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    अयोध्या। दीपोत्सव के दिन दियों में अपनी रश्मियों को प्रज्वालित कर देता है सूर्य..

    अयोध्या। उधर रामजन्मभूमि स्थल पर सुर्ख पत्थरों से मंदिर साकार हो रहा है। सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक सूर्य की किरणों से यह पुण्य पत्थर और चटख हो उठते हैं। इधर राम की पैड़ी पर छोटी दीपावली के दिन दीपोत्सव देखने के लिए सूर्य अस्त होना ही नहीं चाहता। विधि का विधान टले ना सो ऐसा लगता है कि सूर्य अपनी रश्मियों को दीपों में प्रज्वलित कर देता है। तमाम मुश्किल चुनौतियों के बावजूद छठवां दीपोत्सव भी रिकार्ड बनाएगा। 

    बीती ताहि बिसार दे ये वो कहते हैं जो रियासत के लिए सियासत करते हैं लेकिन दीपोत्सव गवाह है उस शिल्पकार की सोच का जो अयोध्या में रोज़गार पैदा करना चाहता था और वो भी सरकारी रोजगार नहीं बल्कि ऐसा रोज़गार जो पर्यटन के अवसरों से पैदा हो। अयोध्या की पहचान मर्यादा पुरुषोत्तम राम से है, मंदिरों के इस शहर की गंगा जमुनी संस्कृति को सियासतदानों ने लहूलुहान कर दिया था। सन् 85 के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को छोड़कर विरोध करने वालों ने भी कभी भी रोज़गार की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया। किसी भी क्षेत्र का विकास नाली, खड़ंजा,लाइट से नहीं होता है। विकास की पहली शर्त है अवाम की आय बढ़े, ऐसे अवसर पैदा करने का प्रयास हों।

    डॉक्टर राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित जब कुलपति नहीं हुए थे, उसके पहले से उनके मन में यह संकल्प था कि अयोध्या को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाए और रोज़गार के अवसर पैदा हों। इसके लिए दुनिया भर के सैलानियों का ध्यान आकृष्ट करने के लिए आचार्य मनोज दीक्षित ने सरयू अवध बालक सेवा समिति के माध्यम से दीपोत्सव का ताना-बाना बुना। तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समक्ष प्रस्ताव गया तो उन्होंने हामी भर दिया , कारवाई होने के पहले अयोध्या के कुछ राजनीतिक लोगों को यह कार्य धार्मिक लगने लगा और मामला टल गया।

    हारिए न हिम्मत बिसारिए न राम के समर्थक आचार्य मनोज दीक्षित ने कोशिश जारी रखा। वर्ष 2017 में आचार्य के नेतृत्व में विश्वविद्यालय,यूथ हास्टल, स्वयंसेवी संस्थाओं के वालंटियर्स ने दीपोत्सव का जो कार्य किया उसने सियासतदानों के कान खड़े कर दिए थे, कोई विरोध में था तो कोई समर्थन में। सबका सपना था और है भी कि इस दीपोत्सव को बनारस की देव दीवाली की तरह मनाया जाए। अयोध्या का हर आमो खास इसमें शिरकत करे। सरकारी तामझाम से दूर "अयोध्या सरकार" के साथ जन का जुड़ाव हो।

    द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ, पंचम दीपोत्सव ने विश्व कीर्तिमान हासिल किया। सियासत करने वालों ने इस डसा भी लेकिन अवध विश्वविद्यालय के वालंटियर्स अयोध्या को पर्यटन की दृष्टि से विश्व पटल पर स्थापित करने और स्व रोज़गार के अवसर पैदा करने के लिए अपने ही बनाए रिकार्ड को तोड़ते रहे। छठवें दीपोत्सव के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चौदह लाख पचास हजार दीयों को जलाने का लक्ष्य दिया है। वालंटियर्स इस रिकॉर्ड को बनाने के लिए कार्यवाहक कुलपति प्रो अखिलेश कुमार सिंह व नोडल अधिकारी डाक्टर अजय प्रताप सिंह की अगुवाई में जुट गए हैं। इतना तो निश्चित है कि छठवाँ दीपोत्सव भी विश्व रिकॉर्ड बनाएगा लेकिन दर्द ये भी है कि आम जनमानस फिर दीप जलाने से दूर रहेगा।

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