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    गया\बिहार। गया में पिंडदान, कुल 55 स्थानों में से गया को श्राद्ध कर्म के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना गया है ।

    गया\बिहार। पूर्वजों  को सम्मान देना हमारी संस्कृति है,आश्विन मास के कृष्ण पक्ष को पितृपक्ष का नाम दिया गया है। पूरे पित्र पक्ष में पूर्वजों को जल अर्पित करने की परंपरा है लोग पिंडदान करते हैं और उनकी मृत्यु तिथि को श्राद्ध करते हैं। 

    गया को भगवान विष्णु का नगर माना  जाता है  यह मोक्ष भूमि भी कहलाती है फल्गु नदी के तट पर बसे गया जी की चर्चा वायु पुराण में भी की गई है, यहां पितृपक्ष मनाने की परंपरा है । विष्णु पुराण के अनुसार गया में पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष प्राप्ति हो जाती है और वे स्वर्ग चले जाते हैं, माना जाता है कि स्वयं भगवान विष्णु यहां पित्र देवता के रूप में विराजमान हैं। 

    पिंडदान करते यात्री

    इसलिए इसे पित्र तीर्थ भी कहा जाता है, विष्णु धर्म सूत्र के अनुसार देश में श्राद्ध के लिए कुल 55 स्थानों को महत्वपूर्ण माना गया है जिसमें गया का स्थान सर्वोपरि है विष्णुपद मंदिर माना जाता है कि पिंडदान के लिए  मोक्षदायिनी भूमि में 45 बेटियां विद्यमान रहती है,  विष्णुपद मंदिर में अनुष्ठान करने की असीम आस्था है भक्तगण कृष्ण पक्ष में 15 दिन रह कर भी यहां पूजा अर्चना करते हैं। 

    सीताकुंड जाने के लिए ब्रिज

    विष्णुपद मंदिर के अलावा, अन्य पिंड स्थलों में उत्तर मानस,  रामशिला, प्रेतशिला,  रहा कुंड भागेला गौरी, सूर्य कुंड,  ब्रह्म सरोवर, काग बली, ब्रह्मयोणी, गोप्रचारिणी, वैतरणी,  फल्गु, फल्गु घाट, रुकमणी,  गजाधर घाट अक्षय वट मुख्य रूप से है । पिंडदान करने आए तीर्थ यात्रियों के लिए जिला प्रशासन और सरकार की ओर से बेहतर व्यवस्था  इसवार की गई है, रबर डैम इस बार तीर्थ यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना है, इसे देखने के लिए स्थानीय लोग भी काफी संख्या में जाते दिख रहे हैं ।

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