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    बस्ती। पोस्ट मार्टम हाउस : यहां बेमतलब साबित हो रहे हैं खर्च किए गए 53 लाख रूपए।

    बस्ती। शहर में पुलिस लाइन के समीप लगभग 53 लाख रूपए खर्च कर भले ही अत्याधुनिक पोस्ट मार्टम हाउस का निर्माण करा दिया गया हो, लेकिन ये सारे रूपए यहां बेमतलब साबित हो रहे हैं। इस हाउस की ज्यादातर खिड़कियां व दरवाजे टूटे हुए हैं। लोगों को शुद्ध पेय जल के लिए भी तरसना पड़ता है, जिम्मेदार सिर्फ शासन से पत्राचार किए जाने का हवाला देकर अपना पीछा छुड़ा ले रहे हैं। 

    तत्कालीन डीएम एस मुथुशालिनी के प्रयास से बना था नया पीएम हाउस 

    लगभग 9 वर्ष पूर्व पुराने पोस्ट मार्टम हाउस की बदहाली देखते हुए, तत्कालीन डीएम एस मथुशालिनी ने प्रयास किया इसकी जगह पर अत्याधुनिक पोस्ट मार्टम हाउस बने, जो सफल भी रहा। शासन की ओर से नए अत्याधुनिक पोस्ट मार्टम हाउस के लिए 53 लाख रूपए की स्वीकृति दी गई। निर्माण कार्य के लिए कार्यदायी संस्था के रूप में यूपी प्रोजेक्ट्स कॉरपोरेशन लिमिटेड का चयन किया गया। कार्यदायी संस्था की ओर से दो मंजिला पोस्ट मार्टम हाउस बनाया गया, भूतल पर छोटे बड़े सात कमरे और प्रथम तल पर चार कमरे बनाए गए। भूतल पर शव रूम, डाक्टर रूम, पीएम रूम, केमिकल रूम, एक्स-रे रूम, बिसरा रूम बना, जबकि प्रथम तल पर सेमिनार रूम, रिकार्ड रूम, फोटोग्राफी, आफिस और मर्चरी अटेंडेंट रूम बनाया गया। इसके अलावा शव के साथ आने वाले परिजनों के लिए एक अलग रूम भी बना। शुरूआती दिनों में यह पोस्ट  मार्टम हाउस  अपने उद्देश्यों में सफल रहा, लेकिन मौजूदा समय में अब यह भी बदहाली पर आंशू बहा रहा है। 

    • मीटिंग हॉल में धूल फांक रही हैं कुर्सियां, पीने के लिए शुद्ध पानी तक नहीं 

    जिम्मेंदारों की उपेक्षा के चलते मौजूदा समय में यह पोस्ट मार्टम हाउस जीर्ण शीर्ण अवस्था में पहुंचता जा रहा है। मीटिंग हॉल में जहां एक तरफ कुर्सियां धूल फंक रहीं हैं, तो वहीं दूसरी तरफ यहां पीने के लिए शुद्ध पानी भी नहीं है। यहां सिर्फ बिजली के सहारे ही सारा काम किया जा रहा है, हैरानी इस बात की है कि यहां जनरेटर तक नहीं है। शवों का वजन करने के लिए लगा कांटा जंग खाकर खराब हो गया। इसके साथ ही यहां अन्य अव्यवस्थाएं फैली हुई हैं।

    •   प्राईवेट कर्मी डब्लू की सिसकियां भी यहां सुनने वाला कोई नहीं 

    - यहां मौजूद प्राइवेट कर्मी डब्लू से जब बात की गई, तो उन्होने बताया कि अग्रेजों के जमाने से उनके बाबा यह कार्य करते थे, उनके न रहने के बाद इस कार्य की जिम्मेदारी उनके पिता ने संभाली। जब उनका इंतकाल हो गया, तो उनके भाई ने यहीं पर यह कार्य शुरू कर दिया। बताते हैं कि भाई के इंतकाल हो जाने के बाद अब इस कार्य की जिम्मेदारी वर्ष 2018 से वे खुद संभाले हुए हैं। कहते हैं कि भाई के परिवार की भी जिम्मेदारी इन्हीं के कंधे पर, लेकिन इन्हें इस कार्य के लिए किसी भी तरह का पारिश्रमिक नहीं मिलता है। कहते हैं कि कुछ भले लोग मजबूरी व हालात देखते हुए कुछ पैसे की मदद कर देते हैं, जिसके सहारे उनका गुजर बसर चल रहा है। डब्लू बताते हैं कि उनकी सिसकियां सुनने वाला कोई नहीं है। कहते हैं कि कई बार उच्चाधिकारियों से गुहार लगाई गई, लेकिन सब शून्य रहा। 

    • आप भी सुनिए सीएमओ ने क्या कहा 

    पोस्ट मार्टम हाउस की बदहाली व प्राईवेट कर्मी डब्लू के बारे में जब सीएमओ डॉ आरके मिश्रा से बात की गई, तो उन्होने बताया कि स्थिति उनके संज्ञान में है। उच्चाधिकारियों को पत्र के माध्यम से अवगत करा दिया गया है, जहां तक रही बात प्राईवेट कर्मी डब्लू की तो पूरा प्रयास है कि उनकी जल्द यहां नियुक्ति करा दी जाए। इसके लिए भी उच्चाधिकारियों से वर्ता हुई है।

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