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    सम्भल। गांव में इन दिनों ब्राह्मणों का आना मना।

    उवैस दानिश\सम्भल। जिले के एक ऐसे गांव की अनोखी परंपरा सदियों से चली आ रही हैं। जहां गांव में ब्राह्मणों का आना सख्त मना है। जानिए इस पूरी रिपोर्ट में ब्राह्मणों को लेकर आखिरकार गांव वालों ने इन दोनों पाबंदी क्यों लगा दी है।

    सम्भल गुन्नौर कोतवाली क्षेत्र के भगतानगला गांव में कनागतों के दिनों गांव में अनोखी परंपरा देखी जाती है। जहां गांव वाले श्राद्ध के दिनों यानि 16 कनागतों मे ब्राह्मणों के गांव में आने पर पाबंदी लगा देते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। ग्रामीणों का मानना है इस परंपरा के लिए 100 वर्ष से ज्यादा समय बीत चुका है। इसी रीत रिवाज परंपराओं को मानते हुए ब्राह्मणों का आना कनागतों के दिनो में बिल्कुल मना रहता है। ग्रामीण ने बताया कि बहुत पुराने समय की बात है हमारे पड़ोसी गांव शाहजहांनाबाद से एक ब्राह्मणी ने कनागतों के दिनों गांव में दान तौर पर अनाज इकट्ठा करने आई थी। लेकिन उसे घनघोर बारिश के चलते गांव में ही रात को रुकना पड़ गया। जिसके बाद दूसरे दिन जैसे ही ब्राह्मणी महिला अपने गांव शाहजहांनाबाद अपने पति के पास पहुंची तो पति ने आरोपों की झड़ी लगा दी। ब्राह्मण पति कहने लगा कि जिस गांव में आपने रात गुजारी है। वही जाकर अपना बसेरा बना लो। ग्रामीणों की माने तो ब्राह्मणी महिला को ब्राह्मण पति ने खूब मारा पीटा और जिस गांव में भिक्षा या दान लेने पहुंची थी उसी गांव में मारते पीटते ब्राह्मण अपनी पत्नी को उसी गांव में छोड़ आया। जिसके उपरांत ब्राह्मण महिला की गांव भक्ता नगला में ही मौत हो गई। मौत होने से पहले ब्राह्मणी महिला ने ग्रामीणों से ब्राह्मणों के खिलाफ प्रार्थना करते हुए कहां था कि इस गांव में मेरी मानो तो ब्राह्मण इस गांव में दान लेने नहीं आए तो मेरी आत्माओं को भरपूर शांति मिलेगी। तभी से भक्ता नगला गांव निवासी इस परंपरा को मानते हुए श्राद्ध यानी कलाकारों के दोनों ब्राह्मणों पर गांव में देखने के लिए पाबंदी लगाए रखते हैं।

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