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    श्रावस्ती। जिलाधिकारी पहुंची अपने गोद लिये आंगनवाड़ी केन्द पटना खास, पोषण माह का किया शुभारम्भ।

    सर्वजीत सिंह 

    • नवजात शिशुओं, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं एवं धात्री महिलाओं के स्वास्थ्य का बेहतर रूप से रखा जाए ध्यान-जिलाधिकारी
    • जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी ने गर्भवती महिलाओं कि किया गोद भराई और नवजात शिशुओं का कराया अन्न प्राशन
    श्रावस्ती। शासन के मंशानुसार आंगनबाडी केन्द्रों को गोद लेकर ‘‘आदर्श आंगनबाडी केन्द्र‘‘ के रूप में विकसित किये जाने हेतु लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसके माध्यम से कुपोषण की अधिकता वाले आंगनबाडी केन्द्रों को चिन्हित कर जनपद के माननीय जनप्रतिनिधिगणों सांसद/विधायक/अध्यक्ष, जिला पंचायत एवं जनपद स्तरीय अधिकारियों द्वारा आंगनबाडी केन्द्रों को गोद लेकर ‘‘आदर्श आंगनबाडी केन्द्र‘‘ के रूप में विकसित किये जाने के निर्देश के क्रम में विकास खण्डवार ग्राम पंचायतों में संचालित आंगनबाडी केन्द्रों को आदर्श आंगनबाडी केन्द्र‘‘ के रूप में विकसित किये जाने हेतु गांवों को गोद लिया गया है, इसके अलावा जिले के अधिकारियों द्वारा भी 79 ग्राम पंचायतों के आंगनवाड़ी केन्द्रों को गोद लिया गया है, जो अपने-अपने आंगनवाड़ी केन्द्रों पर जाकर निर्धारित बिन्दु के अनुसार सभी सुविधाएं मुहैया करायेंगे और विकास करके आदर्श आंगनवाड़ी केन्द्र बनायेंगे।

    इसी क्रम में जिलाधिकारी नेहा प्रकाश द्वारा आंगनवाड़ी केन्द्र पटना खास को गोद लिया है। शुक्रवार को जिलाधिकारी ने आंगनवाड़ी केन्द्र पटना खास पहूँचकर द्वीप प्रज्वलन कर एवं फीता काटकर पोषण माह का शुभारम्भ किया। इस दौरान उन्होने नन्हें-मुन्हें बच्चों को दुलारा और उनसे कविता भी सुनी। नवजात शिशुओं का खीर खिलाकर अन्न प्राशन कराया तथा गर्भवती महिलाओं की गोद भराई भी की। और अपने सामने बच्चों का वजन भी कराया। उन्होने कहा कि नवजात शिशुओं, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं एवं धात्री महिलाओं के स्वास्थ्य का बेहतर रूप से ध्यान रखा जाए। कुपोषण को लेकर सरकार द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे है। एक-एक परिवार का सर्वे कर सैम व मैम बच्चों को चिह्नित किया जा रहा है। जो भी ऐसे बच्चे चिकित्सीय जटिलता वाले मिल रहे हैं उनको पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कर अच्छा इलाज दें। उन्होने कहा कि पोषाहार का वितरण समय से कराएं और गुणवत्ता का विशेष ध्यान दिया जाए। 

    उन्होने कहा कि पोषण ट्रैकर, ई कवच ऐप पर फीडिंग कराएं। गर्भवती महिलाओं का अभियान चलाकर रजिस्ट्रेशन कराएं। कोई भी गर्भवती महिला एनीमिक न रहे। समय से जांच व दवाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। इसके अतिरिक्त 11 वर्ष से अधिक आयु की स्कूल न जाने वाली किशारी बालिकाओं को आयरन फॉलिक एसिड की एक, एक गोली प्रत्येक सोमवार को भोजन के बाद खिलाई जाए। आंगनबाड़ी केंद्रों पर 11 से 19 वर्ष की किशोरियों को भी साप्ताहिक आयरन फॉलिक एसिड की गोली खिलाई जाए। जिलाधिकारी ने एनआरसी में अतिकुपोषित बच्चों की समय से भर्ती कर उन्हें स्वस्थ बनाये जाने का निर्देश दिया है। उन्होने कहा कि पौष्टिक भोजन के अभाव में बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास नहीं हो पाता। इसके समाधान के लिए अति कुपोषित बच्चों को सप्लीमेंटरी फूड खिलाया जाए।  

