभाकर मौर्य अब अपने फार्म हाउस में त्रिपाल लगाकर योगी की तस्वीर लगाकर पूजा अर्चना कर रहे हैं।

    बिहार के अररिया जिले से 6 से अधिक मुसलमानों ने गुरुवार को प्रभाकर मौर्य के फार्म हाउस पर पहुंचकर सीएम योगी आदित्यनाथ की पूजा अर्चना की और विधिवत आरती भी की। अयोध्या टूर पर पहुंचे मुस्लिमों का नेतृत्व कर रहे साजिद इकबाल ने बताया कि जब उन्हें मालूम हुआ कि अयोध्या भरतकुंड के पास योगी का मंदिर बना है। तो उनसे रहा नहीं गया और वह वहां पहुंच गए। त्रिपाल के अंदर रखी योगी की तस्वीर पर साजिद इकबाल अपने साथियों के साथ पूजा अर्चना की और विधिवत आरती भी उतारी। साजिद इकबाल ने कहा कि ऐसे महाविद्वान, महाऋषि व महापुरुष की मंदिर की स्थापना अयोध्या में हुई है और उनके एक अच्छे भक्त ने की है। साजिद इकबाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लंबी आयु और बेहतर स्वास्थ्य के लिए अपने धार्मिक प्रेयर के अनुसार उनकी आरती उतार कर पूजा अर्चना की है। वहीं, मंदिर के संस्थापक प्रभाकर मौर्य ने कहा कि उनके खिलाफ साजिश की गई। रामनाथ मौर्य नाम के आदमी ने उन पर झूठा आरोप लगाया और जिला प्रशासन ने योगी की मूर्ति हटवा दी और अब वे अपने फार्म हाउस में योगी की तस्वीर लगा कर पूजा अर्चना कर रहे हैं।

    जबकि वही दूसरी ओर सोहावल तहसील के कल्याण भदरसा गांव में सरकारी भूमि पर बने योगी के मंदिर मामले को सोहावल तहसील प्रशासन ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। 13 दिन गुजरने के बाद भी तहसील प्रशासन द्वारा अभी तक भूमि से अवैध कब्जा हटाया नहीं जा सका है। इसके चलते तहसील प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं अभी तक योगी की मूर्ति का रहस्य भी बरकरार है। मीडिया में मामला चर्चा में आने पर एसडीएम के निर्देश पर पैमाइश के लिए पहुंचे कानूनगो कल्याण भदरसा दयाराम वर्मा ने प्रारंभिक पैमाइश में भूमि आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विभाग की पाई थी। उसी दिन मंदिर से योगी की मूर्ति भी गायब हो गई जो जिसका तबसे आज तक नहीं पता चला कि कहां है? शीघ्र पैमाइश पूरी कराने का दावा करने वाले तहसील प्रशासन ने सरकारी भूमि पर बने योगी के मंदिर मामले को दाखिल दफ्तर करना शुरू कर दिया।जबकि भूमि पर दावा जताने वाले, शिकायत कर्ता और मंदिर बनवाने वाले प्रभाकर मौर्य के पिता गांव में ही मौजूद रहते हैं।

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