    उन्होने कहा कि सुपोषण माह के अंतर्गत बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा सैम यानी अति कुपोषित और मैम यानी कुपोषित बच्चों का जो चिह्नीकरण किया जाए, उनके माता-पिता को बच्चे को स्वस्थ्य बनाने के लिए कौन-कौन से आहार देना है, इसके बारे में भी परामर्श दिया जाए। सैम श्रेणी में वह बच्चे शामिल हैं, जिन्हें चिकित्सीय इलाज की आवश्यकता है। उन्हें एन0आर0सी0 में भर्ती कराकर इलाज कराया जाए, ताकि वे स्वस्थ्य हो सके। जिलाधिकारी ने कहा कि सरकार नवजात शिशुओं/बच्चों/गर्भवती/धात्री महिलाओं को स्वस्थ्य रखने हेतु प्रतिबद्ध है, इसी उद्देश्य से आई0सी0डी0एस0 विभाग द्वारा तमाम योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। उन्होने कहा कि सम्बन्धित विभागीय अधिकारियों का दायित्व बनता है कि वे अपने-अपने गोद लिये आंगनवाड़ी केन्द्रों पर जाएं, और निरन्तर मानीटरिंग करके सरकार द्वारा प्रदत्त सभी सुविधाएं बच्चों एवं महिलाओं को उपलब्ध करायें। 

    उन्होने बताया कि पोषण माह के अन्तर्गत निम्न गतिविधियां की जायेंगी। जिसके अन्तर्गत महिला और स्वास्थ्य, बच्चा एवं शिक्षा पोषण भी पढ़ाई भी, लैंगिक संवेदनशीलता आधारित पेयजल संरक्षण एवं प्रबन्धन आदि। जनजातीय क्षेत्रों में महिलाओं एंव बच्चों हेतु परम्परागत खाद्य समूह का प्रोत्साहन किया जाना। उन्होने यह भी बताया कि इसके लिए पोषण पंचायत का गठन किया गया है। इसके द्वारा अति कुपोषित बच्चों का प्रबन्धन, गर्भवती महिलाएं में जो कुपोषित हुई है, उन्हें पोषण परामर्श देने व जानकारी करने आदि का कार्य किया जायेगा। इसके अतिरिक्त स्वस्थ बालक, बालिकाओं की प्रतियोगिता भी स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से की जाए। स्कूलों में पोषण मेले का आयोजन, निबन्ध प्रतियोगिता, खिलौनों के माध्यम से शिक्षा दी जाए। आंगनवाड़ी केन्द्र व सामुदायिक भूमि पर पोषण वाटिका को ग्राम विकास विभाग ,पंचायती राज विभाग एवं उद्यान विभाग द्वारा बढ़ावा दिया जाए। इसके अतिरिक्त जिन अभिभावकों की देखभाल से उनके बच्चों के स्वास्थ्य व वजन में सुधार किया जायेगा, उन बच्चों के अभिभावकों को पुरस्कृत भी किया जायेगा। 

    इसके अतिरिक्त जनपद के अन्य समस्त आंगनवाड़ी केन्द्रों पर गोद लिये अधिकारियों द्वारा पोषण माह मनाया गया। इस दौरान बच्चों को अन्न प्राशन भी कराया गया। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अनुभव सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा सिंह, खण्ड विकास अधिकारी हरिहरपुर रानी जय प्रकाश, सी0डी0पी0ओ0 अभिषेक मिश्रा, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि, सुपर वाइजर रीना पाण्डेय, ए0एन0एम0 श्वेता सिंह, आंगनवाड़ी कार्यक्रत्री उमा श्रीवास्तव सहित गर्भवती, धात्री, नवजात शिशुओं की माताएं एवं आंगनवाड़ी केन्द्र के नन्हें-मुन्हें बच्चे उपस्थित रहे।

